दिव्यांगों में भी दिखा मतदान का जज्बा

२०१९ लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान कल समाप्त हो गया। इसी के साथ उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में वैâद हो गया। इस चुनावी पर्व में मुंबईकरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें दिव्यांग भी पीछे नहीं थे। मुंबई से सटे ठाणे आदि लोकसभा क्षेत्रों में भी दिव्यांग मतदान में सहभागी बने।
बता दें कि मुंबई के सभी बूथों में दिव्यांगों और बुजुर्गों को लाइन में खड़े रहने से छूट मिली हुई थी। मालवणी, कच्चे रोड पर रहनेवाले आनंद देवडीगा (४३) दोनों पैरों से लाचार हैं। कहीं भी आने-जाने के लिए उन्हें ट्राइसाइकिल का सहारा लेना पड़ता है। वह कल मालवणी ६ नंबर स्थित मतदान केंद्र पर अपना मत देने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनका नाम पहले १ नंबर के मनपा टाउनशिप स्कूल में आता था। इस बार यहां की लिस्ट में आया है। अपने घर से लगभग दो किलोमीटर दूर वे मतदान करने आए थे। इसी प्रकार ५४ वर्षीय सुमन जानपुरे बचपन से ही नेत्रहीन हैं। उन्होंने बताया कि वे हर चुनाव में मतदान जरूर करती हैं। इस बार भी अपनी पड़ोसन मंदाकिनी महाडिक की मदद से मतदान केंद्र पर पहुंची थीं।
कल्याण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत करीब ५,००० दिव्यांग मतदाता हैं। कलवा-मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दिव्यांग मतदाताओं की संख्या मुंब्रा में २५४ तथा कलवा में १२५ है। बृहन महाराष्ट्र दिव्यांग कामगार संगठन के अध्यक्ष एवं उम्मीदवार यूसुफ खान ने बताया कि जिला चुनाव अधिकारी ने एक बैठक में दिव्यांगों को मतदान में भाग लेने के लिए हर सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, बावजूद कई मतदान केंद्रों पर न तो ढंग के रैप थे और न ही व्हील चेयर। कुर्सी के अंदर दो पाइपों को वेल्ड कर ऐसी डोली बनाई गई थी कि उसमें कोई दिव्यांग बैठ ही नहीं सकता था। एक दिव्यांग महिला को दूसरे महले पर बने बूथ में जाने के लिए स्ट्रेचर का उपयोग करना पड़ा था। दिव्यांगों को लाने ले जाने के लिए ऑटो का बंदोबस्त किया गया था पर अन्य मतदाता भी इसका उपयोग करते देखे गए। दिव्यांगों के लिए बूथ पर पानी का इंतजाम भी नहीं किया गया था। इन सब दुश्वारियों के बावजूद कलवा तथा मुंब्रा के दिव्यांगों ने शत प्रतिशत मतदान कर समाज को एक संदेश देने का काम किया है।