तलाक बिल का विरोध करनेवालों हमारा दर्द समझो! पीड़ितों की भावनात्मक अपील

 

तीन तलाक को कानूनी जामा पहनाने को लेकर कल केंद्र सरकार ने संसद में बिल पेश किया था। इस बिल के विरोध में विपक्ष ख़ड़ा हुआ है। इस बिल का विरोध न हो, इसको लेकर तीन तलाक पीड़ितों के लिए लड़नेवाली संस्था भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने विपक्ष को खुला पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से तीन तलाक की शिकार हुई पीड़िताओं ने विपक्ष से भावनात्मक अपील की है। अपनी अपील में उन्होंने विपक्ष से कहा है कि वे उनका दर्द समझें और इस बिल का विरोध करने की बजाय इसका समर्थन करें ताकि कानून बनने से इस कुप्रथा पर आसानी से नकेल कसा जा सके और मुस्लिम खातूनों की जिंदगी बरबाद होने से बच सके।

बता दें कि कल लोकसभा में तीन तलाक बिल को लेकर चर्चा होने के बाद यह बिल पास हो गया। लोकसभा में चर्चा के दौरान इस बिल का एक बार फिर विपक्षी दल विरोध करते नजर आए। संसद में बिल का विरोध न हो, इसको लेकर अपनी आवाज सांसदों तक पहुंचाने के लिए गत बुधवार को आजाद मैदान पर ‘भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन’ नामक संगठन के बैनर तले तलाक पीड़ित महिलाओं ने धरना-प्रदर्शन किया। तीन तलाक कुप्रथा के खिलाफ कड़ा कानून बने, अपनी इस मांग को खातूनों ने फिर से दोहराया। संगठन की अध्यक्ष नूरजहां सफिया नियाज ने बताया कि तीन तलाक कुप्रथा के चंगुल में आज भी महिलाएं फंसी हुई हैं। विधेयक आने के बाद भी तीन तलाक देने की कई घटनाएं घट चुकी हैं। नूरजहां का कहना है कि सरकार के साथ-साथ विपक्ष भी तीन तलाक कानून पर एकजुट हो। उन्होंने बताया कि इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित सभी विपक्षी दलों के नेताओं को खुला पत्र भेजा गया है। इस पत्र में ३ तलाक कानून बिल पर विपक्ष का सहयोग मांगा गया है। इस पत्र के माध्यम से तलाक पीड़ित खातूनों ने अपना दर्द भी साझा किया है। अपने दर्द का हवाला देते हुए पीड़ितों ने तलाक कानून बनने में सरकार का समर्थन करने की अपील की है।