ताबूत में तैनातगी!, जिहादियों से नहीं टकरा सकते वायुसेना के जर्जर विमान

भारतीय वायुसेना के एक विमान एएन-३२ के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद इसके जर्जर विमानों की पोलपट्टी खुल गई है। वायुसेना के लड़ाकू और परिवहन दोनों ही किस्म के विमान पुराने पड़ चुके हैं और वक्त पर इन्हें अपग्रेड तक नहीं किया गया है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि वायुसेना के ये जर्जर विमान जिहादियों से किस तरह से टकरा पाएंगे? वायुसेना के लिए इस समय पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही प्रâंट अहम हैं पर ऐसे जर्जर विमानों में सैनिकों को मोर्चे पर भेजे जाने से यही कहा जा सकता है कि हमारे सैनिकों की तैनातगी ताबूत में की जा रही है।
हाल ही में असम के जोरहाट से उड़ान भरने के करीब ३३ मिनट बाद एएन-३२ विमान लापता हो गया था। पता चला है कि एएन-३२ में जो एसओएस सिग्नल यूनिट थी, वह १४ साल पुरानी थी। एएन-३२ ने ग्राउंड कंट्रोलर्स के साथ दोपहर १ बजे से कम्यूनिकेट करना बंद कर दिया था। इस विमान में १३ लोग सवार थे। इस विमान में सिंगल इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) था। इसे एसएआरबीई-८ कहते हैं जो ब्रिटिश फर्म सिग्नेचर इंडस्ट्री द्वारा निर्मित किया गया था। इसे एएन-३२ के कार्गो कंपार्टमेंट में लगाया गया था। जिससे यह कठिन परिस्थितियों में सिग्नल भेज सके।
डिस्ट्रेस सिग्नल को एक सैटेलाइट द्वारा पकड़ा जाता था जो इंटरनेशनल सैटेलाइट एडेड सर्च एण्ड रेस्क्यू पैâसिलिटी से संबंधित था। इसके अलावा डिस्ट्रेस सिग्नल की खोज पर गए विमान द्वारा भी सुना गया था जो २४३ एमएचजेड पर ट्यून किया गया था जो कि इंटरनेशनल एयर डिस्ट्रेस प्रâीक्वेंसी है। सिग्नेचर इंडस्ट्रीज के संदर्भ में २००४ की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘एएन-३२ के ६, ७ व ८ मॉडल के ऑर्डर को केवल ५ जनवरी तक ही स्वीकार किया जाएगा। इसकी डिलीवरी २००५ में ही प्लान की गई थी। बैटरी, स्पेयर, सर्विस और सपोर्ट इस तारीख के बाद भी मौजूद रहेंगे।’ भारतीय वायुसेना जो कि एएन-३२ की लॉन्च कस्टमर थी, ने १९८६ में इसकी शुरुआत की थी। वर्तमान में, भारतीय वायुसेना १०५ विमानों को संचालित करती है जो ऊंचे क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों को लैस करने और स्टॉक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें चीनी सीमा भी शामिल है। २००९ में हिंदुस्थान ने ४०० मिलियन का कॉन्ट्रैक्ट यूक्रेन के साथ किया था जिसमें एएन-३२ की ऑपरेशन लाइफ को अपग्रेड और एक्सटेंड करने की बात कही गई थी। अपग्रेड किया गया एएन-३२ आरई एयरक्राफ्ट ४६ में २ कॉन्टेमपररी इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर्स शामिल किए गए हैं लेकिन एएन-३२ को अब तक अपग्रेड नहीं किया गया था।

दुर्घटना का सिलसिला
फरवरी २०१० से लेकर अप्रैल २०१७ के बीच हमारी सेनाओं के २० विमान और हेलिकॉप्टर व्रैâश हुए। हादसे का शिकार होनेवाले विमानों में अमेरिका से खरीदा गया अत्याधुनिक विमान सी-१३० हरक्यूलिस भी शामिल है। ऐसे छह विमान ६,००० करोड़ रुपए में अमेरिकी कंपनी बोइंग से खरीदे गए थे। खरीद के ४ साल बाद ही उनमें से एक विमान व्रैâश हो गया। बिना किसी सैन्य ऑपरेशन के व्रैâश होनेवाले विमानों में रूस से खरीदा गया कार्गो एंतोनोव एएन-३२ और सुखोई ३० जैसा अत्याधुनिक लड़ाकू विमान भी शामिल है। इनके अलावा इस अवधि के दौरान ४ मिग-२१, ४ जगुआर, २ एमआई-१७ हेलिकॉप्टर, २ चीता हेलिकॉप्टर, २ किरण ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट, १ मिराज, १ बीएई सिस्टम हॉक जैसे विमान भी हादसे का शिकार हो चुके हैं।