तो मिलेगा भाग्य का साथ

भाग्य या किस्मत ऐसे शब्द हैं जिन्हें हम सभी दिन में कई बार बोलते या सुनते हैं। काफी लोग अपनी असफलता का श्रेय भाग्य को देते हैं। यदि कर्म में मेहनत या ईमानदारी का अभाव हो तो निश्चित ही सफलता आपसे दूर ही रहती है लेकिन यदि कड़ी मेहनत और पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करने के बाद भी निराशा हाथ लगती है तो कुछ अन्य उपाय करना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति के कारण ही हमें परेशानियों और असफलताओं का सामना करना पड़ता है। अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रहों का उचित उपचार करने पर उनके बुरे फलों में कमी आती है। जिससे काफी हद तक मेहनत के बल पर हम उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपको भी जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो ज्योतिष शास्त्र में बताया गया यह टोटका अपनाएं-
– प्रतिदिन रात को सोते समय एक बर्तन में पानी भरकर अपने सिर के पास रखें। ब्रह्म मुहूर्त में उठें और वह पानी घर के बाहर फेंक दें।
– प्रतिदिन शिविंलग पर दूध और जल चढ़ाएं।
– दिन में कम से कम एक सकारात्मक अर्थात परमार्थ का कार्य अवश्य करें।
– किसी के प्रति मन में ईर्ष्या भाव न रखें और ना ही किसी को दुख पहुंचाएं। कार्य पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ करें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में भाग्य आपका साथ देने लगेगा और आपका जीवन सुखी तथा समृद्धिशाली हो जाएगा।

भोजन के समय इसका ध्यान रखें
भोजन करते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भोजन को भी पूजनीय माना गया है, इसी वजह से खाने से पहले भोजन को प्रणाम किया जाता है। फिर अन्न देवता से प्रार्थना करनी चाहिए। अपने इष्टदेव का ध्यान करते हुए पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए। इसके साथ किसी दिव्य मंत्र का एक बार जप करना चाहिए। वैसे तो शास्त्रों में कई भोजन मंत्र बताए गए हैं जिन्हें खाना खाने से पहले बोला जाता है। इनके अतिरिक्त हम गायत्री मंत्र, ॐ नम: शिवाय जैसे वैदिक मंत्र बोलकर भी भोजन कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन मंत्रों के प्रभाव से हमें हमेशा ही भोजन मिलता रहता है और देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है। मंत्रों की शक्ति से हम सभी भलीभांति परिचित हैं। भोजन से पहले मंत्र बोलने पर व्यक्ति को भूख अच्छे से लगती है, खाना पचने में कोई समस्या नहीं होती है। साथ ही मंत्रों की शक्ति से भोजन से असीम ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वहीं यह भी कहा गया है कि यदि आप मंत्र न बोल सकें तो अपने गुरु या अपने इष्ट का स्मरण करके भोजन शुरू कर सकते हैं।

घर का वैद्य
१) राई का प्रमुख गुण पाचक होता है। पेट के कीड़े इसका पानी पीने से मर जाते है।
२) हैजे में राई को पीस कर पेट पर लेप करने से उदरशूल व मरोड़ में आराम मिलता है। इसकी पुल्टिस बना कर दर्द वाली जगह पर सेंक किया जाए तो तुरंत राहत मिलती है।
३) कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधाशीशी (आधे सिर का दर्द) का दर्द समाप्त हो जाता है। यह प्रयोग प्रात:काल करना चाहिए।
४) राई के लेप से सूजन कम होती है।
५) अमरूद के ताजे पत्तों का रस १० ग्राम तथा पिसी मिश्री १० ग्राम मिलाकर २१ दिन प्रात: खाली पेट सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और शरीर सौंदर्य में भी वृद्धि होती है। अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से भांग का नशा कम हो जाता है। अमरूद के ताजा पत्ते में एक छोटा-सा टुकड़ा कत्था लपेटकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।