" /> तेल का तिलिस्म!, सऊदी-रूस के झगडे में १४.२५ डॉलर गिरी कीमतें

तेल का तिलिस्म!, सऊदी-रूस के झगडे में १४.२५ डॉलर गिरी कीमतें

तेल का तिलिस्म ऐसा कि कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट को लेकर सऊदी अरब और रूस के बीच विवाद और बढ़ गया है, जिसके कारण तेल के दामों में लगातार गिरावट जारी है। नतीजा ये है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग ३० प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में हिंदुस्थान में कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से पेट्रोल और डीजल के दाम में ५ से ६ रुपए प्रति लीटर की कमी के संकेत देखे जा रहे हैं।
कोरोना वायरस ने कच्चे तेल के बाजार को भी प्रभावित किया है। कच्चे तेल निर्यातक देशों के ओपेक संगठन ने उत्पादन में गिरावट पर चर्चा के लिए हाल ही में एक बैठक आयोजित की गई थी। कोरोना वायरस र्इंधन की मांग को कम करेगा, इस पर ओपेक की बैठक में चर्चा की गई थी। हालांकि रूस सहमत नहीं था। सऊदी अरब और रूस कच्चे तेल के उत्पादन में कमी पर सहमत नहीं हुए हैं। परिणामस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर गई हैं। सऊदी अरब और रूस प्रमुख कच्चे तेल निर्यातक हैं।
सऊदी अरब और रूस में तेल के दामों को लेकर प्राइस वॉर शुरू हो गया है। १९९१ के बाद कच्चे तेल की कीमतें पहली बार सबसे निचले स्तर पर आ गर्इं। विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में १४.२५ डॉलर की गिरावट हुई है। कच्चे तेल की कीमतें अब ३१.०२ डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।
ये है ओपेक
ओपेक उन देशों का संघ है, जो र्इंधन का निर्यात करते हैं। इस संगठन में ३ देश हैं। यह संगठन तेल की कीमतों पर भारी राजस्व उत्पन्न करता है। सऊदी अरब को इन देशों का प्रमुख माना जाता है। दुनिया के तेल उत्पादन का लगभग ४४ प्रतिशत ओपेक देशों द्वारा उत्पादित किया जाता है। इन देशों में दुनिया के तेल भंडार का ८१.५ प्रतिशत है।