" /> दगाबाज दोस्त!, लालच में उतारा था मौत के घाट

दगाबाज दोस्त!, लालच में उतारा था मौत के घाट

पिछले दिनों कल्याण रेलवे पुलिस थाने में डकैती का एक मामला दर्ज हुआ था। उक्त मामले की जांच रेलवे क्राइम ब्रांच की टीम कर रही थी। रेलवे क्राइम ब्रांच की टीम गुप्त सूचना के आधार पर तथाकथित डवैâती मामले में वांछित आरोपी के लिए १० दिनों से नई मुंबई में जाल बिछा रही थी। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक उत्तम सोनावने के मार्गदर्शन में प्रयास कर रही रेलवे क्राइम ब्रांच की टीम को बड़ी सफलता मिल गई। बीते मंगलवार को रेलवे क्राइम ब्रांच ने साजिद उर्फ मोइन अहमद कादरी नामक आरोपी को हिरासत में लिया तो पूछताछ में २१ साल पुराना हत्या का राजफाश हो गया।
दोस्त का किया था कत्ल
साजिद ने सोनावने की टीम को बताया कि उसने वर्ष १९९९ में उच्च शिक्षा के लिए पटना से मुंबई आए छात्र अमित कुमार मुनेश्वर की हत्या की थी। अमित, जुहू में रहता था। एक-दो मुलाकातों के बाद साजिद और अमित अच्छे दोस्त बन गए। बाद में दोनों अक्सर मौज-मस्ती के सिलसिले में पार्टी आदि में जाने लगे। अमित का रहन-सहन देखकर साजिद ने अनुमान लगा लिया कि वह काफी अमीर होगा। इसी से साजिद ने अमित को अगवा करके उसके परिजनों से मोटी फिरौती की योजना बनाई थी।
भ्रम टूटा तो मार डाला
९ अप्रैल, १९९९ को साजिद ने अमित को अगवा कर लिया। अमित के परिजनों को काफी रईस समझकर साजिद ने फोन पर ७० लाख रुपए फिरौती के रूप में उनसे मांगे। साजिद ने अमित के पिता को अपना नाम अब्बास बताया था। बेटे के अपहरण की बात सुनकर अमित के पिता के पैरों तले से मानों जमीन ही खिसक गई थी। उन्होंने पैसों का इंतजाम करने का आश्वासन देकर बेटे की जान बख्शने की विनती साजिद से की थी। चार दिन के बाद अमित के परिजन मुंबई पहुंचे। उसके पिता ने अब्बास (साजिद) को बताया कि उसके पास पूरे पैसे नहीं हैं और फिलहाल वे सिर्फ साढ़े ४ लाख रुपयों का ही इंतजाम कर पाए हैं। अमित के पिता ने और मोहलत मांगी तो साजिद डर गया। उसे संदेह हुआ कि कहीं अमित के पिता पुलिस में शिकायत करके उसके खिलाफ जाल तो नहीं बिछा रहे हैं? अगले दिन साजिद मोटर साइकिल से अमित को वसई ले गया। वहां उसने रॉड से अमित के सिर पर प्रहार करके उसका कत्ल कर दिया। बाद में लाश को वसई खाड़ी में फेंक दिया था।
अमित के पिता ने सांताक्रुज-पुलिस थाने में घटना की शिकायत दर्ज कराई। इस मामले की समानांतर जांच मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की यूनिट- ९ को सौंपी गई थी लेकिन साजिद पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल हुआ। यूनिट-९ की तत्कालीन टीम साजिद की तलाश में उसके गांव श्रीवर्धन तक भी जाकर आई थी।
दो साल तक यूपी में रहा हत्यारा
अमित कुमार मुनेश्वर की हत्या के बाद साजिद यूपी भाग गया था और वहां वह लगभग २ साल तक छिपा रहा। बाद में वह रत्नागिरी आ गया और वहां नाम बदल कर रहने लगा था। वर्ष २०१३ में साजिद ने स्वप्नील मोरे की हत्या कर दी। उस मामले में करीब सालभर जेल में रहने के बाद वह जमानत पर छूटा था। खुशनसीबी से वह वर्ष २०१६ में स्वप्नील मोरे की हत्या मामले में निर्दोष छूट गया था लेकिन वह अपनी आदतों से बाज नहीं आया। कल्याण रेलवे डवैâती मामले में उसका नाम शामिल होने से रेलवे क्राइम ब्रांच ने जब उसे दबोचा तो २१ साल पुरानी अपहरण और हत्या मामले की गुत्थी भी सुलझ गई। रेलवे क्राइम ब्रांच ने साजिद को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की यूनिट-९ को सौंप दिया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश देसाई के मार्गदर्शन में यूनिट-९ की टीम आगे की जांच कर रही है।