तेंदुओं की जान का दुश्मन कौन?, दूषित पानी या शिकारी?

दो हफ्ते में दो तेंदुओं की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसके लिए प्राणीमित्र जहां तेंदुओं की मौत के लिए शिकारियों को जिम्मेदार मान रहे हैं, वहीं वन विभाग के अधिकारी तेंदुओं की मौत को प्राकृतिक मानकर जंगल के अंदर स्थित तालाबों के पानी तथा खाद्य पदार्थों की जांच करने में जुटे हुए हैं। प्राणीमित्रों के बढ़ते दबाव के चलते इस मामले की विस्तृत जांच-पड़ताल की जा रही है पर अभी तक शिकार करने के कोई सबूत हाथ नहीं लगे हैं।
उल्लेखनीय है पिछले दो हफ्तों में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान स्थित येऊर परिसर में दो तेंदुओं की मौत का मामला प्रकाश में आ चुका है। तेंदुओं की मौत को कई सामाजिक संगठनों तथा प्राणीमित्रों ने बेहद गंभीरता से लिया और वन अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तीव्र अभियान छेड़ दिया। दो तेंदुओं की मौत पर गहराते आक्रोश को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू हो गई है। पिछले सप्ताह बरामद किए गए तेंदुए के शव का संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पशु वैद्यकीय अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। प्रथमदृष्टया तेंदुए की मौत को प्राकृतिक बताया जा रहा है। गले के आसपास घाव के निशान पाए गए हैं।
शिकारियों द्वारा बिछाए गए जाल में फंसकर तेंदुए को चोट लगी और उनकी मौत हो गई, यह आशंका प्राणीमित्रों द्वारा लगातार व्यक्त की जा रही है। तेंदुए की मौत की वजह जानने के लिए जंगल के अंदर स्थित तालाबों के पानी तथा खाद्य पदार्थों के सेंपल लेकर जांच-पड़ताल के लिए भेज दिया गया है। येऊर वन क्षेत्र अधिकारी राजेंद्र पवार का कहना है कि मादा तेंदुए की मौत प्राकृतिक है।
जांच-पड़ताल के दौरान शिकारियों द्वारा जाल बिछाए जाने का एक भी निशान नहीं मिला है। यह क्षेत्र आवासीय बस्ती से दूर है। वनरक्षक इस परिसर में लगातार गस्त लगते रहते हैं।