…तो आज मुंबई में हो गया होता पुलावामा रिटर्न्स!, आतंकी उड़ाना चाहते थे आईपीएल मुंबई की बस

देश में चुनावी माहौल के बीच आईपीएल की भी धूम मची हुई है। क्रिकेट स्टेडियमों के सफेद दूधिया रोशनी में होनेवाली चौके-छक्कों की बरसात क्रिकेट प्रेमियों का पैसा वसूल कर दे रही है। मगर इस क्रिकेट मस्ती के बीच आई एक खबर ने न सिर्फ क्रिकेटप्रेमियों बल्कि आम देशवासियों को भी सन्न कर दिया है। पता चला है कि आतंकी आईपीएल खिलाड़ियों पर हमला करनेवाले थे। पुलिस ने कुछ आतंकियों को दबोचा है जिससे ये खुलासा हुआ। अगर पुलिस एलर्ट नहीं होती तो आज मुंबई में ‘पुलवामा रिर्टन्स’ हो गया होता। दरअसल, ये आतंकी बिल्कुल पुलवामा की तरह खिलाड़यों की बस को उड़ाने वाले थे।
आईपीएल खिलाड़ियों पर आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। यह जानकारी खुफिया सूत्रों ने दी है। जानकारी सामने आने के बाद अलर्ट जारी कर दिया गया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक आईपीएल खिलाड़ियों पर होटल, सड़क और पार्किंग में हमला हो सकता है। खुफिया सूत्रों ने एटीएस द्वारा पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों की पूछताछ से मिली जानकारी को आधार बनाया है। दरअसल, आतंकियों ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने होटल ट्राइडेंट से वानखेडे स्टेडियम तक की रेकी की थी। जानकारी सामने आने के बाद मुंबई पुलिस अलर्ट हो गई है। मुंबई पुलिस की बंदोबस्त शाखा को अलर्ट रहने और खिलाड़ियों की सुरक्षा और बढ़ाने का निर्देश जारी किया गया है।
मुंबई में आईपीएल क्रिकेटरों पर आतंकी हमला हो सकता है। इस खबर से सनसनी फैल गई। हालांकि हमले की योजना बनानेवाले आतंकी पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं मगर पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया है। शक है कि आतंकी कोई दूसरी साजिश भी रच सकते हैं। खबर के अनुसार आतंकियों ने होटल से स्टेडियम के बीच खिलाड़ियों की बस पर हमला करने का मंसूबा बनाया था। खिलाड़ियों पर आतंकी हमले के खतरे के मद्देनजर, उनकी बस के साथ एस्कॉर्ट के लिए मार्क्समैन कॉम्बैट वाहन का इस्तेमाल करने को कहा गया है। इसके अलावा होटल और स्टेडियम में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। मुंबई पुलिस ने किसी भी खिलाड़ी को बिना सुरक्षा के बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी है।
बता दें कि पिछले दिनों न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की एक मस्जिद में हुई गोलीबारी में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी बाल-बाल बच गए थे। एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दिख रहा था कि खिलाड़ी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं। बाद में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी तमीम इकबाल ने ट्वीट कर कहा, ‘गोलीबारी में पूरी टीम बाल-बाल बच गई। बेहद डरावना अनुभव था’। घटना के बाद बांग्लादेश के विकेटकीपर मुशफिकुर रहीम भी सदमे में थे। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘क्राइस्टचर्च की मस्जिद की शूटिंग के दौरान अल्लाह ने हमें बचा लिया। हम बहुत खुशनसीब हैं। जिंदगी में आगे कभी ऐसी चीजें देखने को न मिले। हमारे लिए प्रार्थना करें।’

बस पर हो सकती है फायरिंग
खबरों की मानें तो आतंकी आईपीएल मैच के दौरान विदेशी क्रिकेटरों की बस को निशाना बना सकते हैं। इतना ही नहीं, ऐसी भी सूचना मिली है कि खिलाड़ियों की बसों पर फायरिंग भी हो सकती है। एटीएस द्वारा पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों की पूछताछ के बाद मिली जानकारी को आधार मानते हुए खुफिया सूत्रों ने ये खबर दी है। खबरों के मुताबिक मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम भी आतंकियों के निशाने पर है। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए स्टेडियम के आस-पास कार पार्किंग का इस्तेमाल कर सकते हैं।

