दिल को रखना है आबाद तो अनुशासन जरूरी

हमारी जिंदगी में एक अच्छे दोस्त की अहमियत हम सब जानते हैं। व्यक्ति का सबसे अच्छा और करीबी दोस्त उसका दिल होता है क्योंकि वो दोस्त नाराज हो जाए तो मामला बिगड़ सकता है। अब यह ऐसे ही नाराज तो नहीं होगा इसकी नाराजगी का कारण भी तो हम हैं। अपनी जीवनशैली में सुधार न करने और अनुशासन न होने के चलते हमारा दोस्त हमें दगा देता है। अपने दोस्त को आबाद रखने और खुद को सलामत रखने के लिए अनुशासन जरूरी है।
५० वर्षीय राजेंद्र साहू काम से लौट ही रहे थे कि अचानक वे गिर पड़े। भला हो सहकर्मियों का, जो उन्हें फौरन नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने हार्ट अटैक समझ तुरंत सीपीआर दिया और काफी मशक्कत के बाद उनका दिल भी धड़कने लगा। इस बात को दो साल बीत चुके हैं। मरीज का इलाज कर रहे डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि पहले तो हमें हार्ट अटैक लगा था लेकिन जब जांच की गई तो उन्हें कार्डियक अरेस्ट (हृदय की गति रुकना) था। उनकी किस्मत इतनी अच्छी थी कि उन्हें समय रहते चिकित्सकीय सहायता मिली। इतने बड़े हादसे को बीते आज दो साल गुजर चुके हैं और राजेंद्र बिल्कुल स्वस्थ हैं। वे एक सामान्य जीवन जी रहे हैं, जैसे एक आम आदमी को जीना चाहिए। उन्हें फिलहाल कोई तकलीफ या असहजता नहीं है क्योंकि अपने दिल को आबाद रखने के लिए वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अनुशासन लाए। नियमित दवाइयों का सेवन, जंकफूड को छोड़, पौष्टिक आहार, हल्की-फुल्की कसरत, तनाव रहित जिंदगी। कुल मिलाकर उन्होंने एक अच्छी जीवनशैली को अपनाया और आज उनका जिंदा रहना बिना किसी तकलीफ के यह सबसे बड़ा उदाहरण है उनके द्वारा अपने दिल को स्वास्थ्य रखने के संकल्प का। डॉ. अनिल ने कहा कि आज हृदय रोग मुंबई समेत पूरे देश में टॉप व साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है लेकिन हम इस किलर का खुद ही खात्मा कर सकते हैं। बस संकल्प लेना होगा अपने दिल का ख्याल खुद रखने का। एक बार हमने अपने आप पर अनुशासन पा लिया तो हृदय रोग क्या बल्कि अन्य कोई रोग आपको जल्दी ही छू नहीं पाएगा।
आपातकाल में क्या करें
हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट आने पर मरीज को तुरंत समतल जगह पर सुला दें। उसके बाद अपने दोनों हाथों से मरीज की छाती को दबाएं। बीच-बीच में उसके नाक को बंद करके तेजी से उसके मुंह में फूंक मारें। कार्डियक अरेस्ट आने पर मरीज को बचाने के लिए सिर्फ ३ मिनट होते है। ऐसे में मरीज को इलेक्ट्रिक शॉक की जरूरत होती है, जिसके लिए ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) मशीन की जरूरत होती है। सार्वजनिक स्थलों पर उक्त मशीन के उपलब्ध होने की जरूरत बढ़ गई है। आपातकाल के दौरान लोगों की जान बचाने में काफी मदद मिलेगी।
हृदय रोग के कारण
महिलाओं में बढ़ते हृदय रोग के कई कारण हैं। डॉ. सलिल शिरोडकर ने बताया कि खानपान, अनियमित जीवनशैली धूम्रपान और शुगर, हाइपर टेंशन की शिकायत है। इतना ही नहीं आजकल महिलाएं युवा दिखने के लिए कई चीजों का सहारा ले रही हैं, ऐसे में उनमें तनाव बढ़ता जा रहा है।
हार्ट अटैक के लक्षण
-सीने में दर्द- सीने में दबाव, दिल के बीचों-बीच कसाव महसूस हो।
शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द- दर्द सीने से हाथों (अमूमन बाएं हाथ पर असर पड़ता है लेकिन दोनों हाथों में दर्द हो सकता है), जबड़े, गर्दन, पीठ और पेट की ओर जाता हुआ महसूस हो।
मन अशांत लगे या चक्कर आना
पसीने से तरबतर होना।
सांस लेने में तकलीफ।
मितली आना, उल्टी जैसा लगे।
बेचैनी महसूस हो।
खांसी के दौरे, जोर-जोर से सांस लेना।
हालांकि दिल के दौरे में सीने में अक्सर जोर का दर्द उठता है लेकिन कुछ लोगों को केवल हल्के दर्द की शिकायत रहती है। कुछ मामलों में सीने में दर्द नहीं भी होता है, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीजवाले लोगों में।