ठुक गई! 

-अंधेर नगरी, चौपट राजा
-कंप्यूटर छोड़, कागज पर आ जा
-वर्ना ‘भक्तों’ बजेगा बैंड बाजा
बड़े अरमानों के साथ २०१४ में हिंदुस्थान की जनता ने मोदी सरकार के हाथों में देश की सत्ता सौंपी थी। अच्छे दिन आनेवाले हैं की आस कुछ ज्यादा ही जग गई थी। लगा था कि देश की सेहत में यह सरकार व्यापक बदलाव लाएगी। मगर जनता के सारे अरमान नेस्तनाबूद हो गए। अच्छे दिन खैर क्या आते इसके विपरीत जनता के अरमान ताबूत में तब्दील हो गए और सरकार इस ताबूत में एक के बाद एक कील ठोकती जा रही है। परसों सरकार ने एक कील और ठोक दी। सरकार ने आदेश जारी किया है कि अब १० चुनिंदा सरकारी एजेंसियां किसी भी व्यक्ति के घर में घुसकर उसके कंप्यूटर की जांच कर सकती हैं। सरकार के इस आदेश के बाद आम लोगों में तीव्र नाराजगी है।
मोदी सरकार के हर पैâसले को आंख मूंदकर सिरोधार्य करनेवाले भक्तों के मन में भी भीतर से खलबली मची हुई है। मगर वे यह जानते हुए भी खुलकर कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं। सरकार के इस तुगलकी निर्णय के बारे में कहा जा रहा है कि अंधेर नगरी चौपट राजा के इस युग में अब लोगों को सरकार के डर से कंप्यूटर छोड़कर फिर से वापस कागज पर आ जाना पड़ेगा। यानी अब जो लोग कंप्यूटर में अपना डेटा सहेजकर रखते हैं, उन्हें इन एजेंसियों की तानाशाही रवैए के बाद अपने डेटा व दस्तावेज पुन: कागजों के हवाले करने पड़ेंगे। सरकार ने जो फरमान जारी किया है, उसके अनुसार अब देश की १० प्रमुख एजेंसियां कभी भी किसी घर में घुसकर कंप्यूटर की जांच कर सकती हैं। इस सरकारी फरमान का सभी प्रमुख दलों के नेताओं ने नाराजगी जताते हुए विरोध किया है।
२०१४ में देश की कमान संभालने के बाद मोदी सरकार ने देश को नोटबंदी व जीएसटी जैसा दंश दिया था। इसके बाद सरकार ने वैâश की बजाय डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए तमाम तरह के उपाय किए। मगर सरकार का यह डिजिटल ड्रीम ने अब एक खतरनाक टर्न लिया है। यह है जासूसी का। सरकार अब आपके कंप्यूटर की जासूसी करेगी। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक फरमान जारी किया जिसमें कहा गया कि देश की १० सुरक्षा एजेंसियां कभी भी किसी व्यक्ति के घर में घुसकर उसके कंप्यूटर का डेटा जांच कर सकती हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्रमुख सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां किसी भी व्यक्ति के कंप्यूटर से जेनरेट, ट्रांसमिट, रिसीव और उसमें स्टोर किए गए किसी भी दस्तावेज को देख सकेंगी। यह अधिकार आईटी एक्ट की धारा-६९ के तहत दिया गया है। सभी सब्सक्राइबर, सर्विस प्रोवाइडर या कंप्यूटर रिसोर्स से जुड़े व्यक्तियों को जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों का सहयोग करना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर ७ साल की सजा और जुर्माना लग सकता है।

सरकार पर बमका विपक्ष
केंद्र सरकार के इस पैâसले के आते ही विपक्ष सरकार पर बमक गया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट कर मोदी पर देश को एक पुलिस स्टेट में तब्दील करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इससे साबित होता है कि पीएम खुद को कितना असुरक्षित महसूस करते हैं। राकांपा नेता माजिद मेमन ने कहा कि यह आम लोगों की निजता में दखल है। आखिर वैâसे कोई भी एजेंसी किसी के भी घर में घुसकर उनके कंप्यूटर डेटा की जांच कर सकती है? कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ‘अबकी बार, निजता पर वार।’
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार ने महज एक सामान्य से सरकारी आदेश के जरिए देश में सभी कंप्यूटर की जासूसी का आदेश दे दिया है। ओवैसी ने कहा कि क्या केंद्र सरकार इस पैâसले से ‘घर-घर मोदी’ का अपना वादा निभा रही है। आप नेता अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, ‘मई २०१४ से ही देश अघोषित आपातकाल के दौर से गुजर रहा है। बीते कुछ महीनों में तो मोदी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। अब नागरिकों के कंप्यूटर तक का कंट्रोल मांगा जा रहा है। क्या दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी में मूलभूत अधिकारों का इस तरह से हनन स्वीकार किया जा सकता है?’

आपके कंप्यूटर पर  इनकी रहेगी नजर
१.इंटेलीजेंस ब्यूरो
२.नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
३.प्रवर्तन निदेशालय
४.सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज
५.डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस
६.सीबीआई
७.एनआईए
८.वैâबिनेट सचिवालय (रॉ)
९.डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलीजेंस
१०.दिल्ली पुलिस कमिश्नर