डार्क वेब का डर! आपके कंप्यूटर तक घुस आया अंडरवर्ल्ड

अंडरवर्ल्ड की बात चलते ही खून-खराबे, माफिया, गैंगवॉर आदि का चित्र दिमाग में चलने लगता है। बाहरी दुनिया के अंडरवर्ल्ड की करतूत तो अखबारों व टीवी चैनलों पर नजर भी आ जाती है पर इस अंडरवर्ल्ड से दूर एक अंडरवर्ल्ड और भी है। यह है साइबर क्राइम का अंडरवर्ल्ड। यह बाहर से नजर नहीं आता और न ही वहां गोलियां चलती हैं। यहां लाखों करोड़ रुपयों के अपराध होते हैं। साइबर क्राइम के अंडरवर्ल्ड की इस दुनिया को ‘डार्क वेब’ कहा जाता है। हाल ही में साइबर अपराध की एक रिपोर्ट चौंका गई। कोई साइबर गैंग ६१.७ करोड़ के डेटा बिटक्वॉइन में २० हजार डॉलर में बेचने की कोशिश कर रहा है।
आपको अपने कंप्यूटर को संभाल कर रखना है क्योंकि ये इटरनेट का अंडरवर्ल्ड आपके कंप्यूटर में भी घुस चुका है। इस अंडरवर्ल्ड में डेढ़ ट्रिलियन डॉलर का सालाना कारोबार होता है। यह करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए के करीब है। इसमें अवैध ऑनलाइन मार्केट में ८६० बिलियन डॉलर का कारोबार होता है। आईपी चोरी का कारोबार ५०० बिलियन डॉलर का है। डेटा ट्रेडिंग १६० बिलियन डॉलर का है तो क्राइमवेयर १.६ बिलियन डॉलर और रैंसमवेयर १ बिलियन डॉलर का कारोबार है। ये सारा काम हैकर्स करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार एक हैकर करीब ३० हजार डॉलर तक महीने का कमा लेता है। इनके भी तीन लेवल हैं धनी, मध्यम व गरीब।
इसमें धनी वर्ग १६६ हजार डॉलर तक महीने में कमा लेता है जबकि मध्यम वर्ग ७५ हजार डॉलर व गरीब वर्ग ३.५ डॉलर कमा लेता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साइबर अपराधी चोरी किए गए ६१.७ करोड़ अकाउंट्स के डीटेल्स खुलेआम डार्क वेब पर बेच रहे हैं। इन ६१.७ करोड़ अकाउंट्स का डेटा साइबर अपराधियों ने १६ अलग-अलग वेबसाइट्स में सेंधमारी करके चुराया है। इस बात का खुलासा एक ब्रिटिश वेबसाइट ‘द रजिस्टर’ ने किया है। यह डेटा डार्क वेब के मार्वेâट प्लेस, ड्रीम मार्वेâट पर ड्रग्स, हथियारों और दूसरे गैर-कानूनी चीजों से साथ लिस्टेड है। यानी यहां से इस डेटा को खरीदा जा सकता है।
डार्क वेब में घातक हथियार,
लोगों के क्रेडिट / डेबिट कार्ड के डीटेल्स, ई-मेल एड्रेस, लोगों के फोन नंबर, ड्रग्स, नकली करंसी और दूसरी चीजें बड़ी आसानी से मिल जाती हैं। ये सारी चीजें यहां काफी कम दाम पर मिल जाती हैं। असल में हम जिस इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वह बहुत छोटा हिस्सा है। इंटरनेट के बड़े हिस्से तक लोगों की पहुंच नहीं है और इसे ही डार्क वेब कहते हैं। इंटरनेट का यह संसार दुनिया की नजरों से ओझल है। साइबर सुरक्षा फर्म कास्परस्की लैब ने पिछले दिनों खुलासा किया था कि आपके पर्सनल डीटेल्स डार्क वेब में सिर्फ ३,५०० रुपए में मिल रहे हैं। इन डीटेल्स में आपके सोशल मीडिया अकाउंट्स के पासवर्ड, बैंक डिटेल्स और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी इन्फॉर्मेशन शामिल हैं। डार्क वेब में ड्रग्स या दूसरी चीजें बेचनेवाले ज्यादातर लोग विदेश में होते हैं। पेमेंट करने पर ये कूरियर या अपने एजेंट्स के जरिए लोगों तक चीजें पहुंचाते हैं।
क्रिप्टोकरंसी में बिक रहा डेटा
ब्रिटिश वेबसाइट ‘द रजिस्टर’ अनुसार चोरी का डेटा ‘डार्क वेब’ के मार्केट प्लेस ड्रीम मार्केट पर ड्रग्स, हथियारों और दूसरे गैर-कानूनी चीजों से साथ लिस्टेड है। यानी यहां से इस डेटा को खरीदा जा सकता है। क्रिप्टोकरंसी के २० हजार डॉलर में ६१.७ करोड़ डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है।
हैकर्स के तीन वर्ग
एक रिपोर्ट के अनुसार एक हैकर करीब ३० हजार डॉलर तक महीने का कम लेता है। इनके भी तीन लेवल हैं। धनी, मध्यम व गरीब। इसमें धनी वर्ग १६६ हजार डॉलर तक महीने में कमा लेता है जबकि मध्यम वर्ग ७५ हजार डॉलर व गरीब वर्ग ३.५ डॉलर कमा लेता है।
अंडरवर्ल्ड का धंधा
अवैध ऑनलाइन मार्केट ८६०
आईपी चोरी ५००
डेटा ट्रेडिंग १६०
क्राइमवेयर १.६
रैंसमवेयर १
(बिलियन डॉलर में)