दही हंडी ठंडी-ठंडी!

इस बार मुंबई में दही हंडी काफी ठंडी रही। राजनेताओं द्वारा आयोजन न करने के पैâसले के बाद मुंबई में तो दही हंडी उत्सव काफी फीका रहा। भले ही आयोजकों ने हाथ पीछे खींच लिए हों लेकिन गोविंदा पथकों ने उत्सव की परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य किया। कई पथक ठाणे में आयोजित हुए दही हंडी में बड़ी संख्या में शामिल हुए और गोविंदाओं ने थर पे थर लगाकर लोगों के मन मोह लिए।
बता दें कि इस बार दही हंडी में १,१६१ पथकों के ५७ हजार ५७५ गोविंदाओं ने उत्सव मनाया। वैसे तो आयोजक कम होने के चलते गोविंदाओं में काफी नाराजगी थी क्योंकि वे इस पर्व के लिए सालभर से मेहनत करते आ रहे हैं। इस बार ‘दही हंडी समन्वय समिति’ कई आयोजकों से निवेदन किया कि वे भले ही जीत की राशि कम रखें लेकिन आयोजन रद्द न करें। कुछ आयोजक माने तो कुछ ने कन्नी काट ली। इसके बावजूद गोविंदाओं ने उत्सव की परंपरा बनाए रखी। ठाणे में अपने-अपने मंडलों की टी-शर्ट पहनकर जोश व उत्साह के साथ थर लगाते और सलामी देते हुए गोविंदा नजर आए। नई मुंबई में दही हंडी का माहौल ठंडा रहा।

दर्जनों हुए घायल
उत्सव के दौरान ऊंची-ऊंची थर लगाते वक्त कई बार बैलेंस बिगड़ जाता है, जिसके चलते गोविंदाओं को चोट लगती है। इस बार भी खबर लिखे जाने तक दर्जनों गोविंदा घायल हुए। मनपा के अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार शाम ७ बजे तक नायर अस्पताल में ६, केईएम में १२, सायन में ४, जेजे में १, गोवंडी शताब्दी में १, एमटी अग्रवाल में १, राजावाड़ी में १०, कूपर में ४, जोगेश्वरी ट्रॉमा केयर में ३, वीएन देसाई में १, कांदिवली शताब्दी में ६ जख्मी गोविंदाओं को भर्ती किया गया। कुल ५१ में से २७ गोविंदाओं का इलाज कर छोड़ दिया गया जबकि शेष बचे गोविंदाओं का उपचार जारी था। ठाणे में भी खबर लिखे जाने तक १४ गोविंदाओं के जख्मी होने की पुष्टि हुई थी।