डाकिया भेद लाया!

एक जमाना था जब लोग दूर देश में रहनेवाले अपने रिश्तेदारों का संदेश पाने के लिए बेसब्री से डाकिए की राह देखा करते थे। आज मोबाइल और इंटरनेट ने डाकिए के उस महत्व को खत्म कर दिया है। ऐसे में कभी खबर आती है कि डाक विभाग को बैंक में तब्दील किया जाएगा तो कभी कहा जाता है कि अब सरकार डाककर्मियों से बीमा पॉलिसी बिकवाएगी लेकिन इन सबके बीच जो खबर सामने आ रही है उससे देशभर के डाककर्मियों के माथे पर चिंता की लकीरें निश्चय ही गहरी हो जाएंगीr। डाकियों को गांवों में जाकर लोगों से जुड़ी विभिन्न जानकारियां जुटाने को कहा गया है। इस तरह खबर के अनुसार अब सरकार डाकियों को भेदिया बनाने का प्रयास कर रही है।
२०१९ का लोकसभा चुनाव करीब आता जा रहा है। देश में तमाम तरह के सर्वे अभियान चल रहे हैं। देश की एक बड़ी आबादी अभी भी गांवों में ही रहती है। ऐसे में ग्रामीण जनता का मूड जानना सरकार के लिए जरूरी है। यही कारण है कि सरकार गांवों से महत्वपूर्ण जानकारी इकट्टा करा रही है। चूंकि डाकियों का डाक के लिए गांव में आना-जाना लगा ही रहता है इसलिए सरकार ने जानकारी जुटाने के लिए डाकियों को काम पर लगा दिया है। यूपी-बिहार जैसे देश के बड़े राज्यों के वोटरों का मिजाज दिल्ली की सत्ता निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। वहां की काफी आबादी गांवों में निवास करती है। इसलिए उनके मन के भेद को जानना मोदी सरकार के लिए जरूरी हो गया था। यही वजह है कि डाकियों को ग्रामीण जनता के मन का भेद जानने पर लगाया गया है।
गांव में आए जासूस डाकिए
देश के डाकियों को अब एक नया काम दिया गया है। उन्हें गांवों में जाकर जासूसी करनी है कि वहां क्या चल रहा है? लोगों के मन में क्या है? वे क्या सोच रहे हैं? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार लोगों की जरूरतों के अलावा अपने पक्ष या विपक्ष में माहौल के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास भी कर रही है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार डाकियों से यह जासूसी करवा रही है।
जानकारी के अनुसार डाकिए गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जासूस का काम कर रहे हैं और डाक बांटने के साथ साथ उन्हें गांव के हर घर की खबर केंद्र सरकार को भेजनी पड़ रही है। गांव में किस घर में विद्युतिकरण हुआ है और किस में नहीं हुआ, इसकी जानकारी एक फॉर्म में भरकर भेजना और उसका रिकॉर्ड अपने पास रजिस्टर में रखना पड़ रहा है।
डाकियों को मुख्य डाक घर से दिए गए फॉर्म पर गांव की जनसंख्या, आवासों की संख्या, विद्युतिकरण, हर परिवार के राशन कार्ड, एपीएल और बीपीएल की जानकारी और आधार कार्ड, मोबाइल नंबर की जानकारी, निर्वाचित जनप्रतिनिधि के बारे में ग्रामीणों की राय के साथ-साथ सरपंच का नाम और मोबाइल नंबर भी फॉर्म में भरकर हर रोज मुख्य डाक घर में जमा करना पड़ रहा है, जो सीधे पीएमओ को भेजा जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार डाकियों का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से बताया गया है कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदेश है और इस फॉर्म पर मांगी गई जानकारी जल्द से जल्द मुहैया कराकर भेजी जाए। कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है। इस बारे में दिलचस्प तथ्य यह है कि सारा काम मौखिक आदेश पर चल रहा है। इस बारे में कहीं कोई सर्कुलर नहीं निकाला गया है। बताया जाता है कि डाक बांटने के साथ-साथ इस अतिरिक्त काम से डाकिए नाराज हैं।