" /> डकैतों के भी आराध्य हैं अचलेश्वर महादेव, तीन बार बदलता है शिवलिंग का रंग

डकैतों के भी आराध्य हैं अचलेश्वर महादेव, तीन बार बदलता है शिवलिंग का रंग

यह मंदिर १८७५ का बना बताया जाता है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह मंदिर उससे भी सैंकड़ों साल पुराना है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक यह १८७५ के आसपास का ही बताया जाता है। उस जमाने में यहां डकैतों का राज था और बीहड़ में आने से लोग कतराते थे। सुबह में शिवलिंग का रंग लाल रहता है, दोपहर को केसरिया रंग का हो जाता है और जैसे-जैसे शाम होती है शिवलिंग का रंग सांवला हो जाता है।
धौलपुर में स्थित यह विचित्र शिवलिंग
यह चमत्कारी शिवलिंग राजस्थन के धौलपुर जिले में स्थित है। घौलपुर जिला राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यह इलाका चंबल के बीहड़ों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं दुर्गम बीहड़ों के अंदर स्थित है, भगवान अचलेश्वर महादेव का मंदिर जहां होनेवाले इस चमत्कार का रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया है।
भगवान अचलेश्वर महादेव का यह मंदिर हजारों साल पुराना है। चूंकि यह मंदिर बीहड़ों में स्थित है और यहां तक पहुंचने का रास्ता बहुत ही पथरीला और उबड़-खाबड़ है इसलिए पहले यहां बहुत ही कम लोग पहुंचते थे। परंतु जैसे-जैसे भगवान के चमत्कार की खबरें लोगों तक पहुंची यहां पर भक्तों की भीड़ जुटने लगी।
गहराई का पता नहीं चल पाया इसलिए अचलेश्वर महादेव
इस शिवलिंग की एक और अनोखी बात यह है कि इस शिवलिंग के छोर का आज तक पता नहीं चल सका है। कहते हैं बहुत समय पहले भक्तों ने यह जानने के लिए कि यह शिवलिंग जमीन में कितना गड़ा है, इसकी खुदाई शुरू की थी, परंतु काफी गहराई तक खोदने के बाद भी उन्हें इसके छोर का पता नहीं चला।