तारेंगे तारे!

लोकसभा चुनाव संपन्न होने के पश्चात एग्जिट पोल ने एनडीए सरकार बनने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। हालांकि विपक्ष इस एग्जिट पोल को सही नहीं मान रहे और उनका दावा है कि एनडीए को उम्मीद से काफी कम सीटें मिलेंगी। इन संभावनाओं के बीच अगर ग्रह-नक्षत्रों की बात की जाए तो ग्रहों की दशा व गोचर बताते हैं कि केंद्र में ‘फिर एक बार, मोदी सरकार’ बनने जा रही है। एनडीए को ग्रहों का भी पूरा समर्थन प्राप्त है और उसके उम्मीदवारों को ग्रह-तारे भी तारेंगे।
आज मतगणना हो रही है। दोपहर १२ बजे तक उत्तेजना अपने चरम पर होगी व साथ ही केंद्र में नई सरकार के गठन की तस्वीर भी साफ होने लगेगी। हालांकि वीवीपैट की पर्चियों का जो मिलान करना है, उस कारण चुनाव परिणाम में देरी हो सकती है। मगर जहां तक ज्योतिषों का सवाल है तो उन्होंने ग्रह-गोचर के आधार पर पहले ही भविष्यवाणी कर दी है कि मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर केंद्र में एनडीए की सरकार बनने जा रही है और वह भी भारी बहुमत के साथ। इस संबंध में ‘दोपहर का सामना’ ने जब कुछ प्रख्यात ज्योतिषियों के साथ बातचीत की तो उन्होंने एक स्वर में मोदी सरकार के वापस आने की बातें कहीr। ये ज्योतिषी हैं सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद डॉ. बालकृष्ण मिश्र, सुदर्शन चक्र ज्योतिषाचार्य संत बेतरा अशोक, आचार्य पवन त्रिपाठी और टैरो कार्ड रीडर प्रियंका जैन। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि इसमें कोई संशय नहीं और मोदी सरकार एक बार फिर केंद्र में आसीन होने जा रही है।

आज २३ मई को लोकसभा चुनाव के मतों की गिनती शुरू हो चुकी है। सभी के दिलों की धड़कनें तेज हो चुकी हैं। किस-किस के सिर चढ़ेगा विजयी ताज और किसके टूटेंगे सपने? कौन बनाएगा अगली सरकार? दोपहर बाद इन सारे सवालों के जवाब मिलने शुरू हो जाएंगे। मगर ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाताओं ने ग्रह-गोचरों की चाल के आधार पर पहले ही भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि एक बार फिर एनडीए की सरकार।
मां सावित्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद डॉ. बालकृष्ण मिश्र, विद्या वारिधि (पीएचडी-काशी) ने इस बात की पुष्टि की है कि शिवसेना समर्थित एनडीए पुन: सत्ता स्थापना करने जा रही है। डॉ. मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली के आधार पर कुंडली में अनेक प्रकार के प्रभावशाली ग्रहों के कारण मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने से कोई रोक नहीं सकता है। मिश्र का कहना है कि यदि हम प्रश्न कुंडली के आधार पर बात करते हैं कि २३ मई २०१९ को प्रात: लगभग ८ बजे मिथुन लग्न में मतगणना प्रारंभ होगी। लग्न में ही मंगल एवं राहु का योग बना हुआ है। मंगल एवं राहु के एक होने से यह संकेत मिल रहा है कि चुनाव परिणाम अप्रत्याशित एवं चौंकानेवाला होगा। पुरानी सरकार ही वापस आएगी, ऐसे योग बन रहे हैं। प्रधानमंत्री पद पर भी पुन: नरेंद्र मोदी ही विराजमान होंगे क्योंकि इस वर्ष २०१९ का राजा शनि ग्रह है। २३ मई को मिथुन लग्न के आधार पर यदि देखा जाए तो शनि ग्रह अष्टमेश एवं नवमेश होकर सप्तम भाव में केतु एवं चंद्रमा के साथ में बैठा हुआ और केतु ग्रह षड्यंत्र का कारक ग्रह माना जाता है। पुरानी सत्ता को न बैठने के लिए विपक्षियों के एकजुट होने के संकेत हैं लेकिन तमाम अवरोधों को समाप्त करके पुरानी सरकार ही दोबारा सत्तासीन होगी क्योंकि १२ वें स्थान पर बैठे सूर्य एवं बुध के द्वारा ही बुधादित्य योग द्वारा पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। शनि ग्रह सप्तम स्थान पर बैठकर भाग्य भाव को स्वगृही दृष्टि से एवं लग्न तथा सुख भाव पर पूर्ण मित्र की दृष्टि से दृष्टिपात कर रहा है। शनि ग्रह लोकतंत्र का कारक ग्रह है एवं न्यायाधीश भी कहा जाता है। यही ग्रह विकास का भी कारक माना जाता है। यदि हम २३ मई के लग्न के आधार पर मंगल और राहु की स्थिति से मिलान करते हैं तो नरेंद्र मोदी की कुंडली में मंगल ग्रह के द्वारा ही शत्रुहंता योग भी बना रहा है। इन्हीं योगों के कारण २०१४ में भी तमाम अवरोधों को समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए थे। २३ मई को ही मिथुन लग्न के आधार पर १२वें स्थान पर सूर्य और बुध के एकीकरण से बुधादित्य योग भी बन रहा है जो तमाम अवरोधों को समाप्त करते हुए पुरानी सत्ता को ही पुन: आसीन करने में पूर्ण सहयोग करेगा।

मोदी का पावरचार्ट
यदि नरेंद्र मोदी के दैनिक पावरचार्ट को देखा जाए तो २३ मई को ३१ अंक प्राप्त हो रहे हैं, जिस कारण नरेंद्र मोदी के ग्रह-गोचर की व्यवस्था बहुत ही अच्छे परिणाम देकर पुन: सत्तासीन करवाएगी।

