दिल तो बेस्ट है जी, ५ साल में बेस्ट कर्मचारियों के हार्ट सर्जरी में ५०% की कमी

दिल से संबंधित बीमारियों का ग्राफ दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। फिर चाहे वह किसी भी वर्ग, व्यवसाय, निजी व सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हो। दिल से संबंधित बीमारी के लिए कहीं न कहीं नशा भी एक बड़ा कारण है और बेस्ट कर्मचारी भी इससे अछूते नहीं हैं। बेस्ट प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कर्मचारियों में बीमारी का निदान व सही समय पर उपचार करने की बदौलत ५ साल में कर्मचारियों के हार्ट ऑपरेशंस में लगभग ५० फीसदी की कमी आई है। बेस्ट के आंकड़े साफ दर्शा रहे हैं कि कर्मचारियों का दिल तो अच्छा है जी।
बेस्टकर्मियों में धूम्रपान और तंबाकू के सेवन की आदत सबसे आम है, जिसके चलते वे कैंसर, टीबी और हृदय रोग के शिकार आसानी से होते हैं। बेस्ट ने अपने कर्मचारियों को नशामुक्त करने के लिए कई अभियान चलाए। बेस्ट को इसका काफी अच्छा प्रतिसाद भी मिला है। ५,००० कर्मचारी नशामुक्त हो गए हैं। इस कार्यक्रम का परिणाम उनके स्वास्थ्य पर देखने को मिला। बेस्ट से मिले आंकड़ों के अनुसार २०१३-१४ में कुल ९१ लोगों को एंजियोप्लास्टी और बायपास सर्जरी करनी पड़ी थी। ये वो लोग हैं जिन्हें काम के समय हार्ट अटैक आया और कुछ लोगों के रूटीन जांच में हृदय विकार होने की बात सामने आई थी। बेस्ट के निरंतर चलाए जा रही मुहिमों का परिणाम है कि वर्ष २०१७-१८ में केवल ४५ लोगों को उक्त ऑपेरशन से गुजरना पड़ा। बेस्ट के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल सिंगल ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया कि पिछले पांच वर्षों में कर्मचारियों के स्वास्थ्य में काफी सुधार आया है। हमने स्वास्थ्य हृदय अभियान के अंतर्गत केईएम अस्पताल के साथ भी समझौता किया है। कई बार कर्मचारियों को नशे के अलावा अनेक पारिवारिक समस्या भी होती है, जो तनाव को बढ़ावा देता है और आगे चलकर यह हृदय विकार का रूप लेता है। केईएम अस्पताल की मनोरोग विभाग के डॉक्टर हमारे जरूरतमंद कर्मचारियों की काउंसलिंग भी करते हैं। इतना ही नहीं हम कर्मचारियों के ऑपेरशन का जिम्मा भी उठाते हैं। यदि ड्यूटी के दौरान किसी को हार्ट अटैक आता है तो उसे पास के निजी अस्पताल में भी एडमिट होने पर उसके २४ घंटे का खर्च भी बेस्ट द्वारा वहन किया जाता है। पिछले ५ वर्षों में हृदय रोग से होनेवाली मौत के आंकड़ों में भी कमी दर्ज की गई है।