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ड्रैगन का डबल गेम!

-अमेरिका को दिया झटका
-ताइवान नहीं बन सका who का सदस्य
-वायरस जांच की बात मान ली

चालें चलने और पैंतरे बदलने में ड्रैगन चीन का जवाब नहीं। इस कला में वह बहुत ही माहिर है। अब डब्ल्यूएचओ की मीटिंग में उसने डबल चाल चली। दूसरे शब्दों में कहें तो ड्रैगन ने डबल गेम खेला। एक तो अपने दुश्मन सरीखे हो गए अमेरिका को झटका दिया और ताईवान को डब्ल्यूएचओ का सदस्य बनने नहीं दिया। दूसरी तरफ विश्व बिरादरी को भी उसने खुश कर दिया और वायरस आउटब्रेक के 120 देशों की मांग भी स्वीकार कर ली। इसके साथ ही जिनेवा में हुए डब्ल्यूएचओ की मीटिंग के पहले दिन चीन ने वायरस से हुए नुकसान के लिए दुनिया के कमजोर और विकासशील देशों के लिए 2 बिलियन डॉलर के पैकेज का भी ऐलान कर दिया।
कोरोना वायरस के आउटब्रेक पर चीन और अमेरिका के बीच इस समय सीधे तौर पर ठनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रोज चीन और डब्ल्यूएचओ को धमका रहे हैं। लेकिन लगता है चीन पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है। अमेरिका ने चीन को टशन देने के लिए ताइवान को डब्ल्यूएचओ की सदस्यता दिलाने की मुहिम छेड़ी थी। इसके लिए सीनेट ने कानून भी पास किया था और अमेरिका ने विश्व बिरादरी में लॉबी भी की थी, मगर अमेरिका को इस बार इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ। किसी भी देश ने खुलकर ताइवान का साथ नहीं दिया। ऐसा लगता है जैसे इस मामले में चीन का प्रभाव ज्यादा रहा। नतीजतन डब्ल्यूएचओ की जिनेवा बैठक के लिए ताइवान को निमंत्रण ही नहीं मिला। यह एक तरह से चीन की ‘वन चाइना पॉलिसी’ की जीत मानी जाएगी। इसके बाद जब डब्ल्यूएचओ की बैठक शुरू हुई तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसे संबोधित किया। उसमें तमाम बातों के साथ ही जिनपिंग ने कमजोर देशों के लिए 2 बिलियन डॉलर की राशि एलॉट करके, उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश की। छोटे देश कहीं ना कहीं चीन के पक्ष में होते दिखे। इसके पहले पिछले 3 सप्ताह से ऑस्ट्रेलिया मांग कर रहा था कि वुहान में यह वायरस कैसे आउटब्रेक हुआ, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस निष्पक्ष जांच की मांग वह चीन से कर रहा था। चीन ऑस्ट्रेलिया की इस मांग पर काफी नाराज था लेकिन इधर धीरे-धीरे ऑस्ट्रेलिया को विश्व बिरादरी का समर्थन मिलता गया। यूरोपियन यूनियन के 27 देश उसके समर्थन में आ गए। रूस, भारत, ब्राजील आदि उसका समर्थन कर रहे थे। अफ्रीका के 54 देशों के ग्रुप का भी ऑस्ट्रेलिया को समर्थन मिल गया। इससे चीन समझ गया कि वह अकेला पूरी दुनिया से नहीं लड़ सकता। इसलिए डब्ल्यूएचओ की बैठक में चीन ने इस जांच की मांग को स्वीकार कर लिया। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चीन ने इतने दिनों में सारे सबूत मिटा दिए हैं। इसलिए वह जांच को राजी हो गया।

चीन ने नष्ट किए सारे वायरस

बुहान के पी4 लैब में कोरोना वायरस का आउटब्रेक कैसे हुआ? इसको लेकर पूरी दुनिया में तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। चीन के प्रति दुनिया के देशों में नाराजगी भी है। अमेरिका शुरू से ही कह रहा है कि हमारे वैज्ञानिकों और जांच टीम को चीन वुहान के लैब में जाने दे ताकि वह जांच कर सकें कि किस तरह से यह वायरस बाहर आया। लेकिन चीन ने इसे मना कर दिया। इस बारे में एक मीडिया रिपोर्ट पर ध्यान देना आवश्यक है। पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि चीन ने अपने वुहान पी4 लैब के सारे वायरस नष्ट कर दिए हैं। चीन के इस लैब में 1500 वायरस का जखीरा था। इसी में कोरोना वायरस भी था। चीन की बैट वूमन के नाम से मशहूर शी झेंगली ने कोरोना के 9 टाइप के वायरस वहां रखे हुए थे। जब दुनिया चीन के खिलाफ हुई तो चीन ने धीरे से लैब में रखे सारे वायरस नष्ट कर दिए। ऐसे में अब यही लग रहा है कि अगर दुनिया की जांच टीम उस लैब में जाती है तो उसे वहां कुछ नहीं मिलेगा और उसे वहां से खाली हाथ वापस आना पड़ेगा।