अविवाहितों को नहीं पीएम बनने का योग!
यदि प्रश्न किया जाए कि राहुल गांधी, मायावती एवं ममता बनर्जी की कुंडली के अनुसार क्या ये लोग प्रधानमंत्री बन सकते हैं? तो जवाब है कि इनकी कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर है। इसी कारण से ये अभी तक अविवाहित भी हैं। शुक्र ग्रह कमजोर होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है तो प्रधानमंत्री जैसा पद तो मील का पत्थर साबित होगा। ज्योतिषीय गणना के आधार पर २०१९ में अविवाहितों के हाथ में प्रधानमंत्री बनने का योग नहीं है।

टैरो भी तारेंगे!
मशहूर टैरो कार्ड रीडर प्रियंका जैन का कहना है कि नरेंद्र मोदी को लोगों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा। कंप्रोमाइज का कार्ड बता रहा है कि सहयोगी दलों, यहां तक कि विरोधियों के साथ भी उन्हें कंप्रोमाइज यानी समझौता करना पड़ सकता है लेकिन सत्ता पर मोदी ही काबिज होंगे। अवेयरनेस यानी जागरूकता का कार्ड बता रहा है कि वे बड़ी सावधानी से जागरूकतापूर्वक देशहित में कई निर्णय लेंगे। इंटीग्रेशन (एकीकरण) का कार्ड बता रहा है कि मोदी के कई विरोधी भी इनके साथ आ जाएंगे और इनके कामों की तारीफ करेंगे।
– टैरो कार्ड रीडर प्रियंका जैन

उच्च का राहु दिलाएगा बड़ी सफलता
आज देश के आम चुनाव का परिणाम आएगा! देशवासियों की निगाहें सत्ता में कौन विराजमान होगा, इस पर हैं? सभी के भाग्य जनता ने तय करके ईवीएम में बंद कर दिए हैं! एग्जिट पोल से लेकर सट्टा बाजार तक सभी के अपने-अपने दावे हैं! ज्योतिष के अनुसार नरेंद्र मोदी की कुंडली चंद्र महादशा में केतु की अंतर्दशा फरवरी २०१९ से प्रारंभ हो गयी है! लाभ स्थान के केतु राजयोग कारक होते हैं, २०१४ के चुनाव में भी मोदी को राहु के कारण ही सत्ता मिली थी! अत: नरेंद्र मोदी पुन: १ बार प्रधानमंत्री बनते दिख रहे हैं! गोचर के अनुसार बृहस्पति मोदी की चंद्र राशि वृश्चिक में ही गोचर कर रहे हैं, जो सफलता दिलाते प्रतीत हो रहे हैं! राहुल गांधी की कुंडली में राहु महादशा प्रारंभ हो गई है! राहुल की कुंडली में राहु अशुभ कारक हैं, जो अशुभ परिणाम देंगे! राहु के कारण कांग्रेस पार्टी के सीटों की संख्या तो बढ़ेगी परंतु सत्ता नहीं मिल पाएगी! परिणाम के दिन २३ मई २०१९ के गोचर अनुसार भाजपा के लग्न में उच्च का राहु है, जो बड़ी सफलता दिला रहा है!
-आचार्य पवन त्रिपाठी

चमकेंगे वृश्चिक नेता!
मैंने तो २ साल पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि २०१९ में भी आएंगे तो मोदी ही! मैंने यह भी कहा था कि २०१९ के चुनाव में विकास नहीं बल्कि राष्ट्रवाद का मुद्दा हावी रहेगा। पुलवामा हमले के बाद ऐसा ही हुआ। बहरहाल, आज २३ मई का दिन काफी महत्वपूर्ण है। देश को नई सरकार के गठन की दिशा मिलेगी। मतगणना तो सुबह शुरू होगी पर ११.४५ बजे का वक्त सबसे खास होगा क्योंकि इस वक्त तक रुझान स्पष्ट हो जाएंगे और १२.१५ बजे तक तस्वीर साफ होने लगेगी। इसलिए उस समय ग्रह-गोचर की स्थिति जानना आवश्यक है। आज ११.४५ बजे सिंह लग्न होगा जो स्थिर लग्न है। वृहस्पति चौथे घर में वृश्चिक राशि में होगा और उस पर बुधादित्य योग की सीधे सप्तम भाव में दृष्टि होगी। पंचम भाव में शनि, केतु और एकादश भाव में मंगल और राहु का योग होगा। इन सब का प्रभाव पड़ेगा। नरेंद्र मोदी की राशि वृश्चिक है और बुधादित्य योग है वृष राशि में। वृष का स्वामी और राहुल गांधी का स्वामी शुक्र है। शुक्र उस समय भाग्य भाव में होगा। वृष राशि का बुधादित्य योग की सीधी दृष्टि वृश्चिक राशि पर होने के कारण वृश्चिक राशि के जो भी नेता होंगे, उनकी चमक एक अलग तरीके से ही निखरकर सामने आएगी। मैंने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि एनडीए की सीटें ३५० से भी ज्यादा होंगी और यह ४०० का आंकड़ा भी छू सकता है। कांग्रेस संघर्ष करती नजर आएगी और उसके लिए २०१४ का प्रदर्शन दोहरा पाना आसान नहीं होगा, जबकि अन्य १२५ के आसपास रहेंगे।
-सुदर्शन चक्र ज्योतिषाचार्य संत बेतरा अशोक

