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डिजिटल बदला!

पाकिस्तान ने जब हिंदुस्थान की सीमा में घुसकर हमारे सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, तब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर हमला किया। यह हमला सर्जिकल स्ट्राइक नाम से प्रसिद्ध हुआ। अब चीनी सेना गलवान घाटी में घुसी है और उनसे हुई झड़प में हमारे २० जवान शहीद हो गए। हमारे जवानों ने भी चीनियों को मारा। फिर भी पाकिस्तान की तरह उनको सबक सिखाओ, ऐसी मांग होते ही हिंदुस्थान ने चीन पर ‘ऑनलाइन’ हमला अर्थात डिजिटल स्ट्राइक करके खलबली मचा दी है। लद्दाख और गलवान घाटी के रक्तरंजित संघर्ष के बदले के रूप में केंद्र सरकार ने टिकटॉक सहित ५९ चीनी मोबाइल एप्लीकेशन को बैन करने का निर्णय लिया है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि हिंदुस्थान की संप्रभुता, एकता, संरक्षण और जनता की सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक चीनी ऐप्स को बैन कर दिया गया है। अब सवाल पैदा होता है कि चीनी ऐप्स से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है, यह सरकार की समझ में कब आया? यदि राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा था ही तो इतने साल ये ऐप्स और उनका व्यवहार हमारे देश में निर्बाध रूप से वैâसे शुरू था? मतलब राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर सरकार ने अनदेखी की, विपक्ष के इस आरोप पर सरकार की क्या नीति होगी? ये जो चीनी ‘ऐप्स’ हैं, इनके कारण देश की जानकारी बाहर जाती है, ऐसा सरकार ने कहा है। अगर ये सही है तो इतने साल इस ‘ऐप’ को चालू रखनेवाली सारी सरकारों को कटघरे में खड़ा करना पड़ेगा। सरकार ने चीन पर जो ‘डिजिटल स्ट्राइक’ किया है, उसमें कुल ५९ ऐप्स के नाम शामिल हैं। हिंदुस्थान सरकार द्वारा ‘ऑनलाइन’ कंपनी को बंद किए जाने पर चीन ने नाराजगी व्यक्त की है। लेकिन सिर्फ नाराजगी व्यक्त करके क्या फायदा? गलवान घाटी में आज भी चीनी सैनिक हैं और वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कौन कितना पीछे हटेगा, इस पर दोनों देश के सैन्य कमांडरों में चर्चा जारी है। इसी दौरान चीन के ५९ ऐप्स पर मोदी सरकार ने बैन की घोषणा कर दी है। चीन की आंखों में आंखें डालकर बोलने की हिम्मत हमारे में है, प्रधानमंत्री मोदी ने यह साबित कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी के हिम्मत की दाद देनी होगी। चीनी ऐप पर बैन लग जाने से मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग करनेवाली हिंदुस्थान की करोड़ों जनता के हितों की रक्षा होगी। एंड्रॉयड और आईओएस प्रणाली पर चलनेवाले ऐप्स से हमारे ‘यूजर्स’ की जानकारी को अवैध तरीके से विदेशी सर्वर को भेजा जाता है, ऐसी शिकायतें थीं। टिकटॉक जैसे चीनी ऐप अश्लीलता और अन्य दकियानूसी बातों को बढ़ावा दे रहे थे तथा उससे कई ‘टिकटॉक’ स्टार्स पैदा हो गए। उनमें से कई टिकटॉक स्टार्स ने भाजपा में प्रवेश किया, ऐसी खबरें प्रकाशित हुर्इं। अब सवाल यह है कि राजनीति में घुसे चीनी टिकटॉक स्टार्स का क्या होगा? हमारे देश की जानकारी का भंडार बाहर जाता है, इसका ज्ञान हमारे सत्ताधीशों को हुआ और इसके लिए लद्दाख की सीमा पर हमारे २० जवानों को शहीद होना पड़ा। चीन की अर्थव्यवस्था को झटका देना आवश्यक था लेकिन सिर्फ ऐप पर बैन लगा देने से उसकी कमर नहीं टूटेगी। चीन का हिंदुस्थान में व्यापार और निवेश का मामला है। सबसे बड़ा निवेश गुजरात राज्य में हुआ है। हिंदुस्थान में ‘५उ’ नेटवर्क शुरू करने का कॉन्ट्रैक्ट चीन के हुवेई (प्ल्aौग्) कंपनी को मिला है। इस कंपनी के हाथ में हिंदुस्थान की डिजिटल अर्थव्यवस्था की चाबी होना मतलब हिंदुस्थानी अर्थव्यवस्था के भविष्य की मालकियत चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हाथ में होने जैसा है। यह मामला भविष्य में देश के लिए सबसे ज्यादा घातक साबित होनेवाला है। सरकार ये क्यों नहीं समझ रही? लद्दाख संघर्ष के पश्चात राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सरकार डिजिटल रूप से जागी, ये जारी रहना चाहिए। चीन की हर कंपनी को अपना डाटा चीन सरकार को देना बंधनकारक है। चीनी गुप्तचर एजेंसी और चीनी सेना इस ‘डाटा’ का प्रयोग हिंदुस्थान विरोध में कर सकती है, ऐसा हमारी गुप्तचर एजेंसियों ने सरकार को सूचित किया है। मतलब अब तक देश की गोपनीय जानकारियां चीन के पास पहुंच रही थीं। अब जो हुआ सो हुआ। सरकार अब जाग गई है। इसके पीछे जनता की लगातार मांग है, जिससे चीन के ऐप्स बैन किए गए। सैनिकों के बहे खून का बदला डिजिटल तरीके से लिया गया है।