दवा के दान से मत बचाओ जान, खुद की बनाओ, टीवी के मरीजों को बचाओ

एक ओर सरकार टीबी के निर्मूलन के लिए योजनाओं पर योजनाएं बना रही है लेकिन दूसरी ओर दवा प्रतिरोधक क्षमता यानी एमडीआर टीबी से ग्रसित रोगियों को ठीक करने के लिए दान की दवाइयों पर निर्भर है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करनेवाले, टीबी कार्यकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि वे बेडाकुलिन बनानेवाली कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन से दान में दवाई न लें बल्कि खुद दवाइयां बनाएं और मरीज की जान बचाएं।
बता दें कि एक सर्वे में यह पाया गया कि देश में १.२५ लाख लोग एमडीआर टीबी से ग्रसित होते हैं। ऐसे में टीबी मरीजों के लिए जॉनसन एंड जॉनसन ने २०१६ में १० हजार दवाइयां हिंदुस्थान सरकार को दान के रूप में दी थीं। टीबी एक्टिविस्ट व सर्वाइवर गणेश आचार्य ने बताया कि ये दवा सभी मरीजों को मिलनी चाहिए थी लेकिन २०१८ तक सिर्फ १६०० रोगियों तक ही ये दवा पहुंच पाई। हिंदुस्थान सरकार पेटेंट कानून के तहत कंपनी को रॉयल्टी देकर खुद दवा निर्मित कर सकती है लेकिन दान की दवाइयों पर निर्भर रहने से सभी मरीजों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं। दूसरी ओर बाजार में सिर्फ एक ही कंपनी का एकाधिपत्य बना हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा बनाए गए निम्न गुणवत्ता के हिप रिप्लेसमेंट के बाद उन पर कई मामले दर्ज हुए हैं ऐसे में सरकार कार्रवाई में नरमी बरते इसलिए वे यह दवाइयां दान के रूप में दे रहे हैं। टीबी कार्यकर्ता गणेश ने कहा कि सरकार को दान की दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय खुद दवाइयां निर्मित करनी चाहिए। यही मांग पत्र द्वारा लगभग २० से भी अधिक सामाजिक संस्थाओं, टीबी कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों ने की हैं।