दिग्गजों-बाहुबलियों की रस्साकशी, बिहार चुनावों का चतुर्थ चरण, लोकसभा चुनावों के चौथे चरण में बिहार की पांच सीटों पर मत पड़ने हैं।

जिसमें दरभंगा, उजियापुर, बेगूसराय, समस्तीपुर और मुंगेर लोकसभा सीट शामिल हैं। इन पांच सीटों में से तीन सीट पर भाजपा और दो पर लोक जनशक्ति पार्टी का कब्जा है ऐसे में भाजपा पर अब अपने गढ़ को बचाए रखने की चुनौती है। जबकि दूसरी तरफ दिग्गज नेताओं और बाहुबलियों के कारण यह चरण काफी रोचक है।
बिहार में तीन चरणों में १४ लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो चुकी है। जबकि २९ अप्रैल को चौथे चरण में ५ सीटों पर वोट डाले जाएंगे। २०१४ के चुनाव में पांच सीटों में से तीन सीटें जिसमें दरभंगा, उजियारपुर, बेगूसराय पर भाजपा ने जीत हासिल की थी जबकि समस्तीपुर और मुंगेर में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के उम्मीदवार जीते थे।इन पांच सीटों पर ६६ उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। २०१४ में इन पांचों सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार जीते थे लेकिन इस बार महागठबंधन के कारण मुकाबला कड़ा हो सकता है।
चतुर्थ चरण भाजपा के गिरिराज सिंह, नित्यानंद राय, रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा, जेडीयू के ललन सिंह, सीपीआई के कन्हैया कुमार, आरजेडी के अब्दुल बारी सिद्दीकी और एलजेपी के रामचंद्र पासवान जैसे दिग्गज नेताओं की किस्मत का फैसला करेगा। बता दें कि, इस बार दिग्गजों के अलावा कई सीटों पर बाहुबलियों के दम की भी परीक्षा है। जानते हैं किस सीट का क्या है समीकरण?
 दरभंगा – जीत दिलाएगा बीएमवाई
मिथिला संस्कृति का केंद्र दरभंगा में इस बार मुकाबला महागठबंधन की ओर से आरजेडी के दिग्गज अब्दुल बारी सिद्दीकी और बीजेपी प्रत्याशी गोपालजी ठाकुर के बीच है। आरजेडी के अब्दुल बारी सिद्दीकी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। जबकि लोकसभा के लिए पहली बार उतरे हैं। उन्हें महागठबंधन के साथी दलों कांग्रेस, वीआईपी पार्टी, रालोसपा और हम के समर्थन का फायदा हो सकता है। लेकिन उन्हें आरजेडी के नेता और पूर्व सांसद अली अशरफ फातमी के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। जो अब निर्दलीय मैदान में हैं। दूसरी ओर पूर्व विधायक गोपालजी ठाकुर को उतारकर बीजेपी इस सीट पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। २०१४ में यहां से भाजपा के कीर्ति आजाद ने अली अशरफ फातमी को हराया था।
दरभंगा सीट पर ब्राह्मण, यादव और मुस्लिमों का वर्चस्व माना जाता है। इसलिए इस सीट पर बीएमवाई (ब्राम्हण, मुस्लिम और यादव) का साथ जीत का निर्णय करेंगे।
दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के तहत ६ विधानसभा सीटें आती हैं- गौरा बौरम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा और बहादुरपुर। २०१५ के विधानसभा चुनाव में इनमें से ३ सीट आरजेडी, २ जेडीयू और एक सीट बीजेपी ने जीती।
 उजियारपुर – कांटे की टक्कर
उजियारपुर सीट पर इस बार दो दिग्गजों के बीच मुकाबला है। यहां से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नित्यानंद राय और रालोसपा के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा मैदान में हैं। उपेंद्र कुशवाहा इसके अलावा काराकाट सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। सीपीएम के अजय राय भी यहां से मैदान में हैं।
उजियारपुर से २०१४ में बीजेपी के नित्यानंद राय ने आरजेडी के आलोक कुमार मेहता को ६० हजार वोटों से हराया था। जेडीयू की अश्वमेघ देवी तीसरे स्थान पर रही थीं। नित्यानंद राय को इस बार जेडीयू के समर्थन का फायदा हो सकता है। इस इलाके में कुशवाहा वोटों के साथ-साथ यादव वोटों की ताकत अच्छी खासी है।
 समस्तीपुर – सीट सुरक्षित रखने की चुनौती
समस्तीपुर से एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान फिर मैदान में हैं। २०१४ में भी वे ही यहां से जीते थे। कांग्रेस ने रामचंद्र पासवान को चुनौती देने के लिए फिर से अशोक राम को उतारा है। १९७२ में दरभंगा से अलग होकर इस संसदीय क्षेत्र का निर्माण हुआ था। इस संसदीय क्षेत्र का बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से खास नाता रहा है। वे १९७७ में जनता पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव जीते थे।
 बेगूसराय – त्रिकोणीय मुकाबला
बेगूसराय लोकसभा सीट का चुनाव इस बार देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां से बीजेपी ने गिरिराज सिंह को, महागठबंधन ने तनवीर हसन को और सीपीआई ने कन्हैया कुमार को उतारा है। इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। गिरिराज सिंह नवादा की जगह इस बार बेगूसराय से चुनाव मैदान में हैं तो कन्हैया यहां से सियासी डेब्यू कर रहे हैं। दोनों ही भूमिहार जाति से आते हैं। इस सीट पर भूमिहार, यादव और मुसलमान मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है। २०१४ के आम चुनाव में बीजेपी के भोला सिंह इस सीट से विजयी रहे थे उन्होंने तनवीर हसन को ५८,००० वोटों से हराया था।
 मुंगेर – मैदान में बाहुबलियों का दम
मुंगेर लोकसभा सीट इस बार बाहुबलियों के कारण चर्चा में है। यहां से बाहुबली नेता अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और जेडीयू के ललन सिंह के बीच मुकाबला हो रहा है। मुंगेर लोकसभा सीट से १९ प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी महागठबंधन के टिकट पर लड़ रही हैं। वहीं एनडीए ने जेडीयू के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को उतारा है। वे बिहार सरकार में मंत्री हैं। ललन सिंह को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। अनंत सिंह के खेमे की घेरेबंदी के लिए उन्होंने विवेक पहलवान और बाहुबली सूरजभान के चचेरे भाई को अपने पाले में किया है। २०१४ में यहां से बाहुबली सूरजभान की पत्नी वीणा देवी एलजेपी के टिकट पर जीती थीं। वीणा देवी ने ललन सिंह को १,०९,०६४ वोटों से शिकस्त दी थी।