तिकड़ी का उड़ा तिनका!

कभी बॉलीवुड की बोल्ड स्टार रही एक एक्ट्रेस ने कहा था कि बॉलीवुड में दो ही चीजें बिकती हैं, सेक्स और शाहरुख। कुछ साल पहले तक ये बात कुछ हद तक सच भी नजर आ रही थी। पर अब हालत यह हो गई है कि न ही सेक्स बिक रहा है और न ही शाहरुख। सलमान और आमिर की फिल्मों के बुरे हश्र के बाद ‘हम किसी से कम नहीं’ की तर्ज पर शाहरुख की ‘जीरो’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से ढेर हो गई। २०० करोड़ रुपए की लागतवाली यह फिल्म १०० करोड़ की कमाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह फिल्म शाहरुख की होम प्रॉडक्शन की थी और इसमें शाहरुख ने विश्वस्तरीय वीएफएक्स का इस्तेमाल किया था। ‘जीरो’ से ज्यादा जीरो के स्पूफ को व्हॉट्सऐप पर लोगों ने पसंद किया। इसके कुछ ही दिन पहले आमिर फिरंगी खान की ३०० करोड़वाली ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ भी ५० करोड़ रुपए की विराट ओपनिंग के बाद औंधे मुंह ढेर हो गई थी। इस फिल्म ने भी लगभग ५० फीसदी रकम गंवा दी थी। खान तिकड़ी में विफलता की शुरुआत इस साल सलमान खान की ‘रेस ३’ के साथ हुई थी। पिछले दो दशक से बॉलीवुड में इनका राज चल रहा था। बीच-बीच में कभी रितिक रोशन तो कभी अक्षय कुमार ने इन्हें चुनौती दी पर उसे बरकरार नहीं रख पाए। अब बॉलीवुड में उभरे दो नए सितारे रणवीर और रणबीर ने इस २०१८ में २ ब्लॉकबस्टर दी हैं ‘संजू’ और ‘सिंबा’। ऐसे में माना जा रहा है कि पुरानी तिकड़ी का तिनका उड़ चुका है। इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार फिर प्रूव हो गया कि सिनेमा में सितारे नहीं बल्कि कंटेंट यानी विषय चलते हैं। उस विषय को आप पर्दे पर किस तरह से प्रस्तुत करते हैं यह मायने रखता है। 
नए साल के पहले दिन ही बॉलीवुड के अति वरिष्ठ लेखक-अभिनेता कादर खान का निधन हो गया। करीब २० वर्षों तक कादर खान का भी एक दौर था। मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा जैसे अपने वक्त के दिग्गज फिल्मकारों की कई फिल्मों के संवाद व पटकथा कादर खान ने लिखे थे। कादर मसाला फिल्मों के बादशाह थे। वैâमरे के सामने उनके चुटीले संवाद बोलकर कई सितारों ने सिनेमाघरों में ढेरों तालियां बजवार्इं। ‘बड़े-बड़े पेपर में अपन का छोटा-छोटा फोटो छपता है’, फिल्म अमर अकबर एंथोनी में एंथोनी गोंसाल्विज का बोला यह डायलॉग कोई भूल सकता है क्या! ‘हम जहां खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है।’ यह डॉयलाग तो अमिताभ की पहचान बन गया था। गोविंदा व शक्ति कपूर के साथ कई फिल्मों में कादर ने खूब जलवा बिखेरा था। ३०० फिल्मों में अभिनय व २०० फिल्मों के लेखन का भारी पिटारा कादर खान के पास था। मगर वक्त बदला और कादर खान का जादू ढलने लगा। एक वक्त फिल्म में किसी भी रूप में जिसकी मौजूदगी सफलता की गारंटी मानी जाती थी वो हाशिए पर चला गया। यही दुनिया की रीत है और बॉलीवुड कोई अछूता तो नहीं!
