दर्द की वजह न बन जाए दर्द निवारक गोलियां

बीमार व्यक्ति और उसके परिवार पर सबसे बड़ा बोझ इलाज का होता है। महंगे टेस्ट व महंगी दवाइयां मरीज व उनके अभिभावकों की कमर तोड़ देती हैं। ऐसे में बिना सोचे-समझे दवाइयों का सेवन कोढ़ में खाज की तरह आपकी परेशानी बढ़ा सकता है इसलिए दवाइयों का सेवन हमेशा
डॉक्टर से परामर्श के बाद ही करना चाहिए, अन्यथा दवाइयां आपके लिए जहर भी बन सकती हैं। खास कर दर्द निवारक दवाइयां यानी कि पेन किलर। इन गोलियों के सेवन से होनेवाले विपरीत परिणामों को जाने बगैर इनका सेवन करने से कई बार ये दवाएं दर्द दायक भी साबित हो सकती हैं। ये गोलियां दिल, किडनी की समस्या से लेकर अल्सर तक की समस्या तक पैदा कर सकती हैं।
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में खुद के लिए वक्त निकालना बहुत ही मुश्किल होता है। जिंदगी की भाग-दौड़ में कई बार हमें हरारत महसूस होती है। शरीर के किसी खास हिस्से में दर्द की शिकायत होती है, ऐसे मामलों को हम गंभीरता से नहीं लेते हैं। हम दर्द से लड़ने के लिए न तो अपनी एनर्जी लगाना चाहते हैं और न ही समय इसलिए तुरंत याद आती है पेन किलर यानी दर्द निवारक दवाओं की। किसी दर्द निवारक दवा की एक गोली ले लेना सबसे आसान विकल्प लगता है और फिर पास के किसी मेडिकल स्टोर से या अतीत में खुद को या किसी अपने को ऐसी ही तकलीफ के समय डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा को हम इस बार भी अपने लिए सही मान लेते हैं और उन दर्द निवारक दवाओं का सेवन शुरू कर देते हैं। प्राय: ये नुस्खा काम कर जाता है लेकिन कभी-कभी दांव उल्टा पड़ यह जानलेवा भी सिद्ध होता है। सामान्य दर्द निवारक दवाओं के साइड इफेक्ट्स अनुमान से कहीं अधिक घातक हो सकते हैं। ये दवाएं अल्सर का कारण बनती हैं, रक्तचाप बढ़ाती हैं। हृदय रोगी को ये दवाएं लेते वक्त विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। यूरोप के १४ देशों की यूनिवर्सिटी और अस्पतालों ने इस बारे में संयुक्त रूप से शोध किया है।
मांसपेशी में खिंचाव से लेकर चोट के दर्द व सूजन को दूर करने व अन्य कई रोगों के लिए आजकल नॉन स्टेरॉयड एंटी इनफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) धड़ल्ले से दी जा रही हैं। ये एंटीबायोटिक नहीं होतीं जिस कारण बैक्टीरिया से होनेवाले संक्रमण को ठीक नहीं कर सकतीं। मरीजों को बुखार में भी ये दवाएं लिख दी जाती हैं। बाजार में विभिन्न तरह के दर्द, जैसे शरीर दर्द, सिर दर्द, पेट दर्द आदि के लिए तरह-तरह की दर्द निवारक गालियां मौजूद हैं। अलग-अलग तरह की दवाएं शरीर के विभिन्न दर्द के लिए काम करती हैं और कुछ ही मिनटों में दर्द से मुक्ति दिला देती हैं। इस वजह से हम थोड़े दर्द में भी तुरंत एक पेन किलर मुंह में डाल लेते हैं लेकिन इसके तात्कालिक फायदे के सामने दीर्घकालिक बड़े नुकसान के बारे में भी नहीं सोचते। इसका सबसे बड़ा नुकसान तो यही होता है कि आपका शरीर कमजोर होता जाता है और कुछ समय बाद छोटा दर्द भी सहने की क्षमता नहीं रह जाती है और फिर पेन किलर का सहारा लेना पड़ता है। पेन किलर ऐसी दवाइयां होती हैं, जिनका इस्तेमाल खास स्थिति जैसे माइग्रेन, आर्थराइटिस, पीठ दर्द, कमर दर्द, कंधे में दर्द आदि से अस्थायी तौर पर छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। पेन किलर एडिक्शन तब होता है, जब पेन किलर लेनेवाला शारीरिक तौर पर उनका आदी हो जाए। हम यह भी भूल जाते हैं कि अन्य एडिक्शन की तरह इसके भी साइड इफेक्ट्स समान ही होते हैं। कई बार दर्द न होने पर भी पेन किलर खाने लगते हैं। इन्हें खानेवालों को तो लंबे समय तक पता ही नहीं चलता है कि वे इस एडिक्शन के शिकार हो गए हैं। उनका मनोवैज्ञानिक स्तर अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस एडिक्शन से बाहर आने के लिए डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है।
