ट्रेन में जन्मी बच्ची को नहीं मिल रहा जन्म प्रमाण पत्र

सीमा की हद को लेकर कई बार पुलिस थानों द्वारा केस दर्ज नहीं करने की बात तो सामने आती है। लेकिन ट्रेन में जन्मी एक बच्ची के जन्म प्रमाण पत्र के लिए उसके अभिभावकों को जद्दोजहद की स्थिति से गुजरने का मामला प्रकाश में आया है।
भाइंदर-पश्चिम के आंबेडकर नगर झोपड़पट्टी में रहनेवाली सुरेखा सुशील तिवारी २५ अक्टूबर २०१८ को प्रसव पीड़ा के बाद मीरा-भाइंदर मनपा के पंडित भीमसेन जोशी (टेंबा) अस्पताल में गई थी। सुरेखा की प्री मैच्योर (समय पूर्व प्रसव) का मामला होने के कारण टेंबा अस्पताल के डॉक्टर ने अस्पताल में एनआईसीयू की व्यवस्था नहीं होने की बात बताकर उन्हें कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में जाने के लिए कहा। शताब्दी अस्पताल में पहुंचने के बाद वहां के डॉक्टरों ने भी उन्हें भर्ती करने में अपनी असमर्थता व्यक्त करते हुए उन्हें मुंबई के केईएम अस्पताल में जाने के लिए कहा। इसके बाद सुशील तिवारी अपनी पत्नी सुरेखा के साथ रिक्शे से कांदिवली स्टेशन पहुंचे और वहां से प्रभादेवी जाने के लिए ट्रेन पकड़ी। इसी दौरान दादर और प्रभादेवी स्टेशन के बीच में ट्रेन में ही सुरेखा ने एक बच्ची को जन्म दिया। आरपीएफ इंस्पेक्टर विजय प्रताप सिंह ने जच्चे-बच्चे को केईएम अस्पताल में जाकर भर्ती कराया। करीब तीन माह तक केईएम अस्पताल के एनआईसीयू में बच्ची रही। माता पिता ने बच्ची का नाम आरती रखा है। अब आरती को मीरा-भाइंदर मनपा, मुंबई महानगरपालिका प्रशासन जन्म प्रमाण पत्र नहीं दे रहा है। केईएम अस्पताल ने डिस्चार्ज कार्ड तो दिया है लेकिन बच्ची का जन्म वहां हुआ यह दर्ज नहीं किया है क्योंकि बच्ची ने ट्रेन में जन्म लिया है।
हालांकि राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए मीरा-भाइंदर मनपा और मुंबई महानगरपालिका को इस संवेदनहीनता के लिए नोटिस जारी किया है।
 दादर और प्रभादेवी के बीच हुआ था जन्म
 राज्य मानवाधिकार आयोग ने दी नोटिस