" /> तो राम मंदिर होगा ,सियासी समर का अचूक हथियार

तो राम मंदिर होगा ,सियासी समर का अचूक हथियार

पांच शताब्दियों की जद्दोजहद, पचासों साल की मुकदमेबाजी और अनगिनत आहुतियों के बाद पांच अगस्त को जब अयोध्या में भव्य और दिव्य श्री राम मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी तो पूरे विश्व के अरबों धर्मावलंबी राममय हो जाएंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जन्मस्थान पर राम मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ होगा तो शायद दुनिया की सबसे बड़ी दिवाली मनेगी। यह सच है कि श्री राम के प्रति आस्थावान लोगों की गिनती संभव नहीं है और दुर्भाग्यपूर्ण सच यह भी है कि हाल के दशकों में राम का नाम सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने के लिए सियासत में ज्यादा इस्तेमाल हुआ है। अब, जब उत्सव का सबसे बड़ा अवसर आया है, फिर वही तैयारी है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तिथि ५ अगस्त घोषित होने के बाद अब इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ५ अगस्त को अभिजीत मुहूर्त में ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ में राममंदिर का भूमि पूजन करेंगे। रामजन्मभूमि स्थल पर ताम्र कलश में गंगाजल और अन्य तीर्थों का जल लाकर पूजा की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी सुबह ११ बजे अयोध्या पहुंचेंगे और १ बजकर १० मिनट तक अयोध्या में रहेंगे। भूमि पूजन की औपचारिकताओं की शुरुआत उनके पहुंचने से पहले ही होगी और वो पहुंचने के बाद नींव की शिलाओं का पूजन करेंगे। मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का यह कार्यक्रम ४ घंटे से ज्यादा चलेगा। राम मंदिर के भूमि पूजन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास लगभग ४० किलो चांदी की श्रीराम शिला समर्पित करेंगे और पीएम मोदी इस शिला का पूजन कर इसे स्थापित करेंगे। अयोध्या आंदोलन के प्रमुख संतों की ओर से भेंट की गई ४० किलो चांदी की राम शिला के साथ ४०-५० प्रमुख लोगों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ५ अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर की बुनियाद रखेंगे।
इसी के साथ अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ ही विकास का भी तड़का लगेगा। अयोध्या में पांच अगस्त को प्रधानमंत्री के हाथों राम मंदिर के लिए भूमि पूजन के साथ ही दर्जनों विकास की परियोजनाओं पर भी काम शुरू होगा। प्रदेश की योगी सरकार इसी दिन कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेगी। राम मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या के बढ़ने वाले महत्व व आबादी के दबाव को देखते हुए ६०० एकड़ की आवासीय परियोजना भी शुरू की जाएगी। अयोध्या धाम के नाम से लखनऊ-गोरखपुर मार्ग पर शहनवाजपुर गांव के पास ६०० एकड़ में टाउनशिप बसाई जाएगी। इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार की ४८७.९१ करोड़ रुपए की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया जाएगा। इनमें ३२६.३८ करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं का शिलान्यास व १६१.५३ करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है। अयोध्या में बन रहे अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को शहर से जोड़ने के लिए फोर लेन सड़क, विश्वस्तरीय मीडिया सेंटर, मल्टीलेवल पार्किंग का काम भी ५ अगस्त से शुरू कर दिया जाएगा। सभी परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। अयोध्या में ६०० एकड़ में प्रस्तावित नई टाउनशिप लखनऊ राजमार्ग पर बनेगी, जिसे आवास विकास परिषद बनाएगी। इसके साथ अयोध्या में कोरियाई राजकुमारी क्वीन हो मेमोरियल पार्क २१.९२ करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है जो इसी साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा रामकथा पार्क दो करोड़ रुपए की लागत से और रामायण सर्किट थीम पार्क ७.५९ करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है। इसी साल सितंबर तक अयोध्या में १६५.६५ करोड़ रुपए की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग और ७ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला नया बस स्टेशन भी तैयार हो जाएगा। हरिद्वार की हर की पैड़ी की तर्ज पर अयोध्या में १२.