दिल्ली दूर है…

सपने का क्या है, कोई भी देख सकता है। २०१४ लोकसभा चुनाव में यूपी में शून्य का स्कोर बनानेवाली बसपा प्रमुख मायावती के लिए २०१९ एक सपना लेकर आया है। यह सपना है प्रधानमंत्री पद का। मायावती के लिए पीएम बनना बहुत दूर की कौड़ी कही जा सकती है। पर अतीत में कुछ लोगों को पीएम की लॉटरी भी तो लगी है। चौधरी चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर, इंद्र कुमार गुजराल और एचडी देवेगौड़ा कौन-सा बहुमत लेकर आए थे? उनके पास काफी कम सांसद थे, यही उनकी खासियत बन गई थी। सो अगर मायावती को २०-२५ सीटें मिल जाती हैं तो वह भी प्रधानमंत्री बन सकती हैं। हालांकि किसी ने उन्हें ऐसा प्रपोजल दिया नहीं पर एक चुनावी सभा में उनकी यह इच्छा जुबां पर आ ही गई थी। उधर से यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी का भी मायावती को आशीर्वाद मिलने की खबरें आर्इं। क्योंकि अगर कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा तो सोनिया कभी नहीं चाहेंगी कि उनका पुत्र एक पूरी तरह बैसाखी वाली सरकार का पीएम बने। इसलिए उन्होंने चुपके से माया के नाम पर मूक सहमति दे दी। अखिलेश की बजाय मायावती को सोनिया अपने करीब ज्यादा महसूस करती हैं। मगर आश्चर्य है कि चुनाव के बाद अभी तक मायावती ने सोनिया से मुलाकात नहीं की है। वे अपने घर में ही दुबकी हुई हैं। हां, चंद्राबाबू से जरूर वे मिलीं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि शायद कहीं उधर लॉटरी लग जाए। सतीश मिश्रा के साथ मायावती बराबर सलाह-मशविरा कर रही हैं कि अगला कदम क्या होना चाहिए? वैसे राजनीतिक पंडितों की बातों पर भरोसा किया जाए तो जो हालात हैं, उसमें मायावती के प्रधानमंत्री बनने के चांस काफी कम हैं और यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि मायावती के लिए दिल्ली अभी दूर है।