दुश्मन का काल है ‘स्पाइस!’, पहले बिल्डिंग में घुसता है फिर मार डालता है

बालाकोट पर हुए एयर स्ट्राइक के लगभग एक सप्ताह बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग सेंटर के सैटेलाइट इमेज आ गए हैं। अब विशेषज्ञ इसका अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं। एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी ने पहले ये तस्वीरें जारी करते हुए बताया था कि बालाकोट में जैश की बिल्डिंग वैसे ही खड़ी है और वहां कोई नुकसान नहीं हुआ है। पर अब अब कुछ वरिष्ठ रिटायर्ड फौजी ऑफिसरों व विशेषज्ञों ने कहा है कि वहां एयर स्ट्राइक जिन ‘स्पाइस २०००’ गाइडेड मिसाइलों से हुआ था, वह काफी उन्नत किस्म की मिसाइलें हैं और उसके सबूत तस्वीर में मौजूद हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों के विशेषज्ञ कर्नल विनायक भट (रि) का कहना है कि भारत के पास अभी काफी उन्नत किस्म के वारहेड मौजूद हैं। जैश वैंâप की जो तस्वीर है ये एयर स्ट्राइक के ६ दिनों बाद की है। मगर इस तस्वीर में ढांचे के ऊपर ४ ब्लैक होल दिख रहे हैं जो इस बात के संकेत हैं कि वहां से ‘स्पाइस’ मिसाइल भीतर घुसे। संभवत: वायुसेना ने ‘स्पाइस २५०’ का प्रयोग किया है। ये भीतर घुसकर वहां मौजूद आंतकियों को मारने में पूरी तरह सक्षम है। वहीं इमारत के बगल में जो मैदान है, वहां भी मिट्टी खोदे जाने के निशान हैं जो स्ट्राइक के पहले की तस्वीरों में नहीं हैं। इससे ऐसा लगता है कि वहां मृत आतंकियों के शव दफनाए गए होंगे। कर्नल भट ने इन तस्वीरों को ट्वीट भी किया है और विस्तार से समझाया है कि वहां क्या हुआ!
एयर वाइस मार्शल कपिल काक (रि) का कहना है कि आजकल के हथियार ऐसे हैं जो बिल्डिंग नहीं गिराते लेकिन अंदर रहनेवाले लोगों को मारते हैं। वायुसेना के पास जो भी सबूत हैं वो सैटेलाइट इमेज, तकनीक से हासिल होंगे। खुफिया एजेंसी रॉ के पास भी ऐसे संसाधन हैं जिनसे टारगेट की इमेज ली जा सकती है। इसे सिंथेटिक एपर्चर राडार कहते हैं जो घने बादल में भी तस्वीरें ले सकता है। जानकारों के अनुसार इस तरह की स्ट्राइक में अगर हम आधे घंटे के भीतर इमेज ले पाते हैं तब तो ठीक है। लेकिन २४ घंटे बीत जाने के बाद दुश्मन देश को पास टारगेट छिपाने का पर्याप्त समय मिल जाता है। बालाकोट में चूंकि जैश की इमारत ध्वस्त नहीं हुई है इसलिए पाकिस्तान को वहां मरम्मत करने का मौका भी मिल गया। इसे सैटेलाइट इमेज में देखा जा सकता है।

स्मार्ट हथियार है ‘स्पाइस’
‘स्पाइस-२०००’ एक स्मार्ट हथियार है जिसमें लेजर गाइडेड को-ऑर्डिनेट सेट किए जाते हैं। यह छत के रास्ते भीतर जाता है और बिल्डिंग के भीतर टारगेट को हिट करता है। छत में जहां यह छेद करता है उसे ‘पिन होल’ कहा जाता है। यह पिन होल करीब ५५ सेमी का होता है। इस इजरायली मिसाइल की खासियत यह है कि इसे सैटेलाइट के द्वारा भी गाइड किया जा सकता है। इसके लिए २ तरह के वारहेड एमके-८३ और एमके-८४ होते हैं। इसे एफ-१५, एफ-१६, पनाविया टॉरनेडो, ग्राइपेन और मिराज-२००० विमानों से छोड़ा जा सकता है। इस मिसाइल की ३ श्रेणियां स्पाइस-१००० (४५३ किलो), स्पाइस-२००० (९०७ किलो) और स्पाइस-२५० (११३ किलो)।