तेल कीमतों में झोल!,  क्रूड हुआ सस्ता पर ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा है फायदा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गत ५० दिनों में कच्चे तेल के दामों में भले ही २५.८ डॉलर करीब (१८०० रुपए) प्रति बैरल की गिरावट हुई है लेकिन पेट्रोल के दाम में महज ८.११ रुपए की गिरावट देखने को मिली है। ग्राहकों तक क्या इसका फायदा तेल कंपनियों द्वारा पहुंचाया जा रहा है? यह सवाल शायद आम आदमी से लेकर पेट्रोल पंप डीलर और विशेषज्ञों के दिमाग में हलचल मचा रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि स्वच्छ और पारदर्शी सरकार की बात करनेवाली केंद्र की भाजपा सरकार के राज में तेल के नाम पर कंपनियों द्वारा लूट मचाई जा रही है। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के लोगों का कहना है कि जब से तेल कंपनियों को रोज भाव निर्धारित करने की जिम्मेदारी दी गई है तब से तेल की कीमतों को बढ़ाने-घटाने में झोल चल रहा है और पारदर्शिता खत्म हो चुकी है।
बता दें कि इस वर्ष ९ अक्टूबर को प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत ८५ डॉलर थी। यानी पूरे ५० दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लुढ़क कर ५९.२ डॉलर तक पहुंच गई है। मतलब तेल के दामों में प्रति बैरल ३०.३५ प्रतिशत की गिरावट हुई है। दूसरी ओर ९ अक्टूबर को पेट्रोल का दाम ८७.७३ रुपए प्रति लीटर था जबकि कल पेट्रोल का दाम गिरकर ७९.६२ रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया। आकलन करें तो तेल के दाम में केवल ९ प्रतिशत की गिरावट ही हुई है। अब लोगों के मन में यही प्रश्न उठ रहा है कि तेल के दाम में सरकार द्वारा लगभग ४ से ५ रुपए प्रति लीटर रियायत देने के बाद भी पेट्रोल के दाम इतने कम हुए हैं तो फिर तेल कंपनियों ने कम ही क्या किया है? महाराष्ट्र पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व पेट्रोल पंप के मालिक रवि शिंदे ने कहा कि जिस तरह से कच्चे तेल के दामों में गिरावट हो रही है, उस हिसाब से पेट्रोल के दाम में लगभग ५ रुपए और कम किए जाने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। दाम तय करने का क्या फॉर्मूला है, यह तो कंपनियों को ही पता है। महाराष्ट्र पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वेंकट राव ने कहा कि पेट्रोल-डीजल का दाम कच्चे तेल की कीमत और डॉलर एक्सचेंज रेट को देखकर ऑयल मार्वेâटिंग कंपनियां तय करती हैं। ऑयल कंपनियां किस प्रकार दाम तय कर रही हैं, इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष बल मलकीत सिंह ने कहा कि जिस तेजी से कच्चे तेलों के दाम में गिरावट हो रही है, वैसे ही पेट्रोल और डीजल के दाम में भी गिरावट होती तो ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को भी काफी राहत मिलती लेकिन सरकार केवल चुनाव को मद्देनजर रखकर फायदा और नुकसान पहुंचाती है। तेल कंपनियों की मनमानी पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए जो कि अब तक नहीं देखने को मिला है। दहिसर के निवासी जतिन पांडे ने कहा कि जब कच्चे तेल के दाम अधिक थे तो रोज पेट्रोल के दाम में बढ़ोत्तरी होती थी। अब जब दाम कम हुए हैं तो ग्राहकों तक इसका फायदा क्यों नहीं पहुंचा रहा है? अब भी पेट्रोल के लिए ८० रुपए प्रति लीटर लूटा जा रहा है।