अगर आप पेन किलर लेने के आदी हैं और आपको अत्यधिक सुस्ती या अत्यधिक नींद आती है तो समझ जाएं कि यह पेन किलर का असर है। दरअसल, यह पेन किलर के कुछ प्रमुख साइड इफेक्ट्स में से एक है। पेन किलर खानेवालों में कब्ज की शिकायत अक्सर देखी गई है। पेट में दर्द, चक्कर आना, डायरिया, उल्टी आदि आम बात बन जाती है। इसके अतिरिक्त भारीपन-सा महसूस होने के कारण सिर और पेट में दर्द रहने लगता है। ऐसे व्यक्ति में थकावट महसूस होना भी आम बात हो जाती है। ऐसे मरीजों में हार्ट बीट व बल्ड प्रेशर में तेजी से उतार-चढ़ाव भी देखा गया है। कई और जटिलजाएं इससे पैदा हो सकती हैं, जो बढ़ती ही चली जाती हैं। हल्का-सा दर्द होते ही पेन किलर का सहारा न लें। लगातार दर्द बना रहता है तो खूब पानी पिएं या तरल पदार्थों की मात्र बढ़ा दें। खाने में फाइबर भी भरपूर मात्र में लें। हरी सब्जियां, फल व दालें खाएं, ताकि आपका स्वास्थ्य ठीक रहे और आप फिट बने रहें। नियमित रूप से व्यायाम करें। कुछ समय में अपने आप ठीक न होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।
पेन किलर हल्के दर्द में तो राहत दे सकती है लेकिन इसका लगातार सेवन बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है। इन दवाओं के सेवन से किडनी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। कुछ में अल्सर की समस्या होती है और किसी के पेट में ब्लीडिंग की समस्या भी रहती है। ऐसा मरीज खासतौर पर एनएसएआईडी (नॉन स्टीरॉयड एंटी एंफ्लेमेटरी ड्रग) ग्रुप की दवाइयां लंबे समय से ले रहा होता है। अगर इनमें से कोई भी समस्या हो तो पेन किलर लेना तत्काल बंद कर देना चाहिए। पैरासिटामोल जैसी सुरक्षित दवाइयां बिना डॉक्टर की सलाह के ली जा सकती हैं, पर बहुत जरूरी होने पर और कुछ समय के लिए। यही नहीं, अक्सर महिलाएं पीरियड्स के दिनों में दर्द से बचने के लिए पेन किलर ले लेती हैं। हालांकि इससे राहत महसूस होती है, पर इसका अधिक मात्र में सेवन करने से एसिडिटी, गैसट्राइटिस, पेट में अल्सर आदि की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दर्द कम करने के लिए अगर पेन किलर ले रहे हों तो यह भी याद रखें कि इससे दर्द बढ़ भी सकता है।
समय पर दवाई नहीं ले पाना एक आम समस्या है, अक्सर आपने परिजनों को भी यह कहते सुना होगा कि आज मैं दवाई लेना भूल गया या भूल गई। कुछ लोग तो दवाई भूलने के बाद अपने परिजनों और डॉक्टर से झूठ बोल देते हैं कि उन्होंने समय पर दवाई ली है लेकिन हर बात पर दवाइयां लेने वाले लोगों को भी सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि अधिक पेनकिलर लेने से उनकी जान खतरे में भी पड़ सकती है तो इस सन्डे हम यही संकल्प लेंगे कि हम अपने शरीर को दवाइयों का आदी नहीं बनने देंगे। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेंगे और अपने परिजनों को भी इस बारे में जागरूक बनाएंगे।