दसवें घर में मंगल, जातक को बना देता है कुल दीपक

गुरुजी, मेरी शादी तय नहीं हो रही है। उपाय बताएं?
-सोनाक्षी राठौर
(जन्म- १६ सितंबर, १९९२ दिन में ४.५० बजे, बीना-मध्य प्रदेश)
सोनाक्षीजी, आपका जन्म मकर लग्न में एवं मेष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली में लग्न में ही शनि स्वगृही हो करके बैठा है अत: आप स्वाभिमानी प्रकृति के हैं तथा आपका जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ है। भरणी नक्षत्र में ही राहु ग्रह का जन्म माना जाता है अत: आप समय-समय पर कनफ्यूज भी हो जाती होंगी, सही निर्णय नहीं ले पाती हैं। जीवनसाथी चयन करने में यही भरणी नक्षत्र में जन्म बाधक है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। इस समय चंद्रमा की महादशा चल रही है। चंद्रमा सप्तम भाव का स्वामी है जो कि आपके कार्य को अनुकूलता नहीं प्रदान करता है इसलिए भरणी नक्षत्र की वैदिक विधि से शांति कराएं, अनुकूल जीवनसाथी प्राप्त होगा। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं। धीरे-धीरे समय अनुकूल हो जाएगा।
गुरुजी, मेरा विवाह लव मैरिज होगा या अरेंज। किस तरह विशेष लाभ प्राप्त होगा बताएं। क्या करूं?
-राहुल जायसवाल
(जन्म- १७ फरवरी, १९९१ दिन में १०.१५ बजे, सासाराम- बिहार)
राहुलजी, आपका जन्म मेष लग्न एवं मीन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। पंचम भाव का स्वामी सूर्य लाभ भाव में सप्तमेश शुक्र के साथ में बैठा है और पिता स्थान का स्वामी शनि स्वगृही हो कर दशम भाव में बैठा है। इस प्रकार के ग्रहों के योग के कारण आप माता-पिता के आदेशों का पालन करते हुए जीवनसाथी का निर्णय करेंगे तो आपके जीवन के विकास के मार्ग भी प्रशस्त हो जाएंगे। विकास में आनेवाली अड़चनें दूर करने के लिए कालसर्प योग की पूजा जरूर कराएं और जीवन की और अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
मैं बहुत ही परेशान हूं। अभी शादी नहीं हुई है। कोई उपाय बताएं?
-विकास श्रीवास्तव
(जन्म- १३ फरवरी, १९८८ समय रात्रि ११.०५ बजे, मरोल नाका, मुंबई)
विकासजी, आपका जन्म तुला एवं धनु राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। पंचम भाव का स्वामी शनि है और इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़े साती भी चल रही है तथा सप्तम भाव का स्वामी मंगल जो २ अंश का होकर सप्तम भाव को कमजोर कर दिया है एवं भाग्येश बुध अस्त है। शनि संबंध बनाने में अड़चन जरूर पैदा करता है अत: शनि मंत्र का जप वैदिक विधि से करना आपके लिए आवश्यक है। यदि ऐसा करते हैं तो अनुकूल जीवनसाथी प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, रत्न धारण करना चाहता हूं। राशि के आधार पर बताएं कौन रत्न धारण करूं? -राजकुमार यादव
(जन्म- ३० मार्च, १९८४ प्रात: ६.३९ बजे, मालाड, मुंबई)
राजकुमारजी, आपका जन्म मीन लग्न एवं कुंभ राशि में हुआ है। लग्न के आधार पर तो आपकी राशि तुला है। तुला राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र राशि का रत्न आपको हानि पहुंचाएगा। आपकी कुंडली में भाग्येश मंगल है एवं पंचमेश चंद्रमा है अत: आप मोती एवं मूंगा धारण करें तथा पराक्रम भाव पर राहु एवं भाग्य भाव पर केतु बैठ करके आपकी कुंडली में भाग्य ग्रहण दोष बना रहा है। रत्न धारण करने से ही विकास संभव नहीं है। भाग्य ग्रहण दोष की पूजा वैदिक विधि से कराएं तभी परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त कर पाएंगे। जीवन की अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाना आवश्यक है।
मेरी राशि क्या है और समय कैसा चल रहा है?
-रमेश कुमार
(जन्म- २० दिसंबर, १९९० रात्रि ९.४० बजे, भभुआ कैमूर, बिहार)
रमेश कुमारजी, आपका जन्म सिंह लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। लग्नेश सूर्य त्रिकोण में बैठकर आपको बुद्धिमान तो बना रहा है तथा भाग्येश एवं सुखेश-मंगल दशम भाव में बैठकर आपको भाग्यशाली बना रहा है अर्थात दसवें घर में यदि मंगल बैठता है तो जातक कुल का दीपक होता है लेकिन सप्तमेश एवं रोगेश शनि के साथ राहु एवं चंद्र बैठकर आपके स्वास्थ्य को समय-समय पर कमजोर बना देता है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया तो आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी व्याप्त है। इस कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त नहीं कर पाते होंगे। पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उक्त पूजन वैदिक विधि से करना आवश्यक है। जीवन की गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।