दीदी, बंद करो दादागीरी!, तिलमिलाए मुंबई के बंगाली

इस लोकसभा चुनावों में देश के बाकी हिस्सों में जहां चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हो रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल हिंसा के कारण सुर्खियों में है। बंगाल में अभी तक जितने भी चरण के चुनाव हुए हैं, वे सभी रक्त-रंजित रहे हैं। चुनाव के दिन सुबह टीवी खोलते ही वहां बंगाल की मारपीट और बम के धमाके स्क्रीन पर आने लगते हैं। बंगाल टीएमसी यानी दीदी ममता बनर्जी का गढ़ है और दीदी की दादागीरी के सामने बाकी के सभी दल असहाय हैं। चुनाव आयोग ने बंगाल की संभावित हिंसा को देखते हुए केंद्रीय पुलिस फोर्स के कई दस्ते वहां भेजे हैं पर बहते खून पर रोक नहीं लग पा रहा। इससे प. बंगाल की गलत छवि बन रही है और इससे मुंबई में रहनेवाले बंगाली वहां अपनों के घायल होने से काफी परेशान हैं।
मुंबई में रहनेवाले बंगालियों का दीदी को स्पष्ट रूप में एक ही संदेश है कि दीदी, अपनी दादागीरी बंद करो! मुंबई में बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय रहता है। इनमें नौकरी पेशा से लेकर आभूषण बनाने का व्यवसाय करनेवाले शामिल हैं। इन सबकी चिंता है कि दीदी के राज में बंगाल की थू-थू हो रही है। पहले सीपीएम के राज में नक्सली ऐसे खूनी खेल खेलते थे। पिछले कुछ वर्षों में सीपीएम का किला ध्वस्त हो गया और उसके वैâडर ने दीदी का दामन थाम लिया। पहले वे सीपीएम के लिए हिंसा करते थे, अब दीदी के लिए कर रहे हैं।
देश में लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है पर प. बंगाल में खून की नदियां बह रही हैं। बंगाल में भले ही वोटिंग का प्रतिशत काफी ज्यादा है पर बम-गोलियों की आवाज ने उसे धूमिल कर दिया है। कल छठे चरण में भी हुई हिंसा में २ लोग मारे गए। बंगाल की मुख्यमंत्री दीदी ममता बनर्जी ने चुनाव जीतने के लिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को किसी भी हद तक जाने की छूट दे रखी है।
ममता को चुनाव जीतने के लिए संविधान और चुनावी आचार संहिता की भी परवाह नहीं है। अपनी तल्ख भाषा के कारण सुर्खियों में आई दीदी हिंसा के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धमकाने या नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहीं। पीएम को मिट्टी-कंकड़ के लड्डू भेजने से लेकर उन्हें झापड़ मारने तक की भाषा का प्रयोग ममता ने अपने भाषणों में किया है। इन दिनों चुनाव के दौरान बंगाल में जो भय का माहौल बना है, उसे देखते हुए मुंबई में रह रहे बंगाली बहुत आहत हो रहे हैं।
मुंबई में रह रही देवरीता कहती हैं कि इन दिनों चुनावों में बंगाल में जो हो रहा है, वह गलत है। चुनाव में दीदी को अपना जनाधार खिसकने का डर है, जिसके चलते दीदी अपने कार्यकर्ताओं को हिंसा की खुली छूट दे दी है। इस कारण इन दिनों बंगाल का माहौल बिगड़ गया है। जहां-तहां हिंसा और मर्डर के मामले बढ़ रहे हैं, लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं। बंगाल में यह बात किसी से नहीं छुपी है कि ममता वोट बैंक की राजनीति को देखते हुए मुसलमानों को बढ़ावा देती हैं। दीदी को दादागीरी बंद कर शांति से चुनाव लड़ना चाहिए। अंधेरी लोखंडवाला की निवासी माया घोष कहती हैं कि ममता बनर्जी हिटलर हैं। पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा गुंडागर्दी की जा रही है। चुनाव की घोषणा के बाद से आए दिन हिंसा की खबरें आ रही हैं। चुनाव के दौरान हिंसा हुई जो कि राज्य और वहां के लोगों के लिए ठीक नहीं है। इस बार दीदी की दादागीरी नहीं चलेगी। लोगों को भयमुक्त सरकार चाहिए जो एनडीए ही दे सकती है। दहिसर में रहनेवाले केदार चक्रवर्ती कहती हैं कि ममता के इशारे पर आए दिन तृणमूल कांग्रेस के लोग हिंसा कर रहे हैं। ममता सत्ता के लिए इस हद तक चली जाएंगी यह सोचा नहीं था। बंगाल के लोग अब ममता से ऊब गए हैं। इस बार एनडीए की सरकार बनेगी और नरेंद्र मोदी ही फिर देश के प्रधानमंत्री।

पूरे देश में मतदान शांतिपूर्ण
प.बंगाल में हिंसक चुनाव
दीदी के राज में हिंसक चुनाव
कल भी २ लोगों की मौत
मुंबई का बंगाली समाज रोष में