" /> दिल्ली में एनपीआर-एनआरसी लागू नहीं करने के फैसले का शुरू हुआ विरोध

दिल्ली में एनपीआर-एनआरसी लागू नहीं करने के फैसले का शुरू हुआ विरोध

-विधानसभा में प्रस्ताव हुआ पारित
-प्रस्ताव के विरोध में भाजपा विधायकों का हंगामा

चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल सरकार का पहला विधानसभा सत्र शुरू हुआ। पहले ही सत्र में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेकर केंद्र सरकार से भविष्य में होने वाले टकराव के संकेत दे दिए हैं। केजरीवाल सरकार ने राजधानी दिल्ली में एनपीआर-एनआरसी लागू नहीं करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर दिया है, जिसका भाजपा विधायकों ने सत्र में जमकर विरोध किया। विधायकों ने सत्र के दौरान ही सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिम्मत थी तो चुनाव घोषणापत्र में लिखते कि सीएए, एनपीआर और एआरसी का विरोध करेंगे? उन्होंने कहा ये दिल्ली की जनता की पीठ पर खंजर घोपने जैसा है। वहीं, विधेयक पारित करने के दौरान केजरीवाल सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि केंद्र सरकार ने एनपीआर-एनसीआर के तहत देश की जनता से अपनी नागरिकता साबित करने को कहा है। जबकि, सिर्फ दिल्ली में ही नब्बे प्रतिशत लोगों के पास ये साबित करने के लिए कोई सरकारी दस्तावेज नहीं हैं। फिर क्या इन सबको डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा? यह विभाजनकारी कानून दिल्ली सरकार फिलहाल लागू नहीं होने देगी। इसलिए केंद्र सरकार से अपील है कि दोनों कानूनों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। प्रस्ताव पर भाजपा से पहली प्रतिक्रिया कपिल मिश्रा की तरफ से आई, उन्होंने कहा कि केजरीवाल दिल्ली की जनता को मूर्ख बना रहे हैं। दिल्ली देश का हिस्सा है पाकिस्तान का नहीं। कानून जब पूरे देश में सामान रूप से लागू होने को है, तो केजरीवाल क्यों अड़ंगा लगा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय ने कहा कि जो भी निर्णय लिया जा रहा है जनता के हित के लिए। दिल्ली की जनता चाहती है।एनपीआर-एनआरसी लागू न हो, इसलिए सरकार उनके साथ है। तभी सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया है।