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डिमांड में प्रियंका

जन्मजात नागरिक
देश में नागरिकता कानून को लेकर छिड़ी बहस के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय के एक जवाब ने स्थिति स्पष्ट की है। शुभंकर सरकार द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत किए गए आवेदन क्र. आरटीआई/६३२/२०२०-पीएमआई में मांग की गई थी कि कृपया हमारे माननीय प्रधानमंत्री के नागरिकता प्रमाणपत्र को दिखाएं। जिसके जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव प्रवीण कुमार ने जवाब (क्र. पीएमओआईएन/आर/ई/२०/००२४३) दिया है कि नागरिकता कानून १९५५ की धारा ३ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन्म से भारतीय नागरिक हैं और ऐसी स्थिति में उनके पंजीकरण माध्यम से नागरिकता संबंधी नागरिकता प्रमाणपत्र का प्रश्न ही नहीं उठता। सवाल है कि यह नियम हर भारतीय पर यदि लागू है तो फिर भारतीय सेना में सेवा दे चुके लोग भी भारत की नागरिकता सूची में शामिल क्यों नहीं किए गए? यही झोल सारी फसाद का कारण बना हुआ है।
डिमांड में प्रियंका
बिल्कुल ‘ऊधौ मन न भये दस बीस’ वाली मुद्रा है। इन दिनों कांग्रेस के लोग सोच रहे हैं कि काश एक से ज्यादा प्रियंका गांधी होतीं तो सबको अपनी निष्ठा और नजदीकी दिखाने का अवसर मिल जाता। कांग्रेस शासित तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कमलनाथ और भूपेश बघेल प्रियंका गांधी को अपने-अपने राज्य से राज्यसभा में भेजना चाहते हैं। पंजाब कैसे पीछे रह गया, यह समझना बाकी है। कांग्रेस के तीनों क्षत्रप चाहते हैं कि गांधी परिवार राज्यसभा टिकट के लिए प्रियंका गांधी के नाम की हरी झंडी दे दे। प्रियंका को राज्यसभा भेजने की मुहिम में गांधी परिवार से जुड़े कई नजदीकी नेता भी कोशिश में जुटे हैं। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को मनाने की कोशिशें पर्दे के पीछे जारी हैं। मसला प्रियंका को राज्यसभा भेजने से ज्यादा कांग्रेस में नेतृत्व के संकट का रास्ता खोजना भी है। स्वास्थ्य कारणों से सोनिया की सक्रियता घटी है और राहुल फिर से अध्यक्ष बनना नहीं चाहते। लिहाजा कवायद चल रही है।
रैली नाच
सूबे के मुखिया और पार्टी के सबसे बड़े नेता का जन्मदिन हो, चुनाव की मुनादी का मुहूर्त निकला हो और ठुमका न हो! ये अच्छी बात नहीं है। किसी समय लालूप्रसाद यादव की रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए बार बालाओं के ठुमके चर्चा में रहते थे। अब जिन चाचाश्री को तेजस्वी पलटू चाचा कहते हैं, उनके जन्मदिन पर आयोजित सभा में भीड़ जुटाने के लिए ठुमके लगे हैं। रैली से पहले विधायक ददन पहलवान के आवास पर लोगों के मनोरंजन के लिए हुए रंगारंग कार्यक्रम में बार बालाओं ने जमकर ठुमके लगाए। नीतीश कुमार के जन्मदिन के बहाने जनता दल यूनाइटेड की रविवार को हुई रैली में भीड़ जुटाने के लिए सभी जदयू विधायकों में होड़ लगी थी। ददन बाजी मार ले गए। वजह भी साफ है कि चुनावी साल है और जो भी रैली में सबसे ज्यादा भीड़ जुटाएगा, उसकी टिकट लगभग पक्की है।
चोपन बाहर
यकीन मानिए दो सप्ताह पहले की यह खबर आपको किसी भी राष्ट्रीय चैनल पर नहीं दिखी होगी। जिस पुलवामा हमले को लेकर देश की राजनीति के तेवर बदल गए थे उसी पुलवामा हमले के एक आरोपी को दिल्ली की एक अदालत ने १८ फरवरी को जमानत दे दी। क्यों दे दी? क्योंकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) निर्धारित वैधानिक अवधि के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने में विफल रही। अपने आदेश में, विशेष एनआईए न्यायाधीश परवीन सिंह ने देखा कि यूसुफ चोपन वैधानिक जमानत का हकदार है। अदालत ने चोपन को इस तरह के एक जमानत बांड के साथ ५०,००० रुपए का निजी मुचलका देने को कहा। चोपन ने जमानत के लिए अपने आवेदन में कहा था कि वह १८० दिनों के लिए हिरासत में था और जांच एजेंसी ने ११ फरवरी, २०२० को दिए गए समय के बावजूद चार्जशीट दाखिल नहीं की थी। यह हाल तब है जब इस हमले के मुख्य स्रोत पर अभी भी रहस्य कायम है और जिस पर तमाम सवाल भी उठ चुके हैं। करीब १५ दिन बाद यह खबर एक अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका की वेबसाइट पर दिखी है। अलबत्ता कोलकाता में नायब सरकार फिर दहाड़े हैं कि घुस कर मारेंगे। किसे? इतना तो आप भी जानते हैं।