" /> देवेंद्र जी, बजट पर पुस्तक लिखते रहो! फडणवीस की पुस्तक का मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया विमोचन

देवेंद्र जी, बजट पर पुस्तक लिखते रहो! फडणवीस की पुस्तक का मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया विमोचन

देवेंद्र जी, मैंने यह विचार कभी नहीं किया था कि ऐसे किसी विषय पर मुझे भाषण देना होगा। ऐसा प्रसंग आपकी वजह से आया है। बजट पेश होने से पहले ‘अर्थसंकल्प-सोप्या भाषेत’ इस पुस्तक को लिखकर आपने मेरा काम आसान कर दिया है। आगामी पांच-दस वर्ष तक पुस्तक लिखते रहें, ऐसी शुभकामनाएं कल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को दी। इसी के साथ वित्त मंत्री अजीत पवार ने फडणवीस को दिल्ली जाने की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सब कुछ करके भी निर्विकार वैâसे रहें, इस पर भी आपको एक पुस्तक लिखनी चाहिए।
विधान भवन के सेंट्रल सभागार में पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लिखित किताब ‘अर्थ संकल्प-सोप्या भाषेत’ (सरल भाषा में बजट) का कल विमोचन हुआ। इस अवसर पर मंच पर मौजूद राज्य के उपमुख्यमंत्री व वित्तमंत्री अजीत पवार की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि अब हमारी अजीत दादा से अच्छी दोस्ती हो गई है। उन्होंने कहा कि यशस्वी वित्तमंत्री वो है, जो लोगों की जेब का ख्याल करे। उन्होंने कहा कि मैं यह किताब जरूर पढूंगा।
लेखक बनने में कोई बुराई नहीं
अजीत पवार ने कसा तंज
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि यह किताब सभी के लिए उपयोगी है। मेरे बजट पेश करने के दो दिन पहले ये किताब आई है। उम्मीद है कि विपक्ष के सदस्य मेरे बजट भाषण को शांतिपूर्वक सुन कर समझेंगे। अजीत पवार ने मजाकिया लहजे में कहा कि देवेंद्र के राजनीति छोड़कर लेखक बनने में कोई बुराई नहीं है। यदि वे दिल्ली जाते हैं तो सबसे ज्यादा खुशी सुधीर मुनगंटीवार (वरिष्ठ भाजपा नेता) को होगी।

 विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि देवेंद्र और मैं दोनों विदर्भ से हैं और अच्छे मित्र हैं। उन्होंने कहा कि वैसे देवेंद्र जी विपक्ष में ज्यादा अच्छा काम करते हैं।

 विधान परिषद के सभापति रामराजे निंबालकर ने कहा कि रिपोर्टर-एंकर को भी बजट समझाने की जरूरत है। विमोचन समारोह में सभी नेताओं ने जमकर विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस की चुटकी और कटाक्ष किए।

जल्द होगा हिंदी-अंग्रेजी संस्करण-फडणवीस
किताब के लेखक व विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि बजट की भाषा काफी क्लिष्ट मानी जाती है। मैंने अनुभव किया कि विधायकों को भी बजट समझ में नहीं आता है। उन्हें बैग भरकर बजट संबंधी जो किताबें मिलती हैं, उसे वे यहीं छोड़ कर चले जाते हैं। आम लोगों को सरल भाषा में समझाने के लिए यह पुस्तक लिखी है।