तीन कदम दूर तीसरा फितूर

सीरिया का छलनी होना जारी है। वहां कथित रासायनिक हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया पर हमला किया है। सीरिया की रणभूमि पर विश्व तीन खेमों में बंट गया है। तीनों ही खेमे अपने फितरती अहम के लिए सीरिया को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका ने रासायनिक हमलों के विरोध में संयुक्त राष्ट्र से इजाजत लिए बगैर ही हमला कर दिया जबकि रूस सीरिया के राष्ट्रपति के समर्थन में है। इसी तरह एक तीसरा खेमा आतंकियों का है जो गृहयुद्ध में असद का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों की मदद कर रहा है। लेकिन इन तीनों खेमों पर लगाम न लगी तो दुनिया तीसरे फितूर से सिर्फ तीन कदम ही दूर है।
असद की लड़ाई ने बांट दी दुनिया!
सीरिया पर हुए ताजा हमले में अमेरिका कड़ा साथ ब्रिटेन और फ्रांस भी शामिल हैं। हमले में सीरिया के मिलिट्री बेस और केमिकल रिसर्च सेंटरों को निशाना बनाकर १०० से ज्यादा मिसाइलें दागी गर्इं। जबकि सीरिया के साथ खड़े रूस ने कई मिसाइलों को ध्वस्त करने का दावा किया है। सीरिया की जमीन पर लड़ाई भले ही असद की अपनों से ही हो पर उसने दुनिया को भी बांट दिया है। जिसमें महाशक्तियां एक दूसरे खिलाफ लड़ रही हैं और आतंकी नई चुनौती बनकर लोहा ले रहे हैं।
सीरिया का गृहयुद्ध सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के उन वादों के खिलाफ शुरू हुआ था जिनमें उन्होंने सीरिया में चुनाव करवाने से लेकर नए बदलाव लाने की बातें कही थीं। देश के युवाओं ने साल २०१० में ट्यूनीशिया में शुरू हुए ‘जैसमिन रिवोल्यूशन’ से प्रेरणा ली और असद सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। लेकिन असद सरकार ने हर तरह के विरोध को कुचलने में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। इस युद्ध में रूस जैसे दुनिया के बेहद ताकतवर देश से लेकर और पड़ोस में बसे ईरान तक सीरिया के समर्थक हैं। रूस सीरिया का सबसे बड़ा समर्थक है वह सीरिया का पक्ष लेने से लेकर इसे हथियार और आर्थिक सहायता देने में भी कभी पीछे नहीं हटा। ईरान भी पैसे और हथियारों से सीरिया की मदद कर रहा है। ईरान, लेबनान, इराक़, अफ़गानिस्तान और यमन से हज़ारों की संख्या में शिया लड़ाके सीरियाई आर्मी की तरफ़ से जंग में शामिल हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस,तुर्की,अरब समेत कई देश विद्रोहियों के साथ खड़े हैं। ये गठबंधन ‘उदार विद्रोहियों’ को समर्थन देता रहा है। इस जंग में कई समूह हैं जो कहीं विरोधी हैं तो कहीं समर्थक हैं। जैसे कुर्द लड़ाकों को असद के खिलाफ अमेरिका मदद करता है। वहीं अमेरिका के ये कुर्द सहयोगी तुर्की को फूटी आंखों नहीं भाते। तुर्की में कुर्द अपने लिए अलग इलाके की मांग की जंग लड़ रहे हैं। लेकिन कुर्द को अरब और अमेरिका का अप्रत्यक्ष समर्थन हासिल है।
सबसे आश्चर्यजनक तथ्य ये है कि अरब, अमेरिका के साथ है लेकिन वो असद के खिलाफ आईएसआईएस की मदद करता है। आतंकी सीरिया में तीसरे मोर्चे पर जंग लड़ रहे हैं। अरब की मदद से ये असद को सत्ता से उखा फेंकना चाहते हैं।