देश आपका सदा ऋणी रहेगा

पाकिस्तान से सटी हिंदुस्थान की सरहद तथा जम्मू-कश्मीर आज भी अशांत है क्योंकि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता है। वर्ष १९४८, १९६५ और १९७१ में हिंदुस्थान के साथ सीधी लड़ाई हार चुका पाकिस्तान पिछले लगभग ४ दशक से भी अधिक समय से हिंदुस्थान में आतंकवाद का पोषक बनाकर छद्म युद्ध छेड़ रखा है। लगभग २० साल पहले उन्हीं आतंकवादियों के वेश में पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल में घुसपैठ करके कब्जा जमा लिया था। तब बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व आतंकवादियों ने लाइन ऑफ कंट्रोल यानी हिंदुस्थान-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेह-लद्दाख को हिंदुस्थान से जोड़नेवाली सड़क का नियंत्रण हासिल कर लिया था। इससे सियाचिन-ग्लेशियर पर हिंदुस्थान की स्थिति कमजोर होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। हिंदुस्थान और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध वर्ष १९९९ के मई महीने में शुरू हुआ था। २६ जुलाई १९९९ के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर हिंदुस्थानी भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। दो महीने से ज्यादा समय तक चले इस युद्ध में हिंदुस्थानी थलसेना व वायुसेना के जवानो ने अपने अदम्य शौर्य और साहस के दम पर अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। वैâप्टन विक्रम बत्रा, वैâप्टन अनुज नायर, मेजर पद्मपाणि आचार्य, लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय, वैâप्टन सौरभ कालिया और स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा जैसे कई वीर जवान दुश्मनों से लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। इस युद्ध में हमारे लगभग ५२७ से अधिक वीर योद्धा शहीद व १३०० से ज्यादा घायल हो गए, जिनमें से अधिकांश अपने जीवन के ३० वसंत भी नही देख पाए थे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता इस युद्ध में पाकिस्तान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए। भारतीय सेना के विभिन्न रैंकों के लगभग ३०,००० अधिकारी व जवानों ने ऑपरेशन विजय में भाग लिया। उन्हीं वीर जवान की याद में ‘२६ जुलाई’ अब हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन देशवासी कारगिल के शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता जताते हैं। यह दिन समर्पित है, उन्हें, जिन्होंने हमारे आनेवाले कल के लिए अपना आज कुर्बान कर दिया। पहले पाकिस्तान ने इस युद्ध के लिए कश्मीरी आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि पाकिस्तान इस पूरी लड़ाई में लिप्त था। बाद में नवाज शरीफ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पाक सेना की भूमिका को स्वीकार किया था। यह युद्ध हाल के ऊंचाई पर लड़े जानेवाले विश्व के प्रमुख युद्धों में से एक है। सबसे बड़ी बात यह रही कि दोनों ही देश परमाणु हथियारों से संपन्न हैं।
‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।