अनुमान धरे रह जाएंगे!
आज २३ मई गुरुवार को मतगणना हो रही है। आज उत्तराषाढ़ा नक्ष और बुधादित्य योग का प्रभाव पूरे दिन रहेगा। सूर्य, चंद्रमा और केतु, धनु राशि में तो गुरु बृहस्पति पीएम नरेंद्र मोदी की वृश्चिक राशि में होंगे। इस बीच दिन के समय चंद्रमा के धनु से मकर राशि में स्थान परिवर्तन से ठीक उसी तरह चुनाव परिणाम पर असर पड़ेगा जैसे विभिन्न राशियों के लोगों के जीवन पर प्रभाव पड़ेगा जैसे विभिन्न राशियों के लोगों के जीवन पर प्रभाव पड़ता है। ग्रहों के चलते सारे अनुमान धरे रह जाएंगे। परिणाम अस्थिर सरकार का संकेत देंगे, लेकिन जोड़-तोड़ से बनने वाली सरकार कार्यकाल पूरा करेगी। जिसने भी एकाधिकार की उम्मीद लगाई होगी, उसे मायूसी हाथ लगेगी।
– ज्योतिषी विमल जैन

हार नहीं मानूंगा…!
– नरेंद्र मोदी
पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की ‘कविता हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा…’ को आत्मसात करते हुए मोदी जी हिम्मत के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनकी कुंडली भी कह रही है कि एग्जिट पोल सच साबित होगा और वे मुख्य सहयोगी दल शिवसेना के साथ मिलकर राजग सरकार बनाएंगे। कुंडली के अनुसार मोदी का जन्म १७ सितंबर १९५० वड़नगर-गुजरात में हुआ। फिलहाल अभी मोदी की कुंडली में चंद्र की महादशा में मंगल की अंतर्दशा चल रही है। मिथुन राशि में गोचर कर रहा राहु उनकी कुंडली के भाग्य स्थान से गोचर कर रहा है। गोचर शनि और केतु तीसरे स्थान से गुजर रहे हैं। चुनाव के दौरान कुंडली में जन्म के मंगल और चंद्रमा के ऊपर से बृहस्पति का गोचर रहा। उनकी कुंडली में गोचर और जन्म के सभी ग्रह उनका पूरा समर्थन कर रहे हैं। मतदान के दिन चंद्रमा की स्थिति भी उनके पक्ष में थी जो उनकी बड़ी जीत का इशारा है। उनकी भाषणकला से लोग मोहित होते हैं। जनता से जुड़ों मुद्दों को उठाने या जनता की भावना को पकड़ने में मोदी माहिर हैं। इन्हीं गुणों को उनके ग्रह और समर्थन करते हैं। इससे इस लोकसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहेगा।

शांत समंदर! 
– नवीन पटनायक
कुछ लोग शांत समंदर की तरह होते हैं, जो बहुत गहरे होते हैं लेकिन जब उनमें उफान आता है तो बड़ी से बड़ी कश्ती को भी यह उलट देता है। नवीन पटनायक की कुंडली कुछ ऐसी ही है। इनके बिना राष्ट्रीय राजनीति अधूरी लगती है। समय-समय पर बड़े राजनीतिक दल इनका साथ पाने को आतुर रहते हैं। इस बार भी लोकसभा चुनाव में ओडिशा में इनका दल मजबूती से अपना परचम लहराता दिख सकता है। कुंडली भी इनके पक्ष में ही दिख रही है। नवीन पटनायक की जन्म तिथि १६ अक्टूबर १९४६ है। जन्म समय शाम ५.३० बजे, स्थान कटक का है। कुंडली के अनुसार नवीन पटनायक अपने कर्तव्यों को गंभीरतापूर्वक लेते हैं। परिणामस्वरूप वे महत्वाकांक्षी हैं। पटनायक ज्यादा कार्य करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, न ही वे अत्यधिक उत्तरदायित्व वहन कर सकते हैं। हालांकि नवीन पटनायक को काम करने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन उसमें अत्यधिक उत्तरदायित्व नहीं होना चाहिए। वे किसी भी तरह के कार्य को अपने हाथ में लेने के लिए सदैव तैयार रहते हैं पर उनका स्वच्छ व व्यवस्थित कार्यों की तरफ विशेष रुझान है। साथ ही, नवीन पटनायक ने यह ध्यान दिया होगा कि ऐसा कोई भी कार्य जिसके द्वारा वे प्रकाश में आते हैं, वह अपेक्षाकृत उनको ज्यादा आकर्षित करता है, बजाय कि ऐसा कोई कार्य जो शांति में अकेले किया जाए। निश्चित तौर पर नवीन पटनायक का स्वभाव शांत है। प्रतिकूल वातावरण में वे असहज हो जाते हैं। वे सदैव प्रकाशमान एवं प्रसन्नचित्त वातावरण पसंद करते हैं। हालिया लोकसभा चुनाव में पटनायक अपने विरोधियों को काफी हद तक पटखनी देंगे, उनकी कुंडली में ऐसी तस्वीर दिख रही है।