श्रीलंकाई क्रिकेटरों पर चली गोलियां
३ मार्च का दिन क्रिकेट इतिहास में एक काले दिन के तौर पर याद किया जाता है। साल २००९ में इसी दिन पाकिस्तान टूर पर गई श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर लाहौर में आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें प्लेयर्स की जान बाल-बाल बची थी। आतंकी, मेहमान टीम के सभी प्लेयर्स की जान लेने के मकसद से आए थे, लेकिन एक शख्स की हिम्मत की वजह से पूरी टीम की जान बच गई थी। गोलियों के बीच ड्राइवर ने दिखाई थी हिम्मत और बस को लेकर भागा था। इस हमले में श्रीलंकाई कप्तान माहेला जयवर्धने, उपकप्तान कुमार संगाकारा समेत ६ प्लेयर्स के साथ ही टीम के असिस्टेंट कोच भी जख्मी हुए थे। हमले में पाकिस्तान पुलिस के ६ जवान समेत ८ लोगों की मौत हो गई थी। हमले के बाद श्रीलंकाई प्लेयर्स को स्टेडियम से एयरलिफ्ट कर एयरपोर्ट पहुंचाया गया था। श्रीलंकाई क्रिकेट टीम ३ टेस्ट और ३ वनडे मैचों की सीरीज खेलने के लिए पाकिस्तान गई थी। १ मार्च से सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच शुरू हुआ था। ३ मार्च को मैच के तीसरे दिन श्रीलंकाई क्रिकेटर्स बस में सवार होकर होटल से लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम जाने के लिए निकले। इसी दौरान रास्ते में करीब १२ आतंकवादियों ने टीम की बस पर हमला कर दिया। जिसके बाद टीम के साथ मौजूद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें जवाब भी दिया। आतंकियों ने बस पर रॉकेट लॉन्चर भी दागा लेकिन किस्मत से ये निशाना चूक गया।

बहादुर ड्राइवर ने बचाया
इस दौरान बस को मेहर मोहम्मद खलील नाम का ड्राइवर चला रहा था। खलील ने सूझ-बूझ दिखाते हुए बस नहीं रोकी और भारी गोलीबारी के बीच बस को लगातार चलाकर स्टेडियम तक पहुंच गया। खलील ने कहा था, ‘पहले मुझे लगा कि ये मेहमान टीम के स्वागत में फोड़े जा रहे पटाखों की आवाज है। लेकिन फिर एक आदमी हमारी बस के ठीक सामने आ गया और तड़ातड़ गोलियां बरसाने लगा। इसके बाद मुझे लगा कि ये पटाखे नहीं कुछ और है। हम पर हमला हुआ है। उस वक्त मैं घबरा गया लेकिन तभी पीछे से श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने चिल्लाते हुए बस भगाने को कहा। उन्होंने इतनी तेज चीखा कि मुझे ४४० वोल्ट करंट जैसा महसूस हुआ। फिर पता नहीं क्या हुआ, मैं बिना कुछ सोचे-समझे बस भगाने लगा। सेफ लोकेशन पर पहुंचने के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने मेरी काफी सराहना की। उनमें से एक खिलाड़ी ने मुझे साथ श्रीलंका चलने को कहा लेकिन मैंने कहा कि मैं परिवार वाला हूं। उन्हें छोड़कर मैं कहीं नहीं जा सकता।’

जब बाल-बाल बचे बांग्लादेशी खिलाड़ी
गत मार्च की बात है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड में थी। तभी एक मस्जिद पर हमला हुआ था। मस्जिद अल नूर में हुए हमले में कई लोगों की मौत हो गयी थी। बांग्लादेश टीम के खिलाड़ी मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए प्रवेश करने वाले थे लेकिन वे बाल-बाल बचे। मौजूदा हालात को देखते हुए अधिकारियों ने अंतिम टेस्ट मैच को रद्द कर दिया था। बांग्लादेश के लिये यह दौरे का अंतिम मैच था। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अपने ट्विटर पेज पर बयान में कहा, ‘न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के सभी सदस्य शहर में हुई गोलीबार की घटना के बाद सुरक्षित होटल पहुंच गए हैं। इसके बाद बांग्लादेशी क्रिकेटर पहली फ्लाइट से न्यूजीलैंड से लौट आए। बांग्लादेश के प्रदर्शन विश्लेषक श्रीनिवास चंद्रशेखरन ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना की बात की। चेन्नई के चंद्रशेखरन पिछले एक साल से टीम के साथ हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा था, ‘गोलीबारी से बाल-बाल बचे। दिल की धड़कन इस घटना के बाद बढ़ गयी और सब घबराए हुए हैं।’ न्यूजीलैंड क्रिकेट ने खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा की पुष्टि करते हुए ट्वीट किया, ‘क्राइस्टचर्च में हुई गोलीबारी में जो लोग प्रभावित हुए उनके परिवारों और दोस्तों के प्रति हमारी संवेदनाएं। वहीं टीम के सीनियर सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने कहा कि यह टीम के लिये डरावना अनुभव था। कृपया हमारे लिए प्रार्थना कीजिए।’ न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा, ‘यह स्पष्ट है कि यह न्यूजीलैंड के सबसे काले दिनों में से एक है। यहां स्पष्ट रूप से जो हुआ, वह हिंसा की असाधारण करतूत है।’ घटना के समय ज्यादातर कोचिंग स्टाफ के सदस्य टीम के होटल में थे जबकि मुख्य कोच स्टीव रोड्स मैदान पर थे।

