मनपा की मुहिम! दर-दर टीबी पर नजर

मुंबई जैसे घनी आबादीवाले शहर में संक्रामक रोग पैâलने का खतरा हमेशा बना रहता है। लोगों को कई बार पता ही नहीं चलता कि उनके शरीर में रोग पनप रहा है। इन्हीं रोगों में से एक रोग है टीबी, जो हर वर्ष हजारों लोगों को अपनी चपेट में लेता है। लोग इस बीमारी से अनजान रहते हैं और जब तक इसके लक्षण समझ पाते हैं तब तक मामला बिगड़ चुका होता है। घनी आबादी, अस्वच्छता, निम्न रहन-सहन और जगह के अभाव के चलते यह बीमारी मुंबई जैसे शहर में विकराल रूप ले रही है। इस बीमारी की रोकथाम, उपचार और मरीजों के लिए मनपा टीबी नियंत्रण कक्ष निरंतर परिश्रम कर रहा है। इसी कड़ी में मनपा ने एक बार फिर दरवाजा खटखटाने और लोगों में टीबी है कि नहीं इसका पता लगाने का संकल्प लिया है इसलिए अब मनपा घर-घर जाकर टीबी मरीजों का पता लगाएगी।
७ लाख लोगों तक पहुंचेंगे
टीबी नियंत्रण कक्ष की प्रमुख डॉ. दक्षा शाह ने बताया कि इस बार उनकी टीबी टीम ७ लाख मुंबईकरों तक पहुंचेगी। यानी १.६ लाख घरों में टीम दस्तक देगी। सबसे अधिक टीबी के मामले गोवंडी से आते हैं इसलिए इस बार गोवंडी, चेंबूर, दादर, कुर्ला, बांद्रा, अंधेरी, मालाड आदि इलाकों के स्लम में टीबी टीम टीबी से ग्रसित मरीजों को ढूंढ़ेगी।
१२ दिन चलेगी मुहिम
१२ से २४ नवंबर टीबी नियंत्रण विभाग की २९७ टीम शहर के कई इलाकों में ‘टीबी मरीज खोजो मुहिम’ शुरू करेगी। यह टीम घरों में जाकर लोगों से पूछताछ करेगी यदि किसी भी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखते हैं तो उसे एक्स-रे का शुल्क वाउचर और थूक की जांच के लिए एक डिब्बी मुफ्त दी जाएगी। इतना ही नहीं उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के बारे में जानकारी दी जाएगी, जहां वे वाउचर दिखाकर अपनी जांच करा सकते हैं।
मुंबईकर करें सहयोग
टीबी एक संक्रामक रोग है। इस रोग में ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टेरिया शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर हावी हो जाती हैं। यह रोग घातक है लेकिन लाइलाज नहीं। यदि सही समय पर उपचार नहीं मिले तो यह एमडीआर टीबी और उसके बाद एक्सडीआर टीबी का रूप ले लेती है जो जानलेवा है। मनपा स्वास्थ्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पद्माजा केसकर ने लोगों से अपील की है कि वे इस मुहिम के दौरान टीबी टीम का सहयोग करें और स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी समस्या को छुपाए नहीं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
मुंबई में सालाना औसतन ३० से ३५ हजार टीबी मरीज मिलते हैं। इसमें निजी और सरकारी अस्पताल में आनेवाले मरीजों का समावेश है। हर वर्ष औसतन ५ हजार मरीज एमडीआर टीबी की चपेट में आते हैं और लगभग ५०० मरीज एक्सडीआर से ग्रसित होते हैं। गौरतलब है कि पिछली बार चलाई गई मुहिम में ७ लाख ८८ हजार लोगों में से १२५ में टीबी की पुष्टि हुई थी।