बॉलीवुड में पुलिसवाले हीरो पर कई फिल्में बन चुकी हैं। अमिताभ बच्चन को जिस फिल्म ने बॉलीवुड में स्थापित किया, वह थी प्रकाश मेहरा की सुपरहिट फिल्म ‘जंजीर’ जिसमें वे एंग्री पुलिसवाले की भूमिका में नजर आए थे। फिर तो दोस्ताना, शहंशाह, आखिरी रास्ता, अक्स, खाकी आदि कई फिल्मों में बिग बी ने पुलिसवाले का रोल किया। ‘शूल’ में मनोज वाजपेयी एक ईमानदार पुलिसवाले की भूमिका में नजर आए थे। अजय देवगन ने ‘गंगाजल’ से लेकर ‘सिंघम’ तक में अपनी छाप छोड़ी। अब पांडे जी यानी ‘दबंग’ में सलमान खान के पुलिसवाले के रोल की चर्चा न हो तो बात अधूरी रह जाएगी। कहने का मतलब यह कि पुलिसवाले की कहानी बॉलीवुड का प्रिय विषय रहा है, ऐसे में किसी पुलिसवाले को केंद्र में रखकर फिल्म बनाना और उसे हिट करा लेना कोई खाने का काम नहीं। यही वजह है कि ‘सिंबा’ के रिलीज होने के पहले फिल्म ट्रेड से जुड़े लोगों के मन में तमाम तरह की शंकाएं थी कि पता नहीं इस बार क्या होगा। मगर सिंबा आई और उसने दर्शकों को पैसा वसूल मनोरंजन दिया। यहां पर दाद देनी पड़ेगी रोहित शेट्टी की कि उन्होंने दर्शकों को फुल एंटरटेनमेंट दिया। ऊपर से रणवीर सिंह ने डैशिंग परफॉमेंस दिया। फिर तो फिल्म हिट होनी ही थी।
हाल ही में बॉलीवुड की एक पार्टी में कुछ निर्माता और वितरक जुटे थे। उनके बीच चर्चा का मुद्दा था कि वैâसी फिल्म बनाई जाए जो कमा कर दे? रेस ३, ठग्स ऑफ हिंदोस्तान और जीरो के बुरी तरह से फ्लॉप हो जाने से हर कोई कन्फ्यूज हो गया है कि किस स्टार को लेकर फिल्म बनाई जाए कि कमाई की गारंटी हो! पर गारंटी तो कोई भी स्टार नहीं दे सकता। गारंटी तो फिल्म का विषय देता है। और विषय की समझ निर्देशक को होनी चाहिए। ताजा मिसाल ‘सिंबा’ और ‘बधाई हो’ को ले लीजिए। २५ से ३० करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब १४० करोड़ रुपए का कारोबार किया। तो इसकी वजह है किसी भी घर में घटनेवाली एक हल्की-फुल्की कहानी पर दमदार एक्टिंग के दम ने दर्शकों को भरपूर आकर्षित किया। पर इस तरह के विषय आयुष्मान खुराना को तो भाते हैं पर अधिकांश अभिनेताओं में हिम्मत नहीं कि ऐसे विषय को हाथ भी लगाएं। दर्शकों के लिए शाहरुख, सलमान और आमिर के चेहरे बासी-पुराने हो चुके हैं शायद। अब सिर्फ इनके नाम व चेहरे देखकर तो दर्शक आने से रहे। उन्हें ज्यादा एनर्जेटिक रणवीर जो मिल गया है। सिंबा का आखिरी सीन देखिए। जब ७ साल के लिए जेल जा रहा धुर्वा कोर्ट में ही सिंबा से कहता है कि आने के बाद वह उसे छोड़ेगा नहीं तो बेफिक्र सिंबा अपने बालों में हाथ फेरते हुए कहता है कि ‘हां चल, आने पर व्हॉट्सऐप करना।’ यह स्टाइल कादर खान की याद दिला गया। अपने जमाने में ऐसे सामयिक व चुटीले संवाद कादर खान ने खूब लिखे जिस पर खूब तालियां बजती थीं!