हाथ तो आया मुंह न लगा!
– राहुल गांधी
कई बार ऐसे मौके आते हैं कि हाथ आई मलाई मुंह तक नहीं पहुंचती। कुछ ऐसा ही हाल कांग्रेस का हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पकड़ न यूपीए पर है और न ही वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में उनका उल्लेखनीय योगदान है। कुंडली भी कह रही है कि अभी उनको बहुत पापड़ बेलने हैं। राहुल का जन्म १९ जून १९७० को दोपहर ०५ बजकर ५० मिनट पर दिल्ली में हुआ। उनकी कुंडली मिथुन लग्न की है। वर्तमान में चंद्रमा इनकी राशि से दूसरे भाव की धनु राशि पर गोचर कर उनकी ‘साढ़े साती’ को प्रभावी कर रहा है। शनि की ‘साढ़े साती’ का यह समय नई जिम्मेदारियों के साथ कुछ मानसिक कष्ट भी दिखा रहा है। अपनी माता सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर अगले दो वर्षों तक उनको विशेष चिंता रहेगी। साथ ही जन्म नक्षत्र पर गोचर कर रहे शनि तथा मंगल में शुक्र की विंशोत्तरी दशा में उनको अपनी पार्टी के भीतर कुछ पुराने नेताओं के विरोध का सामना करना होगा। राहुल गांधी द्वारा अपनी पार्टी में युवा और नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से वरिष्ठ नेता नाराज हैं और वे कुछ असहज स्थितियां पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही साढ़े साती के प्रभाव और उनके लग्न भाव पर बन रहे पापकर्तरी योग संघर्ष और तनाव की स्थिति बनाए रखेंगे। नीचस्थ चंद्र छठे भाव में अदालती मामलों के कारण इनकी परेशानियां बढ़ा सकता है। जमीन जायदाद के क्रय-विक्रय से जुड़े मामलों को लेकर राहुल गांधी और उनकी माता सोनिया गांधी दोनों को वर्ष २०१९ में कुछ असहज हालातों का सामना करना पड़ सकता है। उनकी कुंडली में मंगल और सूर्य नवम भाव में अच्छे योग में स्थित होकर एक संतुलित राजनीतिक सफलता दिलाने का योग बना रहे हैं। वर्तमान में इनकी मंगल महादशा में गुरु की अंतर्दशा प्रभावी है। कर्मेश का पंचम भाव में स्थित होना, करियर में स्थिरता की कमी और बाधाओं की स्थिति देती है। पिछले दिनों मंगल की महादशा और राहु की अंतर्दशा में ही वह कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं। यही वजह है कि उनको भविष्य में इससे ऊंचा पद प्राप्त नहीं हो पाएगा, इसके साथ ही आनेवाले समय में इनके कार्यों और वक्तव्यों की आलोचना भी होगी। फिर भी मंगल की अंतर्दशा या शनि की अंतर्दशा आने पर राहुल गांधी के लिए सत्ता सुख भोगने के मार्ग अवश्य खुल सकते हैं। उसके लिए उन्हें फिलहाल प्रतीक्षा करनी होगी।

शनि का साथ!
– के चंद्रशेखर राव
दक्षिण से सूरज उदय नहीं होता लेकिन दक्षिण से एक ऐसे नेता का उदय जरूर हुआ है, जिसने अपनी मेहनत और रणनीति के तहत अपने आपको देश की राजनीति में स्थापित किया है। दक्षिण के ये सूर्य हैं के चंद्रशेखर राव। राव का जन्म १७ फरवरी १९५४ को सुबह १०.३० बजे हुआ है। वे सिद्दीपाट-आंध्र प्रदेश में जन्मे हैं। उनकी कुंडली में शनि ने उनका हमेशा साथ दिया है। शक्तिशाली शनि किसी भी राजनेता के लिए एक वरदान है। अपने चार्ट में, शनि ७ वें घर में एक शक्तिशाली राजयोग बना रहा है। इसलिए, वे राज्य के सबसे प्रसिद्ध और वर्तमान में सबसे शक्तिशाली राजनीतिक नेताओं में से एक हैं। ११ वें घर में सूर्य-शुक्र की युति उन्हें मतदाताओं से जुड़ने की उत्कृष्ट क्षमता प्रदान करती है। इसके साथ ही गुरु और मंगल का पारस्परिक पहलू उन्हें एक कुशल और चतुर राजनीतिज्ञ बनाता है। इसके साथ ही शुक्र-शनि का विनिमय उनके चार्ट को काफी शक्तिशाली बनाता है। ज्योतिषीय विश्लेषण से पता चलता है कि वे राहु-शुक्र की अनुकूल महादशा से भी गुजर रहे हैं। ऐसे में वे समाज के विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन जुटाने में भी सक्षम होंगे। मिथुन राशि में राहु के गोचर से उन्हें अपने प्रतिस्पर्धियों और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद मिलेगी। गोचररत बृहस्पति भी उन्हें इसमें मदद करेगा। धनु राशि में शनि का गोचर भले ही कुछ परेशानियां ला रहा हो, लेकिन वह प्रतिद्वंद्वी दलों पर अपनी बढ़त बनाए रखने में सक्षम होंगे। उनकी कुंडली विश्लेषण से पता चलता है कि इस आम चुनाव में उन्हें सफलता मिलेगी। वर्तमान दशा अवधि से पता चलता है कि केसीआर अभी और आगे बढ़ेंगे, साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्थिति भी मजबूत होगी। विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि चुनाव परिणाम के बाद राजनीति में उनकी एक महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

हिंसात्मक छवि घातक!
– ममता बनर्जी
ममता की जन्म कुंडली में भाग्य स्थान का शनि बहुत ही प्रबल है, जो किसी भी जातक को भाग्यशाली बनाए रखता है। इस कारण ऐसे लोगों का समय कितना भी खराब क्यों न आ जाए, इन लोगों की स्थिति बहुत खराब नहीं होती है। लेकिन इस बार ग्रहों की स्थिति उनके पक्ष में नहीं दिखाई दे रही है। ममता का उनके गढ़ में प्रभाव कम होने के साथ-साथ उनकी छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है। साथ ही राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा अच्छी नहीं मानी गई है, जो जुलाई २०१८ से प्रारंभ हुई है और जुलाई २०१९ तक रहनेवाली है। ममता को इस दौरान कानूनी विवाद और राजनीतिक विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है। भले ही ममता की कुंडली के सितारे लोकसभा चुनाव में उन्हें अच्छा परिणाम नहीं दिलवा रहे हों लेकिन उनकी कुंडली बताती है कि वह काफी मजबूत हैं और भाग्यशाली महिला हैं। इसलिए आनेवाले समय में भले ही उनका प्रभाव पहले की अपेक्षा कमजोर हो जाए लेकिन राजनीति में उनका वर्चस्व कायम रहेगा। ज्योतिषियों का कहना है कि ममता बनर्जी के ग्रहों की दशा के कारण उनके लिए समय काफी मुश्किल भरा चल रहा है। इस समय उन्हें अपने विरोधियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। २०१९ में धनु राशि में केतु का प्रवेश करने से उनकी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। राहु और केतु की चाल ममता बनर्जी के पक्ष में नहीं होने से इनकी छवि और खराब हो सकती है।

