डॉक्टरों की रही हड़ताल ओपीडी के मरीज बेहाल

मुंबई सहित देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल का असर देखने को मिला। डॉक्टरों की सबसे बड़ी संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), इंडियन रेडियोलॉजिस्ट एंड इमेजिंग एसोसिएशन (आईआरआईए), एसोसिएशन ऑफ मेडिकल कंसलटेंट मुंबई (एएमसी) व अन्य डॉक्टरों के संगठनों के हड़ताल पर होने से ओपीडी में आनेवाले मरीज काफी प्रभावित हुए। कई मरीजों को अस्पताल आकर लौट जाना पड़ा। अस्पताल में मौजूद होने के बावजूद अपना विरोध प्रगट करने के लिए डॉक्टरों ने मरीजों की जांच नहीं की। हालांकि गंभीर रोगियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई और उनका तत्काल इलाज किया गया। मुंबई सहित आसपास के क्षेत्र में कल सभी बड़े निजी अस्पताल में सन्नाटा पसरा रहा। राज्य में कल लगभग ५५ हजार से ज्यादा डॉक्टर हड़ताल पर रहे।
मीरा-भाइंदर में भी `इलाजबंदी’
भाइंदर।कोलकाता के जूनियर डॉक्टरों के ऊपर हुए हमले और मारपीट को लेकर मीरा-भाइंदर के डॉक्टरों ने भी विरोध व्यक्त किया। घटना के विरोध में कल मीरा-भाइंदर शहर के डॉक्टरों ने चिकित्सा सेवा बंद रखी। हालांकि आपातकालीन सेवा सभी डाक्टरों ने चालू रखी थी। इस दौरान डॉक्टर ने मरीजों का इलाज तो किया लेकिन `काला फीता’ बांधकर अपना विरोध भी दर्ज कराया। गौरतलब है कि मीरा-भाइंदर में डॉक्टरों की अलग-अलग छह एसोसिएशन है, सभी एसोसिएशन के डॉक्टर हमले के विरोध में सोमवार को सुबह ६ बजे से मंगलवार की सुबह ६ बजे तक मरीजों को नहीं देखने का पैâसला लिया था। इस मामले में आईएमए के ज्वाइंट सेक्रेटरी (मीरा-भाइंदर) के डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि हमने ये विरोध कोलकाता में अपने साथियों के समर्थन में किया है लेकिन हम मरीजों को किसी तरह की तकलीफ नहीं देना चाहते हैं जबकि पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल ने २०१० में डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए पास किए गए अधिनियम को लागू करने की मांग की है।
कल्याण में दिखा असर
कल्याण। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान का कल्याण-डोंबिवली के डॉक्टरों ने भी समर्थन किया। गौरतलब हो कि कोलकाता में जूनियर डॉक्टर परिभा मुखर्जी पर मरीजों के परिजनों द्वारा हमला कर दिया गया, जिस पर वहां की मुख्यमंत्री द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करने के कारण वहां डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। इसी क्रम में कल्याण-डोंबिवली के डॉक्टरों ने भी डोंबिवली के जिमखाना में पत्रकार परिषद की। इस अवसर पर डॉक्टर पाटे ने कहा कि आईएमए के डोंबिवली में कुल ३९० सदस्य हैं और सभी मिलकर बंगाल में डॉक्टर पर हुए हमले का विरोध करते हैं। शहर के १५० दवाखाने तथा १५० अस्पताल विरोध में बंद रहे लेकिन मानवता को ध्यान में रखते हुए गंभीर रोगियों की सेवाएं चालू रहीं।