ठाणे में सरेआम बकरों का कत्लेआम

हाईकोर्ट के निर्देर्शों की धज्जियां उड़ाते कत्लखाने
ठाणे शहर में सरेआम बकरे और मुर्गे काटे जा रहे हैं। कत्लखानों द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है और मुंबई हाइकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
ज्ञात हो कि मुंबई हाइकोर्ट ने इन कत्लखानों के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं, जिन्हें कत्लखानों द्वारा पालन करना अनिवार्य है। कुछ विशेष नियम ये हैं कि सरकारी कत्लखानों के अलावा आम कत्लखानों में जानवरों को नहीं मारा जा सकता। आम कत्लखाने केवल मटन और चिकन का मांस बेच सकते हैं। दूसरा और सबसे जरूरी नियम जानवरों को मारने से पहले उन्हें बेहोश करना जरूरी है। तीसरा और सबसे जरूरी नियम यह है कि सार्वजनिक रूप से जानवरों के मृत शरीर को प्रदर्शनी के रूप में न लटकाया जाए लेकिन आमतौर इन नियमों का पालन कत्लखानों द्वारा नहीं किया जा रहा। इन नियमों का पालन न करने पर मनपा और शहरी पुलिस को उन पर कार्रवाई करने का अधिकार है। ठाणे के वकील सागर कदम ने बताया कि इन नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई करना आवश्यक होता है। नागरिकों को इन बातों को पढ़ना और समझना चाहिए। हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए सभी नियम नागरिकों के हित के लिए होते हैं। एनिमल वेलफेसाायर स्वयंसेवक संजीव दिघे ने बताया कि इन नियमों का उल्लंघन करनेवाले ठाणे शहर में ७०० से अधिक कत्लखाने हैं। इन नियमों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आगे के दिनों में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।