असफलता से अवसाद
– चंद्राबाबू नायडू
लोकसभा चुनाव के बाद एक्जिट पोल के दौरान चंद्राबाबू नायडू ने गैर राजग नेताओं से मिलने की मैराथन मुलाकातें कीं। लेकिन इनके प्रयास कितने सफल होंगे? इस सवाल पर उनकी कुंडली प्रकाश डालती है। उनकी कुंडली बताती है कि ये अपने कर्तव्यों को गंभीरतापूर्वक लेते हैं। अपने प्रिय विषय का ये सूक्ष्मता से निरीक्षण करते हैं जो कि विभिन्न कार्यों में उपयोगी साबित होती है। कुंडली के अनुसार इनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही विरोधाभासी होगी। कुंडली कहती है कि पहले तो इनका भाग्य बहुत अच्छा चलेगा लेकिन बाद में उतने ही समय के लिए बिल्कुल विपरीत दिशा में चलेगा और कुछ भी ठीक न होता हुआ प्रतीत होगा। नायडू के धन संबंधी मामलों में फंसने की संभावना है। हालांकि इनके विचार व युक्तियां आगे की पीढ़ी के होते हैं। जून १५, २०१९ तक गुरु भाव संख्या ३ में रहेंगे। किसी बुजुर्ग से नायडू सहारा प्राप्त करेंगे। जून १५, २०१९ से अगस्त १२, २०१९ शनि भाव संख्या ४ में रहेंगे। इस दौरान नायडू पर ऐसी बातों के इल्जाम लगाए जा सकते हैं, जिनमें इनका सहयोग नगण्य रहा हो। प्रयासों में असफलता अवसाद पैदा कर देगी। विरोधी उनकी छवि बिगाड़ने का प्रयास करेंगे। अगस्त १२, २०१९ के बाद उनके लिए स्थितियां लाभप्रद हैं और इनके भागीदार व सहयोगी उन्हें सहयोग देंगे। किसी प्रतिस्पर्धा में भी सफल रहना निश्चित है।

निरंकुश ‘हाथी’!
– मायावती
अवधी में एक कहावत है ‘हाथी घुमय गांव-गांव, जेकर हाथी ओकर नाव!’ यानी हाथी कई गांवों में घूमता है लेकिन नाम उसके मालिक का होता है कि फलां आदमी का हाथी जा रहा है। बसपा अध्यक्ष मायावती का हाथी इस बार साइकिल का साथी बना हुआ है। अब ये आनेवाला समय बताएगा कि ये हाथी निरंकुश होता है या इसका अंकुश किसके हाथ में होगा, कौन इसको नियंत्रित करेगा? भतीजे अखिलेश यादव ने बुआ मायावती को साथ लड़ने के लिए मनवा लिया। उसी कूटनीति के तहत मायावती धुर विरोधी मुलायम सिंह यादव के बगल में मंचासीन हुर्इं। यह सब उनकी कुंडली का प्रताप है। उनकी जन्म कुंडली भी मायावती को थोड़ा राहत दे रही है। मायावती का जन्म १५ जनवरी १९५६ को १९:५० गौतमबुद्ध नगर, नोएडा में हुआ। कुंडली के अनुसार उनकी कर्क लग्न की कुंडली बनती है और मकर राशि है। उन पर बुध की महादशा और शुक्र की अंतर्दशा चल रही है। बुध ७वें घर में, सूर्य और चंद्रमा के साथ बैठा हुआ है और लग्न को देख रहा है। बुध पर शनि की तीसरी दृष्टि पड़ रही है। शुक्र ८वें घर में बैठा हुआ है और उस पर गुरु की दृष्टि पड़ रही है। नवांश कुंडली में बुध अपने ही नवांश में बृहस्पति के साथ बैठा हुआ है। इस समय शनि वृश्चिक राशि में है और गुरु कन्या राशि में है। उनके ग्रहों की स्थिति ये संकेत दे रही है कि उन्हें जल्दबाजी में पैâसले लेने से बचना होगा। हर निर्णय गंभीरता से विचार कर ही करना होगा, पैâसले जितने ज्यादा गंभीर और सधे हुए होंगे, उन्हें उतना ही लाभ होगा। नया फॉर्मूला और नया अंदाज उन्हें नए साल में सफलता दिला सकता है। अब ये सफलता किस रूप में मिलेगी इसके लिए प्रतीक्षा करनी होगी। मायावती का लकी नंबर ६ है। अंक ज्योतिष में ६ नंबर शुक्र का नंबर माना जाता है। ये दौलत और शोहरत दिलाता है और उनका भाग्यांक १ है जो सूर्य का नंबर है। यह सरकार में या समाज में ऊंचा स्थान दिलाता है। सितारे संकेत दे रहे हैं कि चुनावी रणनीति में लापरवाही उनकी मेहनत पर पानी फेर सकती है।

