दुष्कर्म का विरोध करने के चलते गई नाबालिग की जान

साकीनाका इलाके में नाले में मिली १० वर्षीय नाबालिग लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। दुष्कर्म का विरोध करने के कारण १५ वर्षीय पड़ोसी लड़कों ने उक्त नाबालिग की हत्या करके लाश को नाले में फेंका था। जबकि हत्या के बाद वह पीड़ित परिवार के साथ उनके नाबालिग बेटे को ढूंढ़ने का ड्रामा भी करता रहा।
बता दें के १० वर्षीय शकील (काल्पनिक नाम) गुरुवार की शाम ५ बजे अचानक घर से ट्यूशन के लिए निकला था लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजन उसे ढूंढ़ रहे थे, उसी रात १०.३० बजे एक गुमनाम कॉलर ने फोन करके शकील के अभिभावकों से ५ लाख रुपए की फिरौती मांग थी। शकील के परिजनों ने मुहल्ले में रहनेवाले तथा शकील के स्कूल में पढ़नेवाले सलीम (काल्पनिक नाम) पर शकील के अपहरण का संदेह जताया था क्योंकि सलीम ने सप्ताहभर पहले शकील को डरा-धमका कर गल्ले में जमा की गई रकम मंगवाई थी। साकीनाका पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक किशोर सावंत के मार्गदर्शन में मामले की जांच कर रहे पीआई सुनील माने, एपीआई रउफ शेख, पीएसआई संदीप सालुंखे की टीम के समक्ष सलीम ने इन आरोपों से इंकार करते हुए बताया कि खुद शकील ने उसे और कुछ अन्य साथियों को पार्टी दी थी।
पीआई सुनील माने ने बताया कि हफ्ता मांगनेवालों ने जिस नंबर से फोन किया था, वह एक महिला का था। महिला से संपर्क करने पर पता चला कि फोन उसके १५ वर्षीय बेटे अमजद (काल्पनिक नाम) के पास है तथा वह उस समय स्कूल में है। उस बच्चे को हिरासत में लेने पर उसने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन बाद में उसने सलीम के साथ मिल कर शकील के अपहरण और हत्या की बात कबूल कर ली। दुष्कर्म का विरोध करने के चलते उन्होंने यह गुनाह किया था। अमजद और सलीम के बताए अनुसार पुलिस ने कल शकील की लाश साकीनाका नाले से बरामद कर ली।