डांस ही मेरी सांस है-प्रभुदेवा

बॉलीवुड में प्रभुदेवा एक बड़ा नाम है। ४४ वर्षीय प्रभुदेवा के करियर को ३० वर्ष पूरे हो चुके हैं और १०० से अधिक फिल्मों के वे कोरियोग्राफर रह चुके हैं। प्रभुदेवा ने १४ वर्ष की उम्र से फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उन्हें दक्षिण की फिल्मों का सुपरस्टार माना जाता है। इन दिनों फिल्म `मक्र्युरी’ को लेकर प्रभुदेवा चर्चा में हैं। लेखक-निर्देशक कार्तिक सुब्बूराज की इस फिल्म में प्रभुदेवा मुख्य भूमिका में हैं। यह साइलेंट फिल्म है। १३ अप्रैल को फिल्म रिलीज हो रही है। प्रभुदेवा ने करियर के अलग-अलग पहलुओं पर पूजा सामंत से बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-

मर्क्युरी (पारा ) कितनी अलग है, क्या खासियत है इस फिल्म की?
`मर्क्युरी’ फिल्म के लेखक कार्तिक सुब्बूराज में गजब की प्रतिभा है। मैंने कार्तिक की इससे पहले की फिल्में भी देखी हैं और मैं उनकी प्रतिभा पर अचंभित हूं। `मक्र्युरी’ की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है। कोडाई कनाल में एक फैक्टरी में `मक्र्युरी’ के फटने से कई कर्मचारियों की मौत हुई थी। इस भयंकर हादसे के बैकड्रॉप पर यह फिल्म है।

कैसा रहा है अब तक का आपका फिल्मी सफर?
अभी तक का फिल्मी सफर बहुत अच्छा ही रहा है। पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहता क्योंकि सोचता हूं जब करियर की गाड़ीr अच्छी तरह से चल रही है तो गाड़ी का बोनट क्यों खोलें?

आपको इस बात का मलाल है कि शिक्षा पूरी नहीं हो पाई?
मुझे कोई मलाल नहीं हैं। मुझे मलाल तो तब होता जब मुझे खुद पढ़ाई में दिलचस्पी होती। छठी या सातवीं कक्षा की परीक्षा में मैं पेâल हुआ तो मेरे पिताजी कोरियोग्राफर थे, मैं उनके साथ सेट पर जाने लगा। मैंने बहुत जल्द कोरियोग्राफी में मास्टरी हासिल की। १४ वर्ष का था जब बाल कलाकार के रूप में फिल्म `मौन रागम’ में काम किया और आगे चलकर अभिनेता, निर्माता-निर्देशक बन गया।
कितना अलग है हिंदी और साउथ की फिल्मों में काम करना?
किसी जमाने में हिंदी और साउथ की फिल्मों में भाषा, व्यवहार, बजट इन सभी में बहुत अंतर हुआ करता था। साउथ की फिल्में ४ से ६ महीने में बन जाती थीं और हिंदी फिल्में बनने में वक्त लगता था। अब हिंदी हो या साउथ की फिल्में, कोई भेदभाव नहीं रहा। साउथ के दर्जनों कलाकार वहां काम करने के बाद हिंदी में आते हैं, वो फिर तमन्ना हों, अनुष्का शेट्टी हों या फिर प्रभास हों।

आपको इंडियन माइकल जैक्सन कहा जाता है। क्या आपके लिए रोल मॉडल थे वे ?
मैंने अपने अप्पा, भाई (राजू देवा)का भी नृत्य से लगाव और इसी क्षेत्र में काम करते देखा है। मैंने भी बचपन से भरतनाट्यम सीखा, मेरे गुरु धर्मराज और लक्ष्मी नारायण हैं जिन्होंने मुझे क्लासिकल में शिक्षा दी। मैंने माइकल जैक्सन को गुरु नहीं माना, उनकी डांस स्टाइल को बहुत पसंद किया। मेरे कंटम्पररी डांस माइकल जैक्सन से प्रभावित लगे तो लोगों ने मुझे इंडियन माइकल जैक्सन मान लिया।

आप अपने फिटनेस को बनाए रखने के लिए क्या करते हैं?
शायद मैं जेनेटिकली फिट हूं। डांस ही मेरा फिटनेस है। यही मेरी सांस है और यही एक्सरसाइज। वैसे मैं सुबह छह बजे उठ जाता हूं। आठ बजे तक डांस का रियाज, ब्रेकफास्ट में वक्त निकल जाता है। शाम को ६ बजे पैकअप होने पर मैं आपको ६ बजकर ५ मिनट पर वहां नजर नहीं आऊंगा। परिवार के साथ वक्त बिताता हूं। शाकाहारी-संतुलित भोजन और रेगुलर लाइफस्टाइल मेरा फिटनेस मंत्र है।