" /> ठेका मिलने से पहले ही लगा चीनी कंपनियों को झटका, १० मोनो रेल खरीद-निर्माण की बोली प्रक्रिया हुई रद्द

ठेका मिलने से पहले ही लगा चीनी कंपनियों को झटका, १० मोनो रेल खरीद-निर्माण की बोली प्रक्रिया हुई रद्द

मुंबई महानगर विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने १० मोनो रेल खरीद की बोली प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। एमएमआरडीए को वर्तमान बोली प्रक्रिया के लिए दो कंपनियों से प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं, जो कि चीन की कंपनियां थीं। फिलहाल बोली प्रक्रियों को रद्द करने के पीछे की कोई खास वजह नही बताई गई है लेकिन एमएमआरडीए के इस निर्णय से चीनी कंपनियों को यह ठेका मिलने से पहले ही जोर का झटका लग गया है।

मोनो रेल का परिचालन सुचारू रूप से हो इसलिए मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने १० मोनो रेल खरीदने की योजना बनाई थी। इस योजना में मोनो रेल की डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग शामिल थी। एमएमआरडीए के अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों कंपनियां सीएसडी अपलोड होने के बाद भी टेंडर के नियम, शर्तों और पात्रता मानदंडों में संशोधन के लिए लगातार दबाव बना रही हैं। एमएमआरडीए की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में कोविड-१९ के कारण और मेक इन इंडिया योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित विभिन्न नीतियों के अनुरूप, विकास और दीर्घकालिक समर्थन के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी भागीदार की तलाश करने का निर्णय लिया गया है, इसे देखते हुए वर्तमान निविदा को रद्द करने और तुरंत प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही भारतीय कंपनियों की भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए पिछले १० वर्षों से भारत में स्थापित कंपनियों को मौका देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए भेल, बीईएमएल आदि के साथ बातचीत शुरू करने का भी निर्णय एमएमआरडीए ने लिया है।

५ रेक से ही चलेगा काम
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में फिलहाल चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक (सात रास्ता) के बीच मोनो रेल का संचालन हो रहा है। फिलहाल ये सेवा लॉकडाउन के कारण बंद है। करीब २० किमी लंबे इस रूट पर ५ में से ४ रेक यात्री सेवा में शामिल हैं जबकि एक रेक इमरजेंसी के लिए रखा गया है। जरूरत के अनुसार पर्याप्त रेक न होने के कारण आधे घंटे में मोनो रेल का परिचालन होता है, जिससे मोनो रेल को यात्रियों का अच्छा प्रतिसाद नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एमएमआरडीए ने १० अतिरिक्त मोनो रेक खरीदने के लिए टेंडर निकाला था, जिसकी टेक्निकल बिड खुल चुकी थी। इस टेक्निकल बिड में दो कंपनियां आई थीं और ये दोनों कंपनियां चीनी थी। यानी इन दोनों कंपनियों में से जिसे भी मोनो रेक का ठेका मिलता, वो चीनी ही होती। बोली प्रक्रिया रद्द होने से इन चीनी कंपनियों को भारी झटका लगा है।

अब लगेगा लंबा वक्त
मुंबई में मोनो के जो रेक चल रहे हैं, वो रेक मलेशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म स्कोमी इंजीनियरिंग और लार्सन एंड टूब्रो कंपनी द्वारा निर्मित है। इस रेक का जिम्मा और संचालन एमएमआरडीए द्वारा किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक एमएमआरडीए के साथ नियम के मुताबिक काम न करने और समय पर मोनो रेक मुहैया न करने के कारण स्कोमी इंजीनियरिंग कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। एमएमआरडीए के अधिकारियों का कहना है कि स्कोमी इंजीनियरिंग को ब्लैक लिस्ट किए जाने के कारण चाइना की दो कंपनियां सीआरआरसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड और बीवायडी मोनो के १० रेक सप्लाई करने के लिए टेंडर भरा था। अधिकारी का कहना है कि जिस किसी भी कंपनी को मोनो रेक सप्लाई करने का ठेका मिलता, वह कंपनी १५ महीने में मोनो के १० रेक सप्लाई करती। एक कोच की अनुमानित लागत १० करोड़ रुपए थी। ऐसे में १० रेक खरीदने के लिए एमएमआरडीए करीब ४०० करोड़ रुपए खर्च कर रही थी। अब दूसरी टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद जिस किसी भी कंपनी को मोनो का ठेका मिलेगा और जब ये १० रेक यात्री सेवा में शामिल होंगे तब मोनो रेल की प्रत्येक सेवा १५ मिनट पर संचालित होगा, जिससे मोनो को यात्री मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।