६४ करोड़ रुपए की लागत से बनी राम की पैड़ी का लोकार्पण ५ अगस्त को ही किया जाएगा। अयोध्या में ११.८० करोड़ रुपए की लागत से बने पैदल यात्री मार्ग और ९.७३ करोड़ रुपए लागत से लक्ष्मण किला का सौंदर्यीकरण इसी साल सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। राम की जल समाधि के स्थल गुप्तारघाट के विकास के काम पर प्रदेश सरकार ने ३५.६४ करोड़ रुपए खर्च किए हैं जिसका लोकार्पण भी ५ अगस्त को ही होगा। देश-विदेश की मीडिया के लिए अयोध्या में ११० करोड़ रुपए की लागत से प्रेस क्लब का निर्माण भी किया गया है। अयोध्या एयरपोर्ट को सुल्तानपुर मार्ग से जोड़ने वाले १.५० किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण १८.५० करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा।
गौरतलब है कि कोरोना संकट के चलते मार्च में की गई देशव्यापी तालाबंदी के कुछ ही घंटों पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम की प्रतिमा को टीन शेड के अस्थायी मंदिर में स्थापित कर पूजा की शुरुआत कर दी थी। भगवान राम की प्रतिमा को मंदिर निर्माण होने तक एक अलग मंदिर में स्थापित किया गया है। अयोध्या में यह अस्थायी मंदिर दो महीनों की तालाबंदी के बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने पर ८ जून को लोगों के दर्शन के लिए खोला गया था। मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों के मुताबिक अभी मंदिर का जो मॉडल है, वो ६७ एकड़ के क्षेत्र का है लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस बात की योजना बना रहा है कि यह क्षेत्र १०८ एकड़ तक हो। अगर ऐसा होता है तो क्षेत्रफल के लिहाज से यह मंदिर दुनिया में चौथा सबसे बड़ा मंदिर हो जाएगा। फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर कंबोडिया का अंगकोरवाट है। इसका क्षेत्रफल ४०२ एकड़ है। भारत का सबसे बड़ा मंदिर तमिलनाडु का श्रीरंगनाथ स्वामी मंदिर है जिसका क्षेत्र लगभग १५६ एकड़ है। मंदिर वर्तमान प्रस्तावित ६७ एकड़ भूमि पर ही बनता है तो भी यह विश्व का पांचवां सबसे बड़ा मंदिर होगा। अगले ३ साल में मंदिर के पूरा हो जाने की उम्मीद है।
देश के प्रमुख राज्यों बिहार, बंगाल और कुछ ही दिनों बाद होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों पर महामारी की नहीं राम नाम की छाया बनी रहे। दुष्काल में निर्माण कार्य शुरू कर भारतीय जनता पार्टी अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर को आगामी राजनैतिक समर के लिए अचूक हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। कम से कम मंदिर निर्माण की तैयारियों और आगे के कार्यक्रम से ये संदेश साफ है। केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों मंदिर निर्माण के साथ ही विकास के एजेंडा को भी जनता के जेहन में कायम रखना चाहती है। इसीलिए मंदिर निर्माण के साथ कई विकास परियोजनाओं पर काम शुरू करने की भी तैयारी है। मंदिर का निर्माण अगले लोकसभा चुनावों के आसपास पूरा होगा पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों तक इसके पहले चरण को पूरा कर लिया जाएगा। संभावना है कि भव्य मंदिर में भगवान रामलला की पूजा अर्चना का दौर यूपी विधानसभा चुनावों के पहले ही शुरू कर दिया जाए। मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की पूरी कैबिनेट भी शामिल नहीं होगी बल्कि चुनिंदा मंत्री ही शामिल होंगे। कोरोना महामारी के चलते निर्माण कार्य की शुरुआत भारी भीड़ के साथ नहीं होगी बल्कि कुछ खास लोगों के बीच ही होगी। हालांकि मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों को जरुर इस कार्यक्रम में बुलाया जा रहा है। मंदिर निर्माण ट्रस्ट से जुड़े लोगों, पुजारियों के अतिरिक्त संतों को भी न्यौता नहीं दिया जा रहा है। अभी तक ट्रस्ट की ओर से शंकराचार्यों को बुलाने को लेकर भी कोई सहमति नहीं बनी हैं। हालांकि कुछ लोगों की कहना है कि उन्हें औपचारिक आमंत्रण भेजा जाएगा। जहां संत-शंकराचार्य नहीं होंगे वहां सियासी नेताओं के जमघट से भला मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को उपक्रम पूरा कैसे होगा? यह सवाल यूपी की आम जनता पूछ रही है। इसका जवाब तो सरकार को देना ही होगा।