अपेक्षा पूर्ण!
– वसुंधरा राजे
लाख कोशिशों के बावजूद राजस्थान के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे सिंधिया भाजपा को अपेक्षा अनुसार सफलता नहीं दिला पार्इं। हालांकि लोकसभा चुनाव में भाजपा पैâक्टर काम करता दिख रहा है और एग्जिट पोल के अनुसार राजस्थान में भाजपा नेतृत्व ने जो विशेष ध्यान दिया, उसका परिणाम भी सकारात्मक देखने को मिल सकता है। वसुंधरा राजे ने भी इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को जिताने में खूब पसीना बहाया है। उनकी कुंडली में फिलहाल अपेक्षा अनुसार परिणाम नहीं दिख रहे हैं लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो भाजपा वहां पर अपना झंडा बुलंद कर सकती है। अब जानते हैं उनकी कुंडली के सितारे। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जन्म ८ मार्च १९५३ को मुंबई में हुआ था। इनकी कुंडली के प्रथम भाव में वृष लग्न है। वृषभ राशि एक स्थिर राशि है, जिसके कारण इनमें प्रबल शारीरिक व मानसिक सहनशक्ति एवं सहिष्णुता है। राजे स्वभाव से हठी व योजनाओं को पूर्ण करने की योग्यता रखनेवाली हैं। वसुंधरा राजे सिंधिया की कुंडली में इस समय राहु की दशा में राहु का अंतर और गुरु का प्रत्यंतर चल रहा है। राहु भाग्य में बैठकर पंचम दृष्टि से लग्न को देख रहा है। इससे चिंता बढ़ती है। नवम दृष्टि से जनता के संकेतक भाव पंचम को देख रहा है, जिस कारण जनता में लोकप्रियता में कमी आएगी। गुरु अष्टमेश होकर द्वादश भाव में बैठकर अशुभ फल दे सकता है। इन्हीं ग्रह योगों के कारण वसुंधरा राजे राजस्थान की दोबारा मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गई थीं। फिलहाल यहां भाजपा भले ही अपनी सीटें बढ़ा ले लेकिन राजे को अपनी छवि सुधारने और स्थितियों से उबरने में समय लग सकता है।

चतुर चाणक्य!
– अमित शाह
भाजपा के चाणक्य नाम से मशहूर अमित शाह पर नरेंद्र मोदी इतना विश्वास करते हैं कि प्रेस कांप्रâेंस में कह दिया कि अमित जी इतना काम करते हैं कि मेरे लिए कोई काम ही नहीं बाकी बचता। कुंडली के मुताबिक अमित शाह का जन्म २२ अक्टूबर, १९६४ को मुंबई में ५.२५ पर हुआ था जिसके अनुसार इनकी कुंडली कन्या लग्न की बनती है। कुंडली के दूसरे भाव में बुध आदित्य योग बना रहा है तो वहीं सूर्य नीच का है जिसके कारण आज तक इनको कोई बड़ा संवैधानिक पद नहीं मिल पाया। इनकी कुंडली में मौजूद मंगल पराक्रम भाव और आयु का स्वामी है। इसके साथ ही चंद्रमा जो लाभ भाव का स्वामी है वो आयु भाव में है। इस कुंडली की सबसे बड़ी ताकत गुरु का भाग्य भाव में बैठना है। इसका प्रधान ग्रह भाग्येश शुक्र जो कि १२वें भाव में बैठा है। १२वां भाव शुक्र का सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। छठा शनि जो कुंडली के अंदर पंचमेश की दशा में है वो शत्रुओं को पटखनी देने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। कुंडली के अनुसार १७ नबंवर, २००३ से अमित शाह पर राहु की महादशा लगी है। ऐसा कहा जा सकता है कि तब से इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राहु इनकी कुंडली में वर्तमान समय में भी चौथे भाव में गोचर कर रहा है। इसके बाद राहु तीसरे भाव में गोचर करेगा। ये समय इनके लिए बहुत बढ़िया रहेगा। मार्च २०१९ के बाद राहु में चंद्रमा प्रवेश करेगा, जो कुंडली में नीच भंग बनाता है, जिसके चलते इनकी स्थिति बड़ी अच्छी होनेवाली है। राहु के चंद्रमा में ऐसी संभावना बन रही है कि अमित शाह अपनी पार्टी को दोबारा सत्ता में लाएंगे। कुंडली में इनकी राशि मेष है। गोचर इस समय राहु के चौथे भाव में है और केतु दसवें भाव में है। मतदान के समय मंगल १२वें भाव में था। ऐसा कहा जा सकता है कि राहु की महादशा ने अमित शाह को बहुत फायदे दिए हैं और वो स्थान दिया है जो कई लोग नहीं ले पाते। आनेवाला समय इनके लिए बहुत सुलभ रहनेवाला है।

द्वंद्व में नीतीश
– नीतीश कुमार
नीतीश कुमार भले ही नरेंद्र मोदी का साथ देने की सोचें लेकिन उनके साथी ऐसा नहीं चाहेंगे और अगर वे साथ नहीं देंगे तो उनके साथी साथ देने के लिए दबाव बनाएंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुंडली कह रही है कि नीतीश कुमार का मन द्वंद्व में फंसा रहेगा। नीतीश कुमार का जन्म एक मार्च १९५१ को हुआ है। दोपहर एक बजकर २० मिनट पर वे बख्तियारपुर में जन्में हैं। नीतीश कुमार की राशि वृश्चिक और लग्न मिथुन है। कर्म स्थान पर मंगल बैठकर जहां इन्हें कुल दीपक योग से नवाज रहे हैं, वहीं शुक्र की उपस्थिति राजयोग बना रही है। भाग्य स्थान में गुरु की मौजूदगी जहां इन्हें प्रबल भाग्य का स्वामी बना रही है, वहीं सूर्य और बुध की युति बुद्धादित्य नामक राजयोग निर्मित करके इन्हें पद प्रदान कर रही है। नीतीश का विरोधी तो विरोधी, सहयोगी भी विचित्र आचरण करेंगे। उनसे ज्यादा जलवा उनके सहयोगियों का होगा। फिर भी पूरी उम्मीद है कि नीतीश इन विपरीत परिस्थितियों का सामना सहजता से कर लेंगे। नीतीश कुमार की शपथ ग्रहण कुंडली दर्शाती है कि शुक्र दसवें भाव में है। इसके अलावा, गुरु लग्न में विराजमान है। ये दोनों ज्योतिषीय पहलू नीतीश कुमार के कार्यकाल पर अच्छा प्रभाव डालेंगे। ये उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को बढ़ावा देंगे। वे अच्छा प्रशासन और शासन देने का अपना वादा पूरा करेंगे। सुशासन बाबू के रूप में उनकी छवि बरकरार रहेगी और विकसित होगी। उनके शासन के दौरान बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में सुधार दिखने की संभावना है। नीतीश कुमार महिलाओं और गरीब वर्ग के कल्याण के लिए भी काम करेंगे। राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पूछ बढ़ेगी क्योंकि लालू परिवार बिखरा हुआ है। वहीं अच्छे प्रशासन और निर्णयों से नीतीश को लोगों ने पसंद भी किया है।

