दुनिया साथ है, फिर भी चीन का पीठ में वार

जैश-ए-मोहम्मद के टोली प्रमुख मसूद अजहर के साथ चीन मजबूती से खड़ा है। हिंदुस्थान की कूटनीति को लगा यह सबसे बड़ा धक्का है। मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव युनो में अर्थात संयुक्त राष्ट्र संघ में निरस्त हो गया। यह प्रस्ताव प्रâांस ने लाया और चीन ने अपने वीटो का इस्तेमाल कर उसे रद्द कर दिया। चीन ने ऐसा क्यों व्यवहार किया इस पर आश्चर्य करने जैसा कुछ नहीं। चीन, पाकिस्तान का समर्थक है और रहेगा। हिंदुस्थान का असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं चीन है। चीन के समर्थन पर पाकिस्तान की पूंछ फड़फड़ा रही है। पाकिस्तान को दुनिया में अकेले करने का डंका हम कितना ही क्यों न पीटें पर वो सच नहीं है। आतंकवाद तथा मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव लाकर प्रâांस राफेल में खाए नमक की कीमत अदा कर रहा था और ऐसा करने के अलावा उसके पास दूसरा कोई चारा नहीं था। अमेरिका और यूरोप के अनेक मित्र कहलानेवाले राष्ट्रों ने ‘पुलवामा’ आतंकवादी हमले का धिक्कार किया और हिंदुस्थान के बारे में संवेदना व्यक्त की। मगर इनमें से एक भी राष्ट्र ने कश्मीर के बारे में हिंदुस्थान की बात दृढ़ता से नहीं रखी। दो देश इस मुद्दे को चर्चा से हल करें तथा पाकिस्तान अपनी भूमि का इस्तेमाल आतंकवादियों को न करने दे, ऐसा कहकर समय बिताना मतलब समर्थन नहीं होता। हिंदुस्थान का वैमानिक अभिनंदन पाक के कब्जे में था और उसे छोड़ने के बारे में इमरान खान ने शांतिदूत की भूमिका निभाई। फिर वो भय हो अथवा शरणागति लेकिन जिनेवा अनुबंध के अनुसार युद्धबंदी को छोड़ना ही था। अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप ने जिस ‘गुड न्यूज’ का संकेत एक दिन पहले दिया था वो गुड न्यूज फिलहाल गुलदस्ते में है। मसूद अजहर को ‘जिंदा या मुर्दा’ पकड़ने के लिए अमेरिकी कमांडो का दस्ता हाजिर है, ऐसा वे कहते तो वो गुड न्यूज होता। ऐसा कुछ हुआ क्या? मसूद अजहर जिंदा है और उसे गिरफ्तार कर उसका खात्मा करने की योजना अधर में है। पुलवामा हमले के बाद और हिंदुस्थान द्वारा किए गए हमले के बाद चीन की भूमिका ‘तटस्थ’ थी। इसका अर्थ हमारे कूटनीतिकारों ने ऐसा लिया कि चीन भी अब पाकिस्तान के साथ खड़ा नहीं है। मगर चीन की तटस्थता और मौन घातक होती है ये बात ‘यूनो’ की सुरक्षा परिषद में एक बार फिर दिखाई दी है। चीन ने जिस तरह यूनो की सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर का बचाव किया और एक तरह से पाकिस्तान का समर्थन किया वो सारा मामला जितना घिनौना है उतना निर्घृण है। फ्रांस, अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप के अन्य राष्ट्र एक तरफ तथा मसूद अजहर के बारे में चीन दूसरी तरफ ऐसा यूनो में अब तक तीन बार घटित हुआ है। मसूद चीन की नजर में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी नहीं है। फिर उसे चीन ‘संत’ की मान्यता देनेवाला है क्या? स्वार्थ के चलते पाकिस्तान चीन का मित्र है। नेपाल-पाक जैसे राष्ट्रों को अपना गुलाम बनाकर उनकी जमीन पर कब्जा करना ही चीन की नीति है। अमेरिका को धक्का देने के लिए और उसके जरिए हिंदुस्थान को अशांत और अस्थिर करने के लिए चीन पाक की सहायता कर रहा है। चीन के प्रधानमंत्री अमदाबाद आते हैं। मोदी के साथ झूले पर बैठते हैं। साबरमती आश्रम में जाकर शतरंजी पर बैठते हैं। हम इसकी प्रशंसा करते हैं। लेकिन चीन का मन उल्टे कलेजेवाले शैतान का है और हम आधी हल्दी लगते ही पीले होकर नाचनेवाले हैं। चीन ने सीधे-सीधे पाक के आतंकवाद को समर्थन दिया। यूनो का उसे भय नहीं और अमेरिका जैसे राष्ट्रों की उसने परवाह नहीं की। इसका सबक हमारी कूटनीतिवाले चाणक्यों को लेना होगा। दुबई के इस्लामिक राष्ट्रों के परिषद में हिंदुस्थान के विदेश मंत्री ने जोरदार भाषण दिया यह मान्य है लेकिन उन्हीं इस्लामी राष्ट्रों के संगठन द्वारा कश्मीर के बारे में पेश किया गया प्रस्ताव हमारे हित में उचित नहीं था इस बात को भी न भूलें। दुनिया का आतंकवाद गंभीर है। ब्रिटेन, अमेरिका,  फ्रांस  ने उस पर नियंत्रण प्राप्त किया है। हिंदुस्थान की भूमि पर ये राक्षस आतंक मचा रहा है। यह मामला मसूद अजहर तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान की फौज तथा सत्ताधारियों की भूमिका शुरुआत से ही संदेहास्पद रही है। पाकियों ने पुलवामा में हमारे ४० जवान मारे। हमने उनका एक एफ-१६ विमान गिराया। जैश के अड्डे पर हमला करके निश्चित कितने आतंकवादी खत्म किए इस पर हिंदुस्थान में सवाल उठाए जा रहे हैं। पुलवामा हमला यह हिंदुस्थान पर हुआ हमला है। कश्मीर में मारा जानेवाला हर जवान मतलब हिंदुस्थान के कलेजे पर किया गया वार है। किसी भी तरह का युद्ध न करते हुए पाकिस्तान हमें इस तरह नुकसान पहुंचा रहा है और हम पुलवामा हवाई हमले की राजनीति करने में ही खुद को धन्य मान रहे हैं। विरोधी दल थोड़ी जिम्मेदारी से पेश आएं और सत्ताधारी दल को भी संयम बरतना होगा, यही मध्यम मार्ग है। मसूद अजहर को यूनो में आतंकवादी के रूप में घोषित करने की हिंदुस्थान की कोशिशों में अड़ंगा डालकर चीनी अजगर ने अपना असली रूप फिर दिखा दिया है। इससे पाकिस्तान को बल मिलेगा। मसूद अजहर एक मोहरा है। वो आसानी से हाथ नहीं लगनेवाला। पाकिस्तान को सांस लेने के लिए समय मिल गया है और चीन उसे प्राणवायु दे रहा है। दुनिया हमारे साथ है फिर भी पीठ में वार होना थमा नहीं है। देश के सभी राजनीतिज्ञों को मीठा बोलना बंद कर कृति के लिए सरकार को समर्थन देना होगा। ऐसा किया गया तो बहुत कुछ साध्य होगा।