थकेली-थकेली राहुल की रैली

मुंबईकरों से संवाद स्थापित करने का सपना लेकर कल मुंबई आए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद अपने ही कार्यकर्ताओं से ढंग से संवाद स्थापित नहीं कर पाए। उनकी इच्छाओं पर पार्टी की अंदरूनी कलह का असर भारी पड़ता नजर आया। कांग्रेस की इस रैली में राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को चाहे जो मंत्र दिया हो पर रैली में पहुंचे कार्यकर्ता थकेली-थकेली रही राहुल की रैली का मंत्र लेकर ही बाहर निकले।
कल मुंबई के बीकेसी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली थी। इसमें कांग्रेस के अंदरूनी वाद के कारण राहुल का संवाद फीका पड़ गया। कांग्रेसियों को उम्मीद थी कि मिलिंद देवड़ा और संजय निरुपम खेमा सुलह करके राहुल की सभा की तैयारी करेगा लेकिन यह कोरी कल्पना साबित हुइ, जिसके कारण सभा फीकी रही। सभा में वह भीड़ नहीं जम पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके कारण कांग्रेस के नेता भी मायूस दिखाई दे रहे थे। सभास्थल पर लोग बात कर रहे थे कि पुलवामा की घटना व देश में उपजे हालात के चलते भीड़ अपेक्षा से कम आई है। भीड़ कम होने के चलते कुछ नेताओं का भाषण होते ही राहुल गांधी खुद भाषण के लिए खड़े हो गए।
भीड़ की कमी से भन्नाए राहुल
बीकेसी में कांग्रेस की सभा में भीड़ की कमी के चलते राहुल गांधी दूसरे वक्ताओं को दरकिनार करते हुए पहले ही भाषण करने के लिए खड़े हो गए, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण व मुंबई अध्यक्ष संजय निरुपम के आग्रह पर राहुल गांधी बैठ गए और मल्लिकार्जुन खरगे को भाषण का मौका दिया। इस ऊहापोह के कारण सभास्थल पर कुछ पल खामोशी छा गई थी। खरगे के भाषण के बाद राहुल गांधी ने भाषण की शुरुआत की।
संवाद के आड़े आया वाद
गुटबाजी ने फीकी कर दी सभा
भीड़ की कमी से राहुल दिखे नाराज
खुद ही भाषण के लिए खड़े हुए राहुल