एक तीर दो निशान!
– अखिलेश यादव
उत्तरप्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव का नाम अब एक अच्छे रणनीतिकार के रूप में जाना जा रहा है। उसी के अंतर्गत मुलायम सिंह यादव की परम विरोधी मायावती से बातचीत करके उनसे गठबंधन तक करनेवाले अखिलेश यादव धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पैठ बनाने लगे हैं। हालांकि फिलहाल उनका असर राज्य की राजनीति में ही दिख रहा है। फिर भी हालिया लोकसभा चुनाव में उनकी मेहनत से आंशिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है। ऐसा उनकी कुंडली निर्देशित कर रही है। अखिलेश यादव की जन्म तिथि एक जुलाई १९७३ है और जन्म समय और जन्मस्थान क्रमश: १२ बजे और सैफई-यूपी है। इनकी राशि मिथुन है और नक्षत्र पुनर्वसु है। अखिलेश यादव बहुआयामी बौद्धिक प्रतिभा के धनी हैं। अखिलेश यादव को एक समय में एकाधिक कार्य करना पसंद है यानी वे मल्टी टास्किंग हैं। कुंडली की ग्रह दशा उन्हें एक अच्छा प्रशासनिक मार्गदर्शक बनाती है। कठिन परिस्थितियों में भी अखिलेश यादव प्रसन्न रहेंगे। हर तरह की परीक्षा में वे उत्तीर्ण होंगे। अखिलेश यादव एक विलक्षण निर्देशक बन सकते हैं। एक तीर से दो निशान साधने में वे माहिर हैं। मायावती को अपने साथ मिलाकर अखिलेश ने जहां विरोधियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं मुलायम-माया के बीच बनी गहरी खाई को भी पाटने का काम किया है। इससे राज्य के समीकरण इस तरह बन रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के अलावा राज्य के चुनाव में भी इसका फायदा सपा-बसपा दोनों को हो सकता है। कुंडली के अनुसार फिलहाल लोकसभा चुनाव में उन्हें आंशिक लाभ मिलता दिख रहा है।

मत चूको चौहान!
– शिवराज सिंह चौहान
विधानसभा चुनाव में हुई गलतियों को सुधारने का मौका शिवराज सिंह चौहान को लोकसभा चुनाव में मिला है। अपने आपको और अपनी पार्टी को पुन: प्रतिस्थापित करने के लिए शिवराज ने संकल्प लेकर काम शुरू किया और उसका नतीजा भी सकारात्मक देखने को मिल सकता है। शिवराज सिंह चौहान की कुंडली बता रही है कि मध्य प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे राजग के पक्ष में हो सकते हैं। शिवराज की जन्म तिथि ५ मार्च १९५९ है और जन्म स्थान बुधनी है। वर्तमान में शिवराज सिंह शनि महादशा और बुध भुक्ति के प्रभाव में है। शनि योगकारक है और ८ वें घर में स्थित है। बुध ऊंचे शुक्र के साथ स्थित है, लेकिन वह केतु से पीड़ित है। शनि शिवराज सिंह चौहान की कुंडली में प्रतिकूल रूप से आगे बढ़ रहा है, साथ ही वह साढ़े साती काल से भी गुजर रहा है। शनि के गोचर का असर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए प्रतिकूल रहा जिसका नतीजा भी निगेटिव दिखा था। हालांकि आगे भी उन्हें अपनी स्थिति सकारात्मक बनाए रखने के लिए कठोर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वे अपने पारंपरिक समर्थन को बनाए रखने के लिए संघर्ष करेंगे, लेकिन वहां भी गिरावट आ सकती है। बृहस्पति दृढ़ता से उनके पक्ष में आगे बढ़ रहा है व शुक्र और बुध पर इसके पहलू उनके लिए फायदेमंद हैं। इससे चुनावों में उनकी पार्टी के लिए सकारात्मक परिणाम की संभावना बढ़ जाएगी। पिछली गलतियों से सीख लेकर इस बार वे ‘मत चूको चौहान’ की भूमिका में रहे। एग्जिट पोल भी यही बता रहा है।

आलू है, लालू गायब!
– लालू प्रसाद यादव
एक समय बिहार में जिसकी तूती बोलती थी, आज उसकी आवाज बंद है। बेटे बिखर गए हैं। बिहार की राजनीति से लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी राजद कोई उल्लेखनीय काम करती भी नहीं दिख रही है। लालू यादव की बीमारी और लालू यादव के कारावास ने उनकी पार्टी की गति को मंद कर दिया है। हालांकि जब भी मौका मिलता है, उनके और उनके परिवार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं जबकि हालात इसके विपरीत है। बिहार में नीतीश कुमार की बढ़त ने लालू को पीछे छोड़ा हुआ है और भाजपा की बढ़त ने लालू को परेशान किया हुआ है। यह परेशानी कुंडली भी दिखा रही है। लालू यादव की कुंडली मेष लग्न की है तथा लग्न में ही राहु स्थित है। द्वितीय भाव में सूर्य, तृतीय भाव में बुध व शुक्र, चतुर्थ भाव में चंद्र व शनि, मंगल पंचम भाव में, केतु सप्तम भाव में और बृहस्पति नवम भाव में स्थित है। इस समय लालू यादव पर चंद्रमा में शुक्र की दशा चल रही है। इस समय उनकी कुंडली के अनुसार चंद्रमा और शुक्र की स्थिति एक-दूसरे से ठीक नहीं है। यह अच्छी दशा नहीं मानी जाती है। बहुत संभव है कि अब लालू प्रसाद यादव का समय चूकने लगा है। कहा जा सकता है कि लालू प्रसाद यादव लोकसभा चुनाव के बाद अब ज्यादा कुछ नहीं कर पाएंगे। कहा जाता था कि जब तक समोसे में आलू रहेगा तब तक बिहार में लालू रहेगा। फिलहाल समोसे में आलू तो देखने को मिल रहा है लेकिन राजनीति की मुख्यधारा से लालू यादव गायब होते जा रहे हैं।

