डॉ. प्रियंका का शाप… इंसानों के अंदर का जानवर!

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में ऐसी क्रूर घटना हुई है कि हिंदुस्थान की जनता की गर्दन शर्म से झुक जाए। डॉ. प्रियंका रेड्डी नामक युवती से चार दरिंदों ने बलात्कार किया और अपनी राक्षसी कुकर्म का सबूत नष्ट करने के लिए पेट्रोल डालकर उसे जला डाला। डॉ. प्रियंका जलकर खाक हो गई। सौ प्रतिशत जल जाने के कारण उसका शरीर कोयला हो गया। मानवता पर कालिख पोतनेवाली इस घटना को एक सप्ताह बीत गया है और अब तक देशभर में इस नृशंस घटना पर तीव्र आक्रोश नहीं पनपा है, इसे डॉ. प्रियंका का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। डॉ. प्रियंका जानवरों की डॉक्टर थी। जानवरों का उपचार करनेवाली डॉ. प्रियंका जिस क्लिनिक में काम करती थी, वहां आनेवाले सभी प्राणियों के बीच वह स्वच्छंद घूमती थी। प्रति दिन जानवरों के साथ रहकर भी प्रियंका को जानवरों की हिंसात्मक प्रवृत्ति का अनुभव नहीं हुआ लेकिन इंसानों में का ‘जानवर’ बाहर आते ही वह टूट गई, उद्ध्वस्त होकर समाप्त हो गई। २७ नवंबर की रात डॉ. प्रियंका के सुंदर सपनों का भविष्य चकनाचूर हो गया। सुबह के समय रोज की तरह डॉ. प्रियंका अपनी स्कूटी से हैदराबाद से ३० किमी दूर शमशाद बाग स्थित अपनी क्लिनिक जाने के लिए निकली। रोज की तरह आधी दूरी पार करने के बाद आनेवाले टोल प्लाजा पर अपनी स्कूटी खड़ी करके वैâब से वह क्लिनिक पहुंची। ड्यूटी के बाद अपने इलाज के लिए एक डॉक्टर से मुलाकात के पश्चात उसके टोल प्लाजा पहुंचने तक रात हो गई। सुबह से ही घात लगाकर बैठे गुनहगारों ने उसकी स्कूटी को पंक्चर करके रख दिया था। इससे घबरायी प्रियंका ने अपनी बहन को फोन किया और सारी हकीकत बताई। उसकी बहन ने स्कूटी को वहीं छोड़कर सीधे वैâब से घर आने की सलाह दी। लेकिन आगे क्या होना था, यह प्रियंका को क्या पता था? कल क्लिनिक जाने के लिए फिर गाड़ी की आवश्यकता होगी इसलिए उसने पंक्चर की दुकान की खोजबीन शुरू की। गाड़ी पंक्चर करनेवाले गिरोह के लोग उसकी सहायता का बहाना कर रहे थे। प्रियंका ने अपनी बहन को फिर से फोन किया और कहा कि उसे बहुत डर लग रहा है। अब मैं वैâब से आ रही हूं। तभी उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। उसी समय प्रियंका के साथ विश्वासघात गया। प्रियंका का शिकार करने के लिए सुबह से ही घात लगाए बैठे नराधम उसे टोल प्लाजा से कुछ दूर ले गए और वहां ख़ड़े दो ट्रकों की आड़ में उससे दुराचार किया। प्रियंका ने मदद के लिए बहुत गुहार लगाई लेकिन उस सुनसान अंधेरे में उसकी आवाज दब गई। अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए चारों कुकर्मियों ने बलात्कार के बाद सबूत नष्ट करने के लिए डॉ. प्रियंका को जलाकर भस्म कर दिया। राक्षस, नराधम और पशु जैसे शब्द भी इनके लिए कम पड़ेंगे, ऐसा भयंकर कुकर्म डॉ. प्रियंका ने सहा। टोल प्लाजा के पासवाले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने उन चारों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। चारों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस भयानक घटना के पश्चात तेलंगाना में हर तरफ संताप की लहर देखने को मिली। चारों कुकर्मियों की माताओं ने कहा है कि प्रियंका को जलानेवाले हमारे बेटों को भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए। इंसानियत पर कालिख पोतनेवाली भयानक घटना पर तेलंगाना के बाहर उतना आक्रोश देखने को नहीं मिला। २०१२ में देश की राजधानी में निर्भया के साथ जो क्रूरता हुई और उसके पश्चात पूरे देश में जो संताप की लहर उठी, वैसी लहर डॉ. प्रियंका के लिए क्यों न उठे? दिल्ली की निर्भया को मौत के बाद न्याय मिला। वही न्याय हैदराबाद की प्रियंका को मिलेगा क्या? प्राणियों की डॉक्टर प्रियंका से इंसानों के बीच के जानवरों ने बलात्कार किया। सामूहिक बलात्कार के पश्चात उसे जला डाला। प्रियंका ही नहीं, उसके साथ इंसानियत भी जलकर राख हो गई। नियम-कानून तो हैं ही। प्रियंका के गुनहगारों को भविष्य में संभवत: फांसी की सजा होगी ही लेकिन इतना ही काफी नहीं है। बलात्कार की भयानक विकृति को रोकने के लिए समाज को आगे आना होगा। नहीं तो पूरी मानव जाति को प्रियंका का शाप लगे बिना नहीं रहेगा!