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डॉक्टर डेथ!, १०० हत्या के बाद बंद की गिनती

आमतौर पर डॉक्टरों को भगवान का रूप माना जाता है। हालांकि सभी डॉक्टर देवताओं जैसे कर्म नहीं करते हैं। फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर बने सीरीयल किलर संतोष पोल जैसे और भी कई दरिंदे इस दुनिया में मौजूद हैं। डॉक्टर डेथ के नाम से कुख्यात संतोष पोल ने गहने और रुपयों के लालच में १८ महिलाओं को जहरीला इंजेक्शन देकर मौत के घाट उतारा था लेकिन अब एक ऐसा सीरीयल किलर सामने आया है जो १०० से ज्यादा लोगों की हत्या कर चुका है। हत्या के मामले में पैरोल से छूटने के बाद फरार हुए इस सीरीयल किलर को पुलिस ने ६ महीनों की मशक्कत के बाद दोबारा गिरफ्तार किया है। इसके अपराधों की फेहरिस्त देखकर अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाएगी। वह खुद कबूल कर चुका है कि करीब सौ लोगों की हत्या के बाद उसने उसका शिकार बननेवालों की गिनती करनी बंद कर दी थी।

वैश्विक महामारी कोरोना से दुनियाभर में हाहाकार मचा है। इस दौरान जहां मंदिर-मस्जिद व दूसरे धार्मिकस्थलों में ताले बंद हैं, वहीं अस्पतालों में डॉक्टर व दूसरे स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। इसी बीच एक ऐसा हैवान भी सामने आया है जिसने डॉक्टरी के पेशे को कलंकित कर दिया है। यह शख्स है यूपी के अलीगढ़ का रहनेवाला देवेंद्र शर्मा, जो कि पेशे से एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है। हत्या के एक मामले में कोर्ट ने डॉक्टर देवेंद्र शर्मा को दोषी करार देते हुए उम्र वैâद की सजा सुनाई है। जनवरी में पैरोल पर रिहा होने के बाद से फरार चल रहे देवेंद्र शर्मा को दिल्ली पुलिस ने लगभग ६ महीने की मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया है। देवेंद्र शर्मा के बारे में पुलिस ने जो कुछ भी खुलासा किया है वह बेहद सनसनीखेज है। कई अपराधों में संलिप्त रह चुका डॉक्‍टर देवेंद्र शर्मा कथित तौर पर दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में १०० से अधिक लोगों की हत्या कर चुका है। ऐसा पुलिस का दावा है।
देवेंद्र शर्मा के खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में कई मामले दर्ज हैं। एक अनुमान के अनुसार वह १०० से अधिक हत्या के मामलों में शामिल हो सकता हैं। हालांकि उसके द्वारा अंजाम दी गई वारदातों की एक सटीक संख्या के बारे में बताया नहीं जा सकता। उसे पहले भी दो बार उत्तर प्रदेश में नकली गैस एजेंसी चलाने के लिए गिरफ्तार किया गया था और विभिन्न राज्यों में किडनी रैकेट चलाने के लिए जेल भी गया था। उसे अपहरण और हत्या के कई मामलों में दोषी भी ठहराया गया था। बताया जाता है कि देवेंद्र शर्मा हत्या के एक मामले में सेंट्रल जेल जयपुर में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे २००२ और २००४ के बीच अंजाम दी गई कई हत्याओं के मामलों में गिरफ्तार किया गया था, उनमें से सात मामलों में उसे दोषी ठहराया गया था। वह उम्र वैâद की सजा भुगत रहा था। १६ साल जेल में बिताने के बाद वह इसी साल जनवरी महीने में २० दिनों के लिए पैरोल पर बाहर आया था लेकिन वह फरार हो गया। दिल्ली आने से पहले वह कुछ दिन अपने गांव में रहा। दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में पहले वह एक परिचित के घर पर रह रहा था और बाद में बापरोला चला गया। पुलिस ने उसके ठिकाने की जानकारी प्राप्त करने के बाद उसे गिरफ्तार किया है।
डॉक्टर शर्मा दिल्ली के बापरोला में छिपा हुआ था। दिल्ली में उसने एक दूर के रिश्तेदार (विधवा महिला) से गुपचुप रूप से शादी की और एक प्रॉपर्टी डीलर का कारोबार कर रहा था। गत मंगलवार को उसने पूछताछ में कई अन्य मामलों में अपनी भागीदारी का खुलासा किया। उसने बताया है कि बिहार के सिवान से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद उसने १९८४ में जयपुर में एक क्लिनिक शुरू किया। १९९२ में उसने गैस डीलरशिप योजना में ११ लाख रुपये का निवेश किया, लेकिन उसे धोखा हुआ और वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। १९९५ में उसने अलीगढ़ के छारा गांव में एक नकली गैस एजेंसी शुरू की और बाद में आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गया।१९९४ में शर्मा जयपुर, बल्लभगढ़, गुड़गांव और अन्य स्थानों में संचालित एक अंतरराज्यीय किडनी प्रत्यारोपण रैकेट में शामिल हो गया। इससे पहले वर्ष २००४ में उसे और कई अन्य
डॉक्टरों को पुलिस ने गुड़गांव के किडनी रैकेट मामले में गिरफ्तार किया था। वर्ष १९९४ से २००४ तक उसने १२५ से अधिक अवैध किडनी प्रत्यारोपण करने का दावा किया, जिसके लिए उसे प्रति केस ५ लाख से ७ लाख रुपये मिलते थे। वर्ष २००१ में उसने एक बार फिर अमरोहा में एक नकली गैस एजेंसी शुरू की, लेकिन फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। इस फर्जी गैस एजेंसी के बंद होने के बाद वह जयपुर गया और वर्ष २००३ तक वहां एक क्लिनिक चलाता रहा। इस कालावधि में वह अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अलीगढ़ के लिए टैक्सी चालकों को एकांत स्थान पर ले जाता था और वहां उनको मारकर लाश को कासगंज स्थित मगरमच्छों वाली हजारा नहर में फेंक देता था। टैक्सी चालकों की हत्या के बाद वह उनकी टैक्सी कासगंज में बेच देता था। इससे उसे बीस से २५ हजार रुपए मिल जाते थे। उसके गुर्गों ने एक ट्रक ड्राइवर की हत्या करके एलपीजी सिलिंडर ले जा रहा ट्रक भी लूटा था। उसने अपनी नकली गैस एजेंसी में लूटे गए ट्रकों से सिलिंडर को उतारा था और फिर ट्रक को मेरठ में छोड़ दिया। पुलिस को उसने ये भी बताया है कि उसने १०० हत्याओं के बाद गिनती नहीं की और हत्याओं की सही संख्या याद रखना उसके लिए मुश्किल हो गया। उसकी आपराधिक गतिविधियों के बारे में पता चलने के बाद पत्नी और बच्चों ने २००४ में उसे छोड़ दिया था। सीरीयल किलर डॉ. देवेंद्र शर्मा की सच्चाई जब बापरोला में उसके पड़ोसियों की पता चली तो वे सकते में आ गए।