डिजिटल इंडिया पर डायरी भारी

इंडिया को डिजिटल बनाने को लेकर भले ही बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हों लेकिन आज भी ५५ प्रतिशत हिंदुस्थानी ऐसे हैं, जिन्हें अपने हिसाब-किताब का लेखा-जोखा डायरी में ही लिखना ज्यादा मुनासिब लगता है। यह खुलासा हाल ही में मनी हैबिट ने एक सर्वे के बाद किया है। इस सर्वे से यह स्पष्ट है कि आज भी डिजिटल इंडिया पर डायरी भारी है। 

बता दें कि मनी हैबिट्स ने हाल ही में एक सर्वेक्षण किया था। हिंदुस्थान के करीब १२ शहरों में यह सर्वेक्षण किया गया था। इसमें हिंदुस्थानी अपना आर्थिक लेखा-जोखा कैसे करते हैं? यह जानने की कोशिश की गई थी। सर्वेक्षण के दौरान ५५ प्रतिशत लोगों ने आर्थिक लेन-देन का लेखा-जोखा डायरी में लिखने की बात कही है जबकि ३८ फीसदी लोग अपने आर्थिक लेन-देन का व्यौरा एक्सेल सॉफ्टवेयर में करते हैं। इसी तरह १५ फीसदी लोग मोबाइल ऐप में अपने आर्थिक लेन-देन का रिकॉर्ड रखते हैं। मनी हैबिट्स के सर्वे में यह भी सामने आया है कि अन्य विकसित देशों की तुलना में हिंदुस्थान में लाइफ इंश्योरेंस का प्रमाण तीन फीसदी से कम है। सर्वेक्षण के दौरान ४६ फीसदी हिंदुस्थानियों को लगता है कि उनकी वार्षिक आय से १० फीसदी ज्यादा इंश्योरेंस कवर होना चाहिए। एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस मार्केटिंग व डायरेक्ट चैनल के संचालक मोहित गोयल ने बताया कि आर्थिक जिम्मेदारी क्या है? इसकी कल्पना नियमित बदल रही है।