दाऊद को लाने के लिए क्या किया?, मानवाधिकार आयोग पहुंचा ९३ बम धमाके का पीड़ित

१९९३ में मुंबई में हुए शृंखलाबद्ध बम धमाकों में घायल हुए एक पीड़ित को २६ साल बाद भी मुआवजा नहीं मिला है। अपनी व्यथा लेकर पीड़ित ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में पीड़ित ने यह भी मांग की है कि सुरक्षा एजेंसियों ने दाऊद को लाने के लिए क्या कदम उठाए हैं? इसकी भी जांच की जाए।
१२ मार्च १९९३ का दिन कीर्ति अजमेरा के लिए संघर्ष की शुरुआत का दिन साबित हुआ। मुंबई में हुए शृंखलाबद्ध बम धमाके में घायल कीर्ति के लिए पहले मौत से लड़ने की जंग थी जिसके लिए अब तक ४० शल्य क्रियाएं करा चुके हैं इस पर अब तक ४५ लाख रुपए खर्च कर चुके हैं। बतौर कीर्ति अजमेरा उन्हें इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी सरकार से मुआवजा नहीं मिला है। इस घटना के २६ साल बीतने के बाद अब कीर्ति अपनी लड़ाई को लेकर मानवाधिकार आयोग के पास पहुंच गए हैं। कीर्ति के वकील उत्सव सिंह बेंस ने बताया कि उनके मुवक्किल ने मानवाधिकार आयोग से राज्य और केंद्र सरकार से मुआवजे दिलवाने के अलावा यह भी मांग की है कि इन सरकारों से यह भी पूछा जाए कि बम धमाके के पीड़ितों के लिए उन्होंने अब तक क्या किया है? इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों ने इस बम धमाके के सूत्रधार अंतरराष्ट्रीय आतंकी दाऊद इब्राहिम को हिंदुस्थान लाने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं? बेंस ने बताया कि इस याचिका पर जल्द ही आयोग सुनवाई करेगा।
२६ साल से है मुआवजे की आस
४५ लाख रुपए हो चुके हैं इलाज पर खर्च
४० बार हो चुका है ऑपरेशन