देश कौन तोड़ रहा है?, वे दोबारा सत्ता में नहीं दिखाई देंगे, इसका विश्वास दिलाओ!

प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा चेताते हुए कहा है कि वे हिंदुस्थान का विभाजन नहीं होने देंगे। इसके लिए उनका अभिनंदन! जम्मू में जाकर मोदी ने ऐसा कहा ये बहुत अच्छा हुआ लेकिन हिंदुस्थान का विभाजन कौन कर रहा है और हम सब उसे वैâसे रोकेंगे ऐसा सवाल देश के सामने उठ सकता है। अब हिंदुस्थान का विभाजन करने की किसमें इतनी हिम्मत है? ऐसा सोचनेवाले की कनपटी फोड़ने की हिम्मत यहां की जनता में निश्चित ही है। धारा-३७० व ३५-अ का विवाद चुनाव प्रचार में चरम पर है। देश की जनता कमजोर नहीं है। उसकी कलाइयों पर सभी को विश्वास करना होगा। जम्मू-कश्मीर के लिए अलग से प्रधानमंत्री की आग लगानेवाली बात नेशनल काॅन्फ्रेंस  के नेता डॉ. फारुख अब्दुल्ला ने रखी है लेकिन अब्दुल्ला की सौ पीढ़ियां नीचे उतर आएं तब भी ये संभव नहीं। जम्मू-कश्मीर को स्वतंत्रता के बाद एक विशिष्ट परिस्थिति में संविधान की धारा-३७० के द्वारा एक विशेष दर्जा दिया गया है। इस विशेषाधिकार के कारण देश का कानून जम्मू-कश्मीर में नहीं चलता। इसीलिए पिछले कई वर्षों से धारा-३७० को रद्द करने की मांग की जा रही है। इस धारा के कारण उस राज्य का स्वतंत्र झंडा आदि है और वो राष्ट्रभक्तों के दिल में चुभता है। धारा-३७० रद्द करेंगे यह शिवसेना-भाजपा का मुख्य एजेंडा है और कोई उसे चुनौती दे रहा होगा तो उसका दांत गले में डालकर धारा-३७० रद्द ही किया जाना चाहिए। डॉ. फारुख अब्दुल्ला निश्चित तौर पर किसकी भाषा बोल रहे हैं, इसे भी समझना होगा। हालांकि यही डॉ. अब्दुल्ला पहले वाजपेयी मंत्रिमंडल में मंत्री थे। उनका दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा था। वास्तविक धारा-३७०, धारा ३५-अ के बारे में डॉ. अब्दुल्ला तथा उनके दल की विरोधी नीति पुरानी ही है। फिर भी संसद में सिर गिनने का गणित हासिल करने के लिए हम उनकी फरवाली टोपी का चुम्मा लेते रहते हैं। यह सुविधाजनक राष्ट्रवाद है। देशभक्ति की ये रंगपुताई बंद होनी चाहिए। जो डॉ. अब्दुल्ला का, वही उस पीडीपी की महबूबा मुफ्ती का। धारा-३७० रद्द किया तो कश्मीर हिंदुस्थान में नहीं रहेगा, ऐसी गर्जना इस महिला ने की है। लेकिन ये महिला भी कल तक भाजपा के सहारे ही जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद को गरम कर रही थी। उनका भी जम्मू-कश्मीर के बारे में होनेवाला देशद्रोही विचार पुराना ही है। फिर भी भाजपा ने उनके साथ दोस्ताना किया था और हम एक आस्था से इस अशिष्ट युति का विरोध करते रहे। अब इन दोनों को भी जम्मू-कश्मीर के लिए अलग प्रधानमंत्री चाहिए तथा धारा-३७० रद्द की तो देश से अलग हो जाएंगे, ऐसी भाषा बोली और उस पर मोदी ने जवाब दिया। हिंदुस्थान के प्रधानमंत्री को जिस अंदाज में बोलना चाहिए था, उसी अंदाज में मोदी ने जोरदार तरीके से यह कहा है। अब्दुल्ला और मुफ्ती इन दोनों घरानों ने जम्मू-कश्मीर की तीन पीढ़ियां बर्बाद कीं, ऐसा प्रहार मोदी ने किया है। जम्मू-कश्मीर से जिन्हें विस्थापित होना पड़ा उन कश्मीरी पंडितों के सवालों पर भी मोदी ने बोला है। लेकिन कश्मीरी पंडितों की घरवापसी २०१४ से २०१९ इन पांच वर्षों में नहीं हुई। कांग्रेस के कार्यकाल में पंडितों का पलायन हुआ यह स्वीकार है। लेकिन पिछले ५ वर्षों में पंडित फिर खुद के घर में लौटे क्या? यह वेदना सालती है। प्रधानमंत्री पद पर कोई हो या न हो लेकिन देश का विभाजन अब नहीं होगा। इंच भर टुकड़ा भी दूसरों के जबड़े में नहीं जाएगा। कश्मीर की तो बात ही छोड़िए। मोदी ने देश तोड़ने की भाषा बोलनेवालों पर हमला किया है यह उत्तम, पर दो बातों का विश्वास मोदी को देश को दिलाना होगा। कल सत्ता स्थापना की आंकड़ेबाजी में कुछ भी हो जाए तो हिंदुस्थान का विभाजन करने की बात करनेवालों से रिश्ता नहीं जोड़ा जाएगा। जिन्होंने कश्मीर की तीन पीढ़ियां बर्बाद कीं, उसमें से किसी को भी मोदी के मंत्रिमंडल या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सामने खड़ा नहीं किया जाएगा, इसका विश्वास देना मतलब देश विभाजन करनेवालों को ठोंककर निकालने के समान है। देश तोड़नेवालों के समर्थन में शरद पवार क्यों खड़े हैं? यह सवाल मोदी के मन में अब आया है। उसी तरह नतीजे के बाद भी आना चाहिए। देश का विभाजन करनेवालों को ही नहीं बल्कि इस तरह के लोगों से हाथ मिलानेवालों को भी देश की सत्तानीति में इससे आगे स्थान नहीं मिलना चाहिए। देशद्रोहियों के समर्थन में आज जो भी खड़े हैं, वे कल राजनीतिक जरूरत के रूप में देशभक्तों की जांघ से जांघ सटाकर बैठेंगे तो वो जवानों का अपमान होगा। एक बात निश्चित है कि अब देश नहीं टूटेगा। अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती जैसे लोगों के मंसूबे पूरे नहीं होंगे। १३३ करोड़ जनता के पास मजबूत कलाई है इसलिए देश का विभाजन करनेवालों को यहीं गाड़ देंगे!