‘तुम ही मेरी रेखा हो रकुल!’ -रकुल प्रीत सिंह

अभिनेत्री-मॉडल रकुल प्रीत सिंह इस समय अपनी फिल्म ‘मरजावां’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके साथ हैं सिद्धार्थ मल्होत्रा और तारा सुतारिया। मिलाप जवेरी निर्देशित इस प्रेमकहानी में रकुल ने एक तवायफ का किरदार निभाया है, जो दर्शकों को रेखा की याद दिलाएगा। रकुल ने बताया कि उनकी डेब्यू फिल्म साउथ की नहीं हिंदी में थी। हां, ये अलग बात है कि साउथवाली फिल्म पहले रिलीज हो गई। पेश है फिटनेस के लिए मशहूर रकुल से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

फिल्म ‘मरजावां’ में आपके साथ तारा सुतारिया भी हैं। कितना स्कोप है इस फिल्म में आपके लिए?
फिल्म के निर्देशक मिलाप जवेरी ने तारा के किरदार को ‘गूंगा’ बना दिया और मुझे बोलनेवाला। उन्होंने मुझे भारी-भरकम डायलॉग दे दिए, वो भी बेहद इमोशनल। फिल्म में मेरा किरदार एक तवायफ का है। इस तवायफ में एक अदा है, नजाकत है, खूबसूरती है। इस तरह का किरदार पिछले कुछ सालों से हिंदी फिल्मों में देखा नहीं गया। मिलाप ने मुझसे कहा, ‘रकुल, तुम मेरी रेखा हो इस फिल्म में!’ ये सुनते ही मेरा दिल बाग-बाग हो गया।

तवायफ के किरदार के लिए आपने किस तरह की तैयारी की। रेखा की कितनी फिल्में देखीं आपने?
रेखा से मेरी कोई तुलना नहीं हो सकती। हर मामले में वो मुझसे बहुत बड़ी स्टार हैं। मैंने उनकी फिल्में नहीं देखीं क्योंकि मुझे डर था कि मैं कहीं उनको कॉपी न कर बैठूं। हां, मैंने कुछ पुरानी फिल्में जरूर देखीं ये जानने के लिए कि तवायफ किस तरह उठती-बैठती है, उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनके सोचने और बात करने का अंदाज वैâसे होता है। मुझे रेखा जी की कार्बन कॉपी नहीं बनना था।

सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ आप दूसरी बार काम कर रही हैं। किस तरह के इक्वेशन बन चुके हैं आप दोनों में?
मैं सिद्धार्थ के साथ फिल्म ‘अय्यारी’ में काम कर चुकी हूं। सिद्धार्थ से प्रोफेशनल दोस्ती है जैसे किसी कलीग के साथ आप काम करते हैं। सिद्धार्थ और मैं दिल्ली के रहनेवाले हैं। हम दोनों में बस यही समानता है।

आजकल दो हीरोइनों का ट्रेंड चल रहा है। तारा के साथ वर्किंग एक्सपीरियंस वैâसा रहा?
मुझे नहीं लगता कि ये कोई ट्रेंड है। दो हीरोइनोंवाली दर्जनों फिल्में बन चुकी हैं। लोग अब इसे फिर नोटिस कर रहे हैं क्योंकि ‘सांड की आंख’ और ‘मिशन मंगल’ अभी-अभी सफल हुई हैं। तारा बहुत मेहनती लड़की है, हम दोनों की नॉन फिल्मी बैकग्राउंड है।

क्या हिंदी फिल्में ज्यादा न कर पाने का मलाल है?
नहीं, बिल्कुल नहीं। मुझ पर नॉर्थ इंडियन का स्टैंप न लगाइए। मैं एक फौजी की बेटी हूं जो पूरे देश का होता है। मेरा कोई गॉडफादर नहीं है। मैंने अपनी शर्तों पर काम किया है।
हिंदी में बनी फिल्म ‘यारियां’ मैंने पहले साइन की थी लेकिन साउथवाली फिल्म पहले रिलीज हुई। मुझे किसी भी बात का अफसोस और मलाल नहीं है। साउथ में मेरी पहचान ज्यादा बनी और मुझे वहां सफलता मिली।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के लिए आप काम करती हैं?
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ इस अभियान से जुड़कर मुझे ढाई साल हो चुके हैं। रूरल एरियाज में जाकर लोगों को समझाना और उनसे कहना कि बेटी ही बेटे समान है और उसे पढ़ाना-लिखाना निहायत जरूरी है। मुझे खुशी है कि इस तरह के अभियान के लिए मैं कुछ कर रही हूं।

जन्म तारीख – १० अक्टूबर, १९९०
जन्मस्थान – न्यू दिल्ली
कद – ५ फुट ७ इंच
वजन – ५४
पसंदीदा व्यंजन – पराठा, दही, रायता
मनपसंद मिठाई – खीर, पायसम
पसंदीदा फिल्म – जब वी मेट