दर्दे-ए-दिल दूर करेगा ओसीटी, स्टेंट और सर्जरी की जरूरत नहीं

बदलती जीवनशैली के कारण लोगों में हृदय रोग का प्रमाण बढ़ता जा रहा है। बूढ़े तो बूढ़े, युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है लेकिन क्या हर दर्दे दिल को स्टेंट और बायपास सर्जरी की जरूरत होती है? चेंबूर के सुराणा अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विटी शाह की मानें तो अस्पताल में मौजूद ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) नामक जांच तकनीक डॉक्टरों को यह निर्णय लेने में मदद करती है कि मरीज को स्टेंट या बायपास सर्जरी की जरूरत है या नहीं?

बता दें कि रोजाना मुंबई में कई ऐसे मरीज हैं जिनकी जान बचाने के लिए बायपास या फिर एंजियोप्लास्टी करनी पड़ती है। हृदय तक खून की आपूर्ति करनेवाली धमनियों में ब्लॉक है या क्लॉट (थक्का) इसका पता लगाने में एंजियोग्राफी तकनीक की मदद ली जाती है लेकिन यह तकनीक केवल ब्लैक एंड ह्वाइट पिक्चर दर्शाती है जैसे परछाई। उक्त जांच पद्धति से यह साफ नहीं हो पाता है कि धमनियों में ब्लॉक है या क्लॉट, नतीजतन डॉक्टरों को या तो स्टेंट डालना पड़ता है या फिर बायपास सर्जरी करनी पड़ती है। ऐसे में एक बार सर्जरी होने के बाद मरीज को जीवनभर काफी एहतियात बरतनी पड़ती है। डॉ. विटी शाह ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया कि ओसीटी एक ऐसा जांच उपकरण है जिससे धमनियों में ब्लॉक है या क्लॉट इसकी स्पष्ट जानकारी मिलती है। हमारे पास ऐसे कई युवा आए, जिन्हें हार्ट अटैक आया था लेकिन जांच में यह पाया गया कि धमनियों में थक्का है और ब्लड थिनर की मदद से ही वह ठीक हो सकता है। मरीज को न ही स्टेंट लगाया और न ही बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ी। कुछ महीने बाद दवाओं की मदद से थक्का भी निकल गया। मरीज एक बार फिर सामान्य जिंदगी जी रहा है। इस जांच की कीमत ८० हजार रुपए के करीब है लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज सर्जरी और अन्य प्रकार की पीड़ा से बच सकते हैं।