म्यूनिख का काला अध्याय
साल १९७२ में जर्मनी की म्यूनिख सिटी में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था। दुनियाभर के कई देशों के खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेने आए थे। इसमें एक टीम इजरायल की भी थी, जो खेल के इतिहास में एक दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही थी। साल १९७२ में यह ५ सितंबर की तारीख थी। म्युनिख के एक हॉस्टल में कई देशों के खिलाड़ी के साथ इजरायल टीम के ११ खिलाड़ी भी ठहरे हुए थे। इसी दौरान ८ आतंकी हॉस्टल में घुस गए और इजरायल के सभी खिलाड़ियों को बंधक बना लिया। सभी आतंकी ट्रैक सूट में थे, जिन्हें हॉस्टल के कुछ स्टूडेंट्स ने खिलाड़ी समझकर हॉस्टल में घुसने की मदद भी की थी। ये आतंकी पीएलओ यानी फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर्स थे। हॉस्टल में दाखिल होते ही हथियारों से लैस आतंकियों ने सभी कमरों की तलाशी लेते हुए इजरायल के सभी ११ खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था। कुछ ही घंटों बाद पूरी दुनिया में यह खबर पैâल गई कि फिलिस्तीनी आतंकियों ने इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया है। आतंकियों ने इनकी रिहाई के बदले में शर्त रखी कि इजरायल अपनी जेलों में बंद २३४ फिलिस्तीनियों को रिहा करे लेकिन इजरायल ने साफ मना कर दिया। इसके बाद आतंकियों ने २ खिलाड़ियों को गोली मारकर उनके शव हॉस्टल के बाहर फेंककर धमकी दी कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे बाकी खिलाड़ियों को भी इसी तरह मारकर फेंक देंगे। बावजूद इसके इजरायल नहीं माना और जर्मनी सरकार से मिलकर अपनी स्पेशल फोर्स के जरिए खिलाड़ियों को बचाने की कोशिश की। हालांकि, जर्मनी ने इजरायल को इसकी परमिशन नहीं दी। जब आतंकी यह समझ गए कि इजरायल उनके आगे नहीं झुकेगा तो उन्होंने दूसरी शर्त रखी कि उन्हें सही सलामत हॉस्टल से बाहर निकलने दिया जाए। आतंकी अपने साथ बाकी बचे ९ इजरायली खिलाड़ियों भी ले जाना चाहते थे। इजरायल यह शर्त मानने के लिए तैयार हो गया। दरअसल, इसके पीछे की प्लानिंग यह थी कि जैसे ही आतंकी एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों के साथ पहुंचेंगे तो शॉर्प शूटर उन्हें पलक झपकते ही निशाना बना देंगे। प्लान के मुताबिक आतंकियों को बस मुहैया कराई गई, जो उन्हें एयरपोर्ट तक ले गई। एयरपोर्ट पर अंधेरे में जगह-जगह शार्प शूटर तैनात कर दिए गए थे। हालांकि, एयरपोर्ट पर जैसे ही शॉर्प शूटर्स ने आतंकियों को निशाना बनाना शुरू किया तो आतंकियों ने बाकी सभी इजरायली खिलाड़ियों को गोली मार दी थी। इस दौरान सभी आतंकी भी मारे गए। खिलाड़ियों की हत्या का आरोप २ आतंकी संगठनों पर लगा और इसे अंजाम देनेवाले ११ ऐसे लोगों की लिस्ट सामने आई, जो दूसरे देशों में छिप गए थे। इजरायल इन सभी आतंकियों को मौत देना चाहता था। इसका काम खुफिया एजेंसी मोसाद को सौंपा गया। इस मिशन को नाम दिया गया ‘रैथ ऑफ गॉड’ यानी ईश्वर का कहर। मोसाद की टीम ने एक के बाद एक सभी आतंकियों के ठिकाने का पता लगा लिया और एक-एक कर सभी आतंकियों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया। इसके अलावा म्यूनिख नरसंहार के २ दिन के बाद ही इजरायली सेना ने सीरिया और लेबनान में मौजूद फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के १० ठिकानों पर बमबारी कर करीब २०० आतंकियों और आम नागरिकों को भी मौत के घाट उतार दिया था।