ढह गया अहंकार का गढ़

नागपुर जिला परिषद चुनाव परिणाम ने विदर्भ में भाजपा के दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री और विदर्भ से भाजपा के कद्दावर नेता नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को जिला परिषद चुनाव में बड़ा झटका लगा है। इस चुनाव में कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा की दुर्दशा समझने के लिए इतना ही काफी है कि नितिन गडकरी के गांव धापेवाड़ा से कांग्रेस के महेंद्र डोंगरे और बावनकुले के कोराडी जिला परिषद सर्कल में कांग्रेस के नाना कंभाले ने जीत दर्ज की। नाना कंभाले को ८,२२३ वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी संजय मैंद को ६,९२३ वोट मिले। गडकरी द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए गांव पंचगांव और फडणवीस के दत्तक गांव फेतरी में भी भाजपा उम्मीदवार हार गए।

कांग्रेस ने अपने पहले की १९ में ११ सीटों का इजाफा कर ५८ सदस्यीय सदन में ३० सीटें हासिल की। राकांपा को १० सीटें मिली। भाजपा १५, शिवसेना एक और अन्य २ सीटों पर सफल रहे। विदर्भ के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राकांपा के अनिल देशमुख और कांग्रेस के सुनील केदार की कड़ी मेहनत के कारण कांग्रेस नागपुर जिला परिषद को भाजपा से गिराने में सफल रही। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष राजेंद्र मुलक और उमरेड के विधायक राजू पारवे ने भी कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत में योगदान दिया। जब केदार और देशमुख अपने विमुद्रीकृत श्रमिकों का कायाकल्प करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे, केंद्रीय मंत्री गडकरी और फडणवीस अपने पीए और नेताओं पर पूरी तरह से निर्भर थे, जैसे राजीव पोद्दार, जिनका जिले में कोई आधार नहीं है।

२०१४ में भाजपा ने नागपुर ग्रामीण की कुल छह सीटों में से पांच पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी- सौनेर से सुनील केदार। लेकिन २०१९ में तस्वीर बदल गई। कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं- सोनेर से सुनील केदार और उमरेड से राजू पारवे। राकांपा ने काटोल सीट पर कब्जा कर लिया, जिसमें वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख विजयी हुए। बेशक, विधानसभा चुनावों के परिणामों ने मूड का संकेत दिया। देवेंद्र फडणवीस, नितिन गडकरी और चंद्रशेखर बावनकुले जैसे पार्टी नेताओं के प्रयास नाकाफी साबित हुए। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील की कुर्सी भी खतरे में नजर आ रही है।

शिवसेना की ताकत बढ़ी
महाराष्ट्र की छह जिला परिषदों के चुनाव में शिवसेना की ताकत बढ़ी है। पालघर, धुले, नंदूरबार, अकोला, वाशिम व नागपुर जिला परिषदों के चुनाव परिणाम का विश्लेषण करने पर जिला परिषद सीटों में अपने प्रदर्शन को सुधारते हुए पहले की तुलना में १३ सीटें जीतकर कुल ४९ सीटें जीती हैं जबकि पंचायत चुनाव में पिछले चुनाव से २४ अधिक सीटें जीतकर ११७ सीटों पर अपना दबदबा बनाया है। परिषद चुनाव में शिवसेना की ताकत धुले में २ से बढ़कर ४, नंदूरबार में शून्य से ७, अकोला में दो से १३, पालघर में १५ से १८ हो गई है। जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस १०० से घटकर ७३, राकांपा ५३ से ४६ जबकि अन्य पंजीकृत दल ३२ से ४२ सीटें पाने में सफल रहे। निर्दलीय १८ से १४ पर खिसक गए। पंचायत चुनावों में कांग्रेस को २५, राकांपा को ४२ सीटों का घाटा हुआ है जबकि अन्य पंजीकृत दलों को ९ सीटों का फायदा हुआ है।