सूझ-बूझ से लाभ
– योगी आदित्यनाथ
एग्जिट पोल में राजग सरकार का राज आता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में महाराज जी यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई जनसभाएं लीं। कुछ रैलियों में रिकॉर्ड भीड़ ने राजग को जीत के प्रति आश्वस्त किया। देखते हैं योगी की जन्म कुंडली और उनके ग्रह नक्षत्र क्या कहते हैं? योगी का जन्म ५ जून १९७२ को उत्तराखंड के गढ़वाल जिला में हुआ था। इनकी जन्मकुंडली सिंह लग्न की है और इनकी राशि कुंभ है। जन्मकुंडली में गुरु बृहस्पति सर्वाधिक बलवान हैं, गुरु बलवान होने पर व्यक्ति समाज में पूजनीय एवं संत होता है। योगी आदित्यनाथ की कुंडली में गुरु के साथ मंगल और शुक्र भी मजबूत स्थिति में हैं। मंगल और शुक्र के लाभ स्थान में होने से व्यक्ति को राजनीति में विशेष सफलता मिलती है। मंगल नवग्रहों का सेनापति होने के कारण जब किसी की कुंडली में लाभ स्थान में बैठता है तो व्यक्ति अपने क्षेत्र में प्रमुख होता है। राजनीति में होने के कारण इसी योग की वजह से योगीr आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं और भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के भी संकेत दिखाई दे रहे हैं। २०१९ जनवरी तक इनकी सूर्य की दशा थी। सूर्य शत्रु राशि में शनि के साथ हैं जिससे इस दौरान इन्हें राजनीति में विपक्षियों के विरोध का खूब सामना करना पड़ा। लेकिन सूर्य के साथ बुध बुद्धि और व्यावहारिकता से स्थितियों को संभालने में मददगार साबित हुआ। इससे राजनीति में इनका कद बढ़ा और आगे भी बढ़ेगा। फिलहाल कुंडली में छठे घर का राहु विरोधियों को मात देने में सहायक होगा जबकि बारहवें घर का केतु राजनीति में सफलता की ऊंचाई पर पहुंचाने में सहायक रहेगा। योगी आदित्यनाथ अभी केतु की महादशा में चल रहे हैं जो २०२४ तक चलेगी। इस दौरान राजनीति में इनका परचम लहराता रहेगा। २०१९ जनवरी के बाद अगस्त तक इनकी चंद्रमा की दशा चलेगी इस दौरान साझेदारी और राजनीतिक सूझ-बूझ का इन्हें लाभ मिलेगा। जनता में इनकी छवि बेहतर होगी।

लंबी जुबान का डर!
– नवजोत सिंह सिद्धू
इंसान की जुबान ही है जो उसे लोगों के बीच खूब प्रसिद्ध करवा दे या लोगों की आंखों की किरकिरी बना दे। नवजोत सिंह सिद्धू की वाणी के लोग दीवाने थे लेकिन समय के साथ उनकी हरकतों ने जनता के मन से उनको उतारना शुरू कर दिया। उनकी कुंडली बताती है कि उनकी जुबान ही उन्हें एक दिन फंसाएगी। संकेत अभी से मिलने भी लगे हैं। सिद्ध की कुंडली के अनुसार उनकी जन्म राशि वृश्चिक है, वहीं मंगल साथ है। यहां पर चंद्र नीच का है लेकिन मंगल साथ होने से चंद्र का नीच भंग हो रहा है। इधर राज्यभाव का स्वामी सूर्य नीच का है, वह शुक्र के साथ होने से सूर्य का नीच भंग हो रहा है। यह उन्हें अति महत्वाकांशी बनाता है। सिद्धू ने अपनी बड़ी महत्वाकांक्षा के चलते ही दूसरी पार्टी का दामन थामा है। उनका गुरु पंचम भाव में मीन राशि में होकर भाग्य पर उच्च दृष्टि डाल रहा है व लग्न पर नवम दृष्टि डालने से चंद्र को देख रहा है। अत: यह गजकेसरी योग बना रहा है। सिद्धू का जन्म २० अक्तूबर १९६३ को पटियाला में हुआ, इनका जन्म चंद्र कुंडली में वृश्चिक राशि के समय हुआ। इसके साथ ही चंद्र कुंडली में लग्न का स्वामी मंगल स्वराशि होकर चंद्रमा के साथ बैठा है, इसके साथ ही इस योग के कारण इनकी कुंडली में लक्ष्मी योग बन रहा है। सिद्धू की चंद्र कुंडली के लग्न का स्वामी लग्न में होने के चलते इस समय इनके खिलाफ रणनीति बनेगी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का ताजा कदम कूछ यही इशारा करता है। सिद्धू की चंद्र कुंडली का स्वामी मंगल है। कुंडली में गुरु शनि की तीसरी दृष्टि से परेशान है इसलिए गुरु को मजबूत करना भी इनके लिए आवश्यक है। इस समय सिद्धू को संभलकर व्यवहार करना चाहिए। वर्ना दुश्मनी बढ़ती रहेगी। रही बात पंजाब में एंट्री की तो ये बहती गंगा में हाथ धोनेवाला ही साबित होगा। वैâप्टन को सिद्धू ने अपना दुश्